सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पहले की भूमि बिक्री को रिफंड आदेश से उलटने को अस्वीकृत किया
कोर्ट ने कहा कि 1979 में पूर्ण हुई बिक्री को केवल अतिरिक्त धनराशि के भुगतान से बदला नहीं जा सकता, चाहे समय कितना भी बीत गया हो। अपीलकर्ता ने 1975 के समझौते के तहत अग्रिम राशि चुकाकर तब से जमीन का कब्ज़ा रखा था, इसलिए न्याय उसके पक्ष में होना चाहिए। हाईकोर्ट के रिफंड आदेश को गलत ठहराते हुए मूल ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पुनःस्थापित किया गया।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
दशकों पहले 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' के आदेश के तहत हुई बिक्री को रिफंड का आदेश देकर रद्द करना गलत: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
20 Sept 2026 6:53 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब बिक्री के समझौते के तहत 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश बिक्री विलेख (सेल डीड) के निष्पादन और कब्ज़ा सौंपने के साथ पूरा हो जाता है तो उस पूरे हो चुके लेन-देन को केवल "इक्विटी (न्याय/संतुलन) बनाए रखने" के लिए ज़्यादा पैसे के रिफंड से नहीं बदला जा सकता।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने आगरा के पास लगभग पांच बीघा कृषि भूमि से संबंधित 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' के लिए 1979 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए यह टिप्पणी की।
यह विवाद 16 जून, 1975 के बिक्री के एक रजिस्टर्ड समझौते से पैदा हुआ, जिसके तहत लगभग पांच बीघा कृषि भूमि को दो साल के भीतर ₹20,000 में बेचने पर सहमति बनी थी, और अपीलकर्ता-वादी ने ₹5,000 एडवांस के तौर पर दिए।
ट्रायल कोर्ट ने 28 फरवरी, 1979 को 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश दिया। उस आदेश के तहत 7 जून, 1979 को कोर्ट के माध्यम से बिक्री पूरी की गई। यह भी बताया गया कि वादी 1979 से ही संपत्ति के कब्ज़े में था।
पहली अपीलीय अदालत ने इस आधार पर आदेश को पलट दिया कि वादी की तत्परता और इच्छा दिखाने वाला कोई ठोस सबूत नहीं था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि समझौते और प्रतिवादी के बचाव के संबंध में ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष सही थे। लेकिन, बिक्री को बहाल करने के बजाय हाईकोर्ट ने "इक्विटी बनाए रखने" की कोशिश करते हुए प्रतिवादी-डिफेंडेंट को अपीलकर्ता-वादी को ब्याज सहित ₹15 लाख (₹5,000 एडवांस के बजाय) देने का निर्देश दिया, क्योंकि इतने साल बीत चुके थे।
पहली अपीलीय अदालत और हाईकोर्ट के एक जैसे निष्कर्षों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के नज़रिए को गलत पाया, जिसने केवल समय बीत जाने के कारण पूरी हो चुकी बिक्री को पैसे के भुगतान से बदल दिया।
इसके बजाय, कोर्ट ने कहा कि चूंकि बिक्री पहले ही 1979 में पूरी हो चुकी थी और अपीलकर्ता-वादी चार दशकों से अधिक समय से ज़मीन का मालिक था और उसके कब्ज़े में था, इसलिए न्याय वादी के पक्ष में होना चाहिए, क्योंकि उसने चार दशक से अधिक समय पहले पैसे का भुगतान किया और मालिकाना हक व कब्ज़ा हासिल कर लिया।
कोर्ट ने कहा,
“इसलिए न्याय का सिद्धांत उस वादी के पक्ष में लागू होना चाहिए, जिसने साढ़े चार दशक से भी पहले ₹20,000/- दिए थे और प्रॉपर्टी का मालिकाना हक और कब्ज़ा हासिल किया था।”
कोर्ट ने कहा,
“इसलिए हमारी राय है कि पहली अपीलीय अदालत और हाईकोर्ट के फैसलों को पलट दिया जाना चाहिए और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल किया जाना चाहिए। हम अपील को मंज़ूरी देते हुए और ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए ऐसा कर रहे हैं। इस समय वादी के कब्ज़े में कोई दखल नहीं दिया जा सकता। प्रतिवादी ने हाई कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद ₹15,00,000/- की रकम जमा की थी, जो एक महीने के भीतर उस पर मिले ब्याज के साथ प्रतिवादी को ही वापस कर दी जाएगी।”
इसके आधार पर अपील मंज़ूर कर ली गई।
Cause Title: Sobaran Singh (Dead) Through Lrs. Versus Gordhan Singh (Dead) Thr. Lrs.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
कर्नाटका हाई कोर्ट ने जेनपैक्ट के गुरुग्राम हेडऑफ़िस की जब्ती को बरकरार रखा, जबकि $100 मिलियन निवेश प्रतिबंध रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट: मुख्य नियोक्ता पर अनुबंधित मजदूरों को भत्ता देने की ज़िम्मेदारी नहीं

हाईकोर्ट ने चेक हस्ताक्षर मामले में कहा, खाली चेक का आरोप बचाव नहीं बनता

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट‑जमा राशि के प्रबंधन के लिए विशिष्ट कानून की सिफारिश की, लॉ कमीशन को जांच के निर्देश

मद्रास हाई कोर्ट: शारीरिक विशेषताएँ और भाषा से नहीं सिद्ध हो सकता ईसाई धर्म

सुप्रीम कोर्ट में दानम नागेंद्र ने हाई कोर्ट के अयोग्यता आदेश को रोकने की याचिका दायर की

ममता ने ईसीआई के टीएमसी नाम‑चिह्न फ्रीज आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

पटना हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर की कड़ी फटकार
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में जमा राशि और ब्याज के मानकीकरण हेतु कानून आयोग को जिम्मेदारी सौंपी
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने इक्क्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया से पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए
- सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय जमा प्रबंधन के लिए नया कानून मांग किया
- सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय जमा पर मानक कानून की मांग की, कानून आयोग से समीक्षा का आह्वान
- ट्रंप की टैरिफ रणनीति में नया मोड़: 150‑दिन का 15% प्लान B, अदालत की रोक के बीच
- ममता बेगम ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी प्रतीक पर इलेक्शन कमिशन के जमे हुए आदेश के विरुद्ध अपील दायर की
- सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने टीएमसी के चुनाव चिन्ह फ्रीज को चुनौती दी
- सुप्रीम कोर्ट ने लिंगभेद को मान्यता देते 63 साल की सुमित्रा को 12 लाख का मुआवजा दिया

