सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाई कोर्ट में ही रखा, रिपोर्ट की माँग और सुरक्षा जाँच के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि सत्य निकेतन भवन धँसने के मामले को हाई कोर्ट से अपने पास नहीं लेगा और हाई कोर्ट को निगरानी जारी रखने को कहा। अदालत ने 15 सितंबर तक सभी संबंधित प्राधिकरणों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी तथा पीजी आवास, निजी हॉस्टल आदि की सुरक्षा ऑडिट को तेज करने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
हाई कोर्ट से केस ट्रांसफर नहीं करेंगे, सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली में सत्य निकेतन हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी है.
By Sumit Saxena
Published : September 10, 2026 at 6:23 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को काम की जगहों पर भीड़भाड़ पर चिंता जताई है. अदालत ने कहा कि सैकड़ों लोगों को बिना आने-जाने के सही रास्तों के एक ही कमरे में 'सार्डिन (छोटी समुद्री मछली) की तरह ठूंस-ठूंसकर' रखा जा रहा है. यह टिप्पणी दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के मामले की सुनवाई के दौरान आई जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह मामले को हाई कोर्ट से अपने पास ट्रांसफर नहीं करेगा. बता दें कि, सत्य निकेततन बिल्डिंग गिरने के मामले की सुनवाई इस समय हाई कोर्ट में चल रही है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर महादेवन की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई प्रगति पर है. इसी वजह से वह केस को सुप्रीम कोर्ट को ट्रांसफर नहीं किया जाएगा. सीनियर वकील अजीत कुमार सिन्हा इस मामले में एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) हैं.
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में लड़कों के पेइंग गेस्ट (PG) रहने की पांच मंजिला बिल्डिंग रविवार दोपहर करीब 1.30 बजे गिर गई. इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई और 12 घायल हो गए.
सुनवाई के दौरान बेंच ने साफ किया कि वह मौजूदा हालात को बिगाड़ना नहीं चाहती और हाई कोर्ट अपने निर्देशों के पालन पर नजर रखना जारी रखेगा. बेंच ने कहा, "ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए हम एमिकस क्यूरी के सुझावों को मानते हैं और दिल्ली हाई कोर्ट के सामने मामले की स्थिति में कोई बदलाव नहीं करते हैं. हाई कोर्ट से अनुरोध है कि वह कम समय में मामले की निगरानी करे."
एमिकस ने कहा कि सूत्रों ने उन्हें बताया कि एमसीडी दिल्ली हाई कोर्ट के दिए गए निर्देशों पर कार्रवाई कर रही है. सिन्हा ने कहा कि सिन्हा ने कहा कि पीएजी एक चीज है और भी मुद्दे हैं. जिम और कोचिंग सेंटर. सिन्हा ने कहा कि निरीक्षण के दौरान उनके जूनियर साथी एक आईआईटी प्रोफेसर के साथ मौजूद थे. सैदुलाजब में कुछ इमारतों में 500 लोग काम कर रहे थे. नौकरी से जुड़ी प्रकृति के बारे में बेंच के सवाल का जवाब देते हुए एमिकस ने कहा कि इनमें हायरिंग सेंटर, बीपीओ, इंटरव्यू और कोचिंग सेंटर शामिल हैं.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एमसीडी ने इस मामले में कई कदम उठाए हैं और वह भी रिपोर्ट दाखिल कर सकते हैं. इस पर बेंच ने कहा कि ऐसा लगता है कि चीजें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सभी अथॉरिटीज से 15 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी है.
बेंच एमिकस की एक अर्जी पर सुनवाई कर रही थी. इस अर्जी में रविवार को सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के बाद दिल्ली भर में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पास सभी पीजी आवास, प्राइवेट हॉस्टल और इसी तरह के स्टूडेंट हाउसिंग का निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट करने के लिए अपनी कमेटी को अनुमति देने की मांग की गई थी.
एमिकस की रिपोर्ट में कहा गया कि इन हालात में यह सही होगा कि निरीक्षण की प्रक्रिया को इस कोर्ट द्वारा अभी पहचाने गए क्षेत्रों से आगे बढ़ाया जाए और संबंधित अधिकारी दिल्ली भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के अंदर और आसपास मौजूद पीजी आवास , प्राइवेट हॉस्टल और इसी तरह के छात्रावास की जगहों का समयबद्ध निरीक्षण और सेफ्टी ऑडिट करें. एमिकस की रिपोर्ट में वकील गोविंद जी ने उनकी मदद की.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की प्रक्रिया में इन चीज़ों का सत्यापन शामिल होना चाहिए:
(i) मंजूर बिल्डिंग प्लान
(ii) असल कंस्ट्रक्शन और फ्लोर की संख्या
(iii) बेसमेंट कंस्ट्रक्शन और बदलाव
(iv) मंजूर लैंड यूज
(v) बिल्डिंग की सुरक्षा
(vi) अग्नि-सुरक्षा अनुपालन
(vii) अंदर आने और बाहर निकलने के तरीके
(viii) किसी भी खतरनाक या खराब हालत का होना
25 मार्च को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर महादेवन की एक बेंच ने आवासीय संपत्ति के गलत इस्तेमाल और गैर-कानूनी भूमि-उपयोग रूपांतरण की पूरे देश में जांच का निर्देश दिया. बेंच ने यह निर्देश तमिलनाडु से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए दिया. बेंच ने बिल्डिंग के नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन और बिना इजाजत निर्माण को रोकने में नगर निगम के अधिकारियों की साफ नाकामी को लेकर गंभीर चिंता जताई.
ये भी पढ़ें: CJP प्रदर्शन में बच्चे पर हमले के मामले में SC सख्त, कहा- ‘तुरंत कार्रवाई करें, कोई उसे डरा नहीं सकता’
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