सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज, 1993 मुंबई ब्लास्ट सजा पर पुनः पुष्टि
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाया कि अंडरट्रायल के दौरान बिताया समय व रिमिशन को सजा की अवधि में नहीं गिना जाएगा, जिससे 25 साल की कैद का हिसाब बदलता नहीं है। सलेम की इसी माँग को पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था, जो कहता है कि उसकी कैद नवंबर 2030 में पूरी होगी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले में फैसला सुनाया। सलेम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने दलील दी थी कि अंडरट्रायल के रूप में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि अच्छे आचरण के आधार पर अर्जित रिमिशन को भी वास्तविक कारावास की अवधि की गणना में शामिल किया जाना चाहिए।
25 साल की कैद को लेकर विवाद
- सलेम को 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। भारत ने 17 दिसंबर 2002 को पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि सलेम को न तो मौत की सजा दी जाएगी और न ही प्रत्यर्पण के बाद 25 साल से अधिक समय तक जेल में रखा जाएगा।
- सलेम ने इसी आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2022 के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि उसकी 25 साल की कैद लगभग पूरी हो चुकी है। उसका कहना था कि इस अवधि की गणना करते समय जेल में अच्छे आचरण के लिए अर्जित रिमिशन तथा अंडरट्रायल के रूप में बिताया समय भी जोड़ा जाना चाहिए।
- सलेम के अनुसार, उसने नवंबर 2005 से सितंबर 2017 के बीच करीब 11 साल 9 महीने 26 दिन अंडरट्रायल के रूप में हिरासत में बिताए। इसके बाद दोषी ठहराए जाने के बाद वह करीब 9 साल 10 महीने 4 दिन जेल में रहा।
- उसने दावा किया कि अच्छे आचरण के लिए उसे करीब तीन साल और 16 दिन की रिमिशन मिली है। इसके अलावा पुर्तगाल में अंडरट्रायल के रूप में बिताई अवधि के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक महीने की अतिरिक्त राहत भी दी गई थी। इन सभी अवधियों को जोड़ने पर उसकी कुल कैद करीब 25 साल हो जाती है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी खारिज की थी मांग
अप्रैल 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सलेम की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी और सलेम की ओर से अर्जित रिमिशन को इसमें शामिल करने की मांग समय से पहले और गलत थी।सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उसकी निरंतर हिरासत संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। उसने अधिकारियों को उसकी सटीक रिहाई की तारीख निर्धारित करने का निर्देश देने की मांग भी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब उसकी इस मांग को खारिज कर दिया है।
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