जयपुर में 17 राज्यों के लॉ छात्रों ने AI‑प्राइवेसी मुद्दों पर मूट कोर्ट में दलीलें दीं, दीया कुमारी ने कहा संविधान किताबों तक सीमित नहीं
पाँच दशक से अधिक लॉ कॉलेजों के छात्र जयपुर में तीन‑दिन के मूट कोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्राइवेसी और कानून के प्रश्नों पर बहस करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विजय बिश्नोई और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने उपस्थित होकर युवाओं को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर संविधानिक मूल्यों को व्यवहार में लाने तथा नई तकनीकों की चुनौतियों को आत्मविश्वास से संभालने की प्रेरणा दी।

सौजन्य से:- ETV Bharat
जयपुर में कानूनी बहस करेंगे 17 राज्यों के लॉ कॉलेजों के छात्र, दीया कुमारी बोलीं- संविधान सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं
जस्टिस विजय बिश्नोई ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं में थोड़ी घबराहट के साथ सीखने की इच्छा और साहस भी नजर आता है.
Published : October 3, 2026 at 6:24 PM IST
|Updated : October 3, 2026 at 6:49 PM IST
जयपुर: 17 राज्यों के 50 से अधिक लॉ कॉलेजों के छात्र तीन दिन तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्राइवेसी जैसे अहम मुद्दों पर कानूनी बहस करेंगे. शनिवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के मानविकी सभागार में यूनिवर्सिटी फाइव ईयर लॉ कॉलेज की 14वीं UFYLC रांका राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ. इस बार प्रतियोगिता का विषय 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्राइवेसी और कानून' रखा गया है. इसमें छात्र AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच निजी जानकारी की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों से जुड़े कानूनी सवालों पर दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश कर रहे हैं. उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विजय बिश्नोई मुख्य अतिथि रहे, जबकि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं.
कानून का असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है: उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि कानून के पेशे में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि समझ और जिम्मेदारी भी जरूरी है. कानून के छात्रों को संविधान और उसके मूल्यों को समझना चाहिए. संविधान सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके सिद्धांतों को व्यवहार में भी उतारना जरूरी है. कानून से जुड़ा कोई भी फैसला आखिरकार आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करता है. ऐसे में कानूनी पढ़ाई को अच्छे मूल्यों और लोगों की सेवा से जोड़ना जरूरी है. वे अपनी बात के साथ-साथ दूसरे पक्ष की राय को भी सम्मान से सुनें. मूट कोर्ट को सिर्फ जीतने की कोशिश नहीं, बल्कि सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने का मौका मानें. इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने पंचायती राज चुनाव को लेकर कहा कि जिस तरह निकाय चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा और बड़े अंतर से जीत मिली, उसी तरह पंचायती राज चुनाव में भी अच्छे नतीजे आएंगे.
जस्टिस विजय बिश्नोई बोले- घबराहट छोड़ तैयारी पर भरोसा रखें: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विजय बिश्नोई ने मूट कोर्ट में छात्रों की दलीलों का जिक्र करते हुए कहा कि युवा अधिवक्ताओं में थोड़ी घबराहट के साथ सीखने की इच्छा और साहस भी नजर आता है. अदालत में अपनी बात रखने के लिए अच्छी तैयारी और बात को सही तरीके से रखना बहुत जरूरी है. असल जिंदगी में कानूनी मामले हमेशा सही और गलत के सीधे जवाब वाले नहीं होते. कई बार हालात काफी उलझे हुए होते हैं. ऐसे मामलों में कानून को समझकर नए तरीके से समाधान तलाशना पड़ता है. उन्होंने छात्रों से कहा कि वे घबराहट को पीछे छोड़कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखें.साथ ही उन्होंने कहा कि AI और नई तकनीक के आने से कानून के सामने नई तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं. ऐसे में कानून के छात्रों को तकनीक में हो रहे बदलावों को समझते हुए खुद को भी लगातार अपडेट रखना होगा.
तीन दिन चलेगी प्रतियोगिता, 5 अक्टूबर को फाइनल: प्रतियोगिता में दो शुरुआती दौर के बाद क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और ग्रैंड फिनाले होगा. पहला दौर 3 अक्टूबर को हुआ. दूसरा दौर और क्वार्टर फाइनल 4 अक्टूबर को होंगे. सेमीफाइनल और ग्रैंड फिनाले 5 अक्टूबर को आयोजित किए जाएंगे.प्रतियोगिता में छात्र मूट प्रपोजिशन में दिए गए मामले के दोनों पक्षों की ओर से दलीलें दे रहे हैं. इस दौरान उनकी कानूनी जानकारी, रिसर्च, लिखित तैयारी और कोर्ट में अपनी बात रखने के तरीके को देखा जा रहा है.प्रतियोगिता जीतने वाली टीम को 51 हजार रुपए और उपविजेता टीम को 25 हजार रुपए मिलेंगे. सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल के लिए 11 हजार रुपए और प्रमाण-पत्र दिया जाएगा. वहीं अपीलकर्ता और प्रतिवादी पक्ष के सर्वश्रेष्ठ छात्र अधिवक्ता को 5100-5100 रुपए और सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता को भी 5100 रुपए का पुरस्कार मिलेगा.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली कोर्ट ने लालू परिवार पर IRCTC होटल घोटाले के आरोपों की सुनवाई को 30 अक्टूबर तक टाला

सुप्रीम कोर्ट ने मां को यूके ले जाने का हक दिया, पिता के मुकदमेबाजी पर उलट फैसला

इंस्टाग्राम चैट से पत्नी के व्यभिचार का प्रमाण नहीं, अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा

सुप्रीम कोर्ट से मांग: NEET‑PG 2026 के वास्तविक प्रश्न एवं विकल्प दिखाएँ

पूर्व जजों की पाँच सदस्यीय समिति करेगी मतदाता सूची SIR अभियान की संवैधानिक वैधता की पड़ताल

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका: NEET‑PG 2026 के वास्तविक प्रश्न, विकल्प एवं सही उत्तर का खुलासा चाहा गया

चाईबासा के मंडल कारा में आयोजित जेल अदालत ने दी कानूनी‑साथ स्वास्थ्य जागरूकता

वकील संघ ने SIR पुनरावलोकन की संवैधानिक वैधता जांच के लिए पूर्व न्यायाधीशों का आयोग बनाया
ताज़ा ख़बरें
- नॉर्थ कैरोलिना में 20‑साल के भूमि प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा तय करने को भेजा
- स्विगी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना, बुफे कीमतें गलत बताने का दोषी पाया गया
- झारखंड हाईकोर्ट ने हिंडाल्को फैक्ट्री विवाद में आंदोलन समाप्ति पर निर्देश दिया
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बकाया ई‑चालान पर कड़ी कार्रवाई, RC‑रिन्यूअल व PUC सहित कई सेवाएँ रोक सकती हैं
- सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के एकल फैसलों को चुनौती, चुनाव आयोग की सामूहिकता पर सवाल
- सुप्रीम कोर्ट का नया संकेत: न्यायिक भर्ती में व्यापक सुधार की दिशा में विचार
- गांधी जयंती पर राजमहल उपकारा में जेल लोक अदालत: बंदियों को मिली मुफ्त कानूनी सुविधा
- दिल्ली हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के नॉन‑कम्प्लायंस को लेकर सरकार व एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी

