सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल जज की बिन माँगी बंधक सलाह पर जताई नाराजगी, माँगी स्पष्ट सफाई
पश्चिम बंगाल के एक अंडर‑ट्रायल आरोपी की जमानत याचिका पर ट्रायल जज ने सुप्रीम कोर्ट को अतिरिक्त समय माँगते हुए बंधक‑से‑संबंधित सलाह दी। इससे कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि कोई न्यायाधीश अदालत को बंधक कब देनी है, इसका सुझाव नहीं दे सकता, और जज से तुरंत स्पष्टीकरण मांग दिया। पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को तीन महीने में समाप्त करने का निर्देश दिया था, जबकि आरोपी पाँच साल से जेल में है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Trial Judge Advises Supreme Court On Bail Supreme Court Seeks Explanation West Bengal Undertrial Case
सुप्रीम कोर्ट को बिन मांगी सलाह देना ट्रायल जज को पड़ा भारी! अदालत ने मांगी सफाई, क्या है मामला?
Contributed by: Amit Anand Choudhary•Edited by: अशोक उपाध्याय|टाइम्स न्यूज नेटवर्क•
Subscribe
ट्रायल जज ने सुप्रीम कोर्ट को जमानत देने-न देने पर दी सलाह, कोर्ट ने जताई नाराजगी और मांगी सफाई। 5 साल से जेल में बंद आरोपी के ट्रायल में देरी पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही तीन महीने में सुनवाई पूरी करने का आदेश दे चुका था।
नई दिल्ली: यह बात कुछ असामान्य लग सकती है कि कोई ट्रायल जज देश की सबसे बड़ी अदालत को यह बताए कि किसी मामले में जमानत दी जानी चाहिए या नहीं। लेकिन पश्चिम बंगाल के एक मामले में ऐसा ही हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने अब ट्रायल जज से इस बात पर सफाई मांगी है कि उन्होंने अपने पत्र में कोर्ट को जमानत के मुद्दे पर सलाह क्यों दी।
5 साल से जेल में बंद है आरोपी
यह मामला पश्चिम बंगाल के एक आरोपी की जमानत याचिका से जुड़ा है। आरोपी पिछले करीब 5 साल से अंडर-ट्रायल कैदी के तौर पर जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को दिए अपने आदेश में कहा था कि ट्रायल पूरा होने के बाद ट्रायल कोर्ट को इसकी रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी।
समय पर ट्रायल पूरा नहीं हो पाया
सुप्रीम कोर्ट के तय समय में ट्रायल पूरा नहीं हो सका। इसके बाद बारासात, उत्तर 24 परगना की तीसरी अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने ट्रायल पूरा करने के लिए और समय मांगा। जज ने 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। लेकिन इस पत्र में ट्रायल पूरा करने के लिए समय मांगने के साथ-साथ जमानत से जुड़े नियमों पर भी सुप्रीम कोर्ट को कुछ सलाह दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच के सामने जब यह पत्र रखा गया तो कोर्ट ने जज की ओर से दी गई सलाह पर हैरानी जताई। बेंच ने कहा कि पत्र में जमानत कब दी जानी चाहिए और कब नहीं, इस तरह की सलाह देना जरूरी नहीं था। कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह ट्रायल जज से इस बारे में जल्द से जल्द उचित सफाई मांगे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'ट्रायल जज ने जिस तरह से इस कोर्ट को पत्र लिखकर और समय मांगा है, उससे हम काफी परेशान हैं। पीठासीन अधिकारी का यह काम नहीं है कि वह कोर्ट को सलाह दे कि उसे कब जमानत देनी चाहिए और कब नहीं।'
बेंच ने यह भी कहा कि पत्र के आखिरी दो पैराग्राफ उसे पसंद नहीं आए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जज के पत्र में लिखी सलाह के सटीक शब्दों का खुलासा नहीं किया।
मई में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था तीन महीने का समय
इससे पहले मई में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि आरोपी करीब 5 साल से जेल में है और मामले की सुनवाई में तेजी लाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मार्च में दिए उस आदेश का भी जिक्र किया था, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका खारिज की गई थी। हाई कोर्ट को उम्मीद थी कि अप्रैल के अंत तक मामले के बाकी सभी गवाहों से पूछताछ पूरी हो जाएगी।
12 गवाहों से पूछताछ भी नहीं हुई
सुप्रीम कोर्ट ने मई के आदेश में कहा था कि हाई कोर्ट को उम्मीद थी कि बाकी 12 गवाहों के बयान 1 मई तक दर्ज हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि उस समय तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को बाकी गवाहों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आखिरी मौका दिया था। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को साफ निर्देश दिया था कि वह हर हाल में 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करे।
लेखक के बारे मेंअशोक उपाध्यायअशोक उपाध्याय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का 12 साल का अनुभव। साल 2014 में नवभारत टाइम्स हिंदी अखबार से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। पॉलिटिक्स और क्राइम बीट पर रिपोर्टिंग का काफी अनुभव है। अमर उजाला देहरादून में भी सेंट्रल डेस्क पर काम किया है। साथ ही कई चुनावों में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले 6 साल से NBT डिजिटल में न्यूज डेस्क पर काम कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स को पकड़ने की अच्छी समझ है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ के साथ करंट अफेयर्स और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अच्छा खासा अनुभव है। करंट टॉपिक पर विश्लेषण और ओपिनियन लिखने में खास रुचि है।
पत्रकारिता अनुभव: प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 12 साल से कार्यरत हैं।
JIMMC नोएडा से साल 2013 में पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले साल 2010 में एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद (सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ) से राजनीतिक शास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। लोक प्रशासन विषय पर खास पकड़ है। पत्रकारिता से पहले यूपीएससी और उत्तराखंड और यूपी पीसीएस एग्जाम की तैयारी के दौरान समाजशास्त्र, संविधान समेत कई विषयों का अध्ययन किया। संवेदनशील मुद्दों पर लिखने की खास कला है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कई मार्मिक लेख लिखे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया है, कई बार सफलता भी मिली है। पत्रकारिता में आगे और बेहतर सीखने और समझने का क्रम जारी है।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने दोहरे हत्याकांड में महिला को बरी करने का फैसला बरकरार रखा, डीएनए साक्ष्य अधूरा

नए आपराधिक कानूनों से न्याय की गति तेज—FIR से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में

गांधी जयंती पर बच्चों को कानूनी ज्ञान से सशक्त बनाया

इंडियन यूथ कांग्रेस ने जंतर मंच पर CEC के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति को चुनौती दी

गुजरात उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम पर पुनः‑NEET पेपर विज्ञापन के आरोपी को जमानत दी, चार्जशीट दायर

मातृत्व से परे: बच्चे न होने को क्रूरता नहीं माना, मद्रास उच्च न्यायालय ने तलाक की माँग खारिज

ट्विशा शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट को ट्रांसफर की अपील, पिता ने निष्पक्ष न्याय की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल जज के बरी सलाह पर अस्वीकृति जताई
ताज़ा ख़बरें
- आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी से जनता को झंझट, दिल्ली हाईकोर्ट ने किया नोटिस
- पिथौरागढ़ के स्कूलों में महिला‑बाल सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर पुलिस जागरूकता कार्यक्रम
- संवैधानिक आपातकाल: राज्य की विफलता पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णायक कदम
- भारत के औषधि मूल्यों पर सुप्रीम कोर्ट की चौंकाने वाली चेतावनी
- जंतर‑मंतर 2.0 में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की माँग, महाभियोग प्रक्रिया की जटिलता
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल जज की ज़मानत सलाह को खारिज किया, समय‑विस्तार पर जताई नाराज़गी
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: दस्तावेज़ों की कमी से मवेशी के कत्लेआम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता
- युवा कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की

