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सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान बंद मेट्रो स्टेशनों पर केंद्र, पुलिस और DMRC को जवाबी नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान अचानक 17 मेट्रो स्टेशन बंद करने को अनुचित मानते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC को नोटिस भेजा है। याचिका में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन और वैधानिक आदेश की कमी का आरोप है, और अदालत अब सार्वजनिक सुरक्षा के नाम पर ऐसी आवश्यक सेवाओं को कब और कैसे बंद किया जा सकता है, इस पर निर्णय लेगी।

10 सितंबर 2026 को 02:05 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान बंद मेट्रो स्टेशनों पर केंद्र, पुलिस और DMRC को जवाबी नोटिस जारी

सौजन्य से:- Jagran

दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान 17 मेट्रो स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और पुलिस से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान अचानक मेट्रो स्टेशन बंद करने पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC को नोटिस जारी किया है।

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद करने पर कड़ा रुख अपनाया।

- केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

- याचिका में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन और मनमानी का आरोप है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा के नाम पर अचानक मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

समझिए क्या है पूरा मामला?

बता दें कि बीते जुलाई महीने में राष्ट्रीय राजधानी में हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा पाबंदियों के चलते मध्य दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया था और जंतर-मंतर के आसपास कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।

इसके कारण मध्य दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे हजारों यात्री घंटों फंसे रहे और कई लोगों को लंबे तथा महंगे रास्तों का सफर तय करना पड़ा था। इस मनमाने तरीके से सार्वजनिक परिवहन को ठप करने के खिलाफ अधिवक्ता स्पर्श कांत नायक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट में क्या हुआ?

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। दायर याचिका में वकील ने कोर्ट को बताया कि यह मामला आम जनता के मौलिक अधिकारों और किसी सार्वजनिक यूटिलिटी को बंद करने के संवैधानिक मानकों से जुड़ा है।

वकील ने यह भी दलील दी कि इन स्टेशनों को बंद करने के लिए कोई लिखित या वैधानिक आदेश जारी नहीं किया गया था, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स'पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी गई थी। यहां तक कि 'मेट्रो रेलवे एक्ट' में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत अचानक मेट्रो स्टेशन बंद किए जा सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पश्रों को जारी किया नोटिस

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि आमतौर पर यातायात या आवाजाही को नियंत्रित करने के आदेश संबंधित पुलिस कानूनों के तहत पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किए जाते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है। इस कानूनी कदम से अब यह तय होगा कि सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर मेट्रो जैसी आवश्यक सेवाओं को किस हद तक और किन नियमों के तहत बंद किया जा सकता है।

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