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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी से जनता को झंझट, दिल्ली हाईकोर्ट ने किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन न करने के कारण जनसामान्य को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, इस बात को रेखांकित किया। न्यायालय ने आदित्य विक्रम बोहरा की याचिका पर FIR रद्द करने की मांग पर पुलिस को अगली सुनवाई से एक हफ्ता पहले स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और 3 फरवरी 2027 को पुनः सुनवाई तय की।

3 अक्टूबर 2026 को 07:04 am बजे
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी से जनता को झंझट, दिल्ली हाईकोर्ट ने किया नोटिस

सौजन्य से:- hindi.livelaw.in

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में अधिकारियों की नाकामी से जनता परेशान: दिल्ली हाईकोर्ट

Shahadat

3 Oct 2026 12:10 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारियों द्वारा आवारा कुत्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को सख्ती से लागू न करने के कारण जनता को परेशानी हो रही है।

जस्टिस गिरीश कथपालिया ने यह टिप्पणी आदित्य विक्रम बोहरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। बोहरा ने अपने खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 के तहत दर्ज FIR रद्द करने की मांग की।

यह प्रावधान किसी जानवर को मारकर, ज़हर देकर, अपंग बनाकर या बेकार करके नुकसान पहुंचाने के अपराध के लिए सज़ा का प्रावधान करता है।

बोहरा के वकील ने कहा कि आरोपी ने आवारा कुत्ते से खुद को बचाने के लिए सिर्फ़ एक खिलौना बंदूक का इस्तेमाल किया। चूंकि कुत्ते को न तो मारा गया, न अपंग किया गया और न ही ज़हर दिया गया, इसलिए BNS की धारा 325 के तहत कोई अपराध नहीं बनता है।

वकील की चिंता पर कोर्ट ने कहा:

“सही बात है कि संबंधित सरकारी अधिकारी आवारा कुत्तों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को सख्ती से लागू करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण जनता को परेशानी हो रही है।”

बोहरा के वकील ने आगे कहा कि कुछ लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, लेकिन उन्हें पालतू जानवर के तौर पर रखने की ज़िम्मेदारी नहीं लेते, जबकि कुत्ते उन्हें खाना खिलाने वालों के लिए पालतू जानवरों की तरह व्यवहार करते रहते हैं।

यह भी बताया गया कि पुलिस या नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के बावजूद संबंधित आवारा कुत्ता उसी इलाके में बना रहा।

जब कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया तो दिल्ली पुलिस (जिसका प्रतिनिधित्व APP संजीव सभरवाल कर रहे थे) ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अगली सुनवाई की तारीख से कम से कम एक हफ़्ते पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई 3 फरवरी, 2027 के लिए तय की।

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित हाईकोर्ट, निगरानी प्रक्रिया के दौरान, न्यायिक निर्देशों का पालन न करने, कार्रवाई न करने या जानबूझकर अनदेखी करने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने सहित उचित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से अधिकृत होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए "In Re Compliance With The Directions Issued By Supreme Court…" (सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का पालन) नाम से एक 'सुओ मोटो' (स्वतः संज्ञान लेते हुए) रिट याचिका दर्ज करें।

बाद में, दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों आदि के परिसर से कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए 'सुओ मोटो' कार्यवाही शुरू की।

Case Title : ADITYA VIKRAM BOHRA v. STATE GOVT. OF NCT OF DELHI AND ANR

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