महाराष्ट्र में गुड़ उद्योग को मिलेगा स्वतंत्र कानूनी ढांचा, शीतकालीन सत्र में नया कानून लाने की दिशा में गति
चीनी आयुक्तालय द्वारा तैयार मसौदा संशोधित कर सरकार को फिर सौंपा जाएगा और एक महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश है। इसके बाद आगामी शीतकालीन सत्र में गुड़ उद्योग के लिए अलग कानून पेश करने की योजना है, क्योंकि पारंपरिक इकाइयों से बड़े औद्योगिक प्रकल्पों तक विस्तार ने विशेष नियमों की मांग को बढ़ा दिया है।

सौजन्य से:- ChiniMandi
पुणे : गुड़ और खांडसारी उद्योग को स्वतंत्र कानूनी दायरे में लाने की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। चीनी आयुक्तालय द्वारा तैयार किए गए कानून के मसौदे में सरकार की ओर से सुझाए गए संशोधनों के आधार पर संशोधित मसौदा दोबारा सरकार को सौंपा जाएगा। मसौदा प्राप्त होने के एक महीने के भीतर इस पर निर्णय लेने के निर्देश मंत्री समिति ने दिए हैं। इसके बाद आगामी शीतकालीन सत्र में गुड़ उद्योग के लिए स्वतंत्र कानून लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
गुड़ उद्योग को मिलेगा स्वतंत्र कानूनी ढांचा
दैनिक ‘सकाळ’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक गुड़ इकाइयों से लेकर बड़े औद्योगिक प्रकल्पों तक विस्तार कर चुके गुड़ उद्योग को पहली बार स्वतंत्र कानूनी ढांचा मिलने की संभावना है। इससे पिछले कई वर्षों से लंबित गुड़ उद्योग के नियमन का मुद्दा अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। चीनी आयुक्तालय ने इससे पहले स्वतंत्र कानून का मसौदा तैयार कर सरकार को सौंपा था। सरकार ने इसमें कुछ बदलाव और संशोधन सुझाकर मसौदा वापस आयुक्तालय को भेजा था। इसके अनुसार अब संशोधित मसौदा तैयार किया जा रहा है। इसे सरकार को सौंपे जाने के बाद एक महीने के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
गुड़ उत्पादन कारोबार अब औद्योगिक स्वरूप में
पिछले कुछ वर्षों में गुड़ उत्पादन का कारोबार बड़े पैमाने पर विस्तारित हुआ है। पहले किसान अपने खेत या आसपास के किसानों से गन्ना लेकर पारंपरिक गुड़ इकाइयों में गुड़ तैयार करते थे। हालांकि, अब इस व्यवसाय ने बड़े पैमाने पर व्यावसायिक और औद्योगिक स्वरूप अपना लिया है। राज्य में प्रतिदिन सैकड़ों टन गन्ने की पेराई करने वाले गुड़ उत्पादन प्रकल्प शुरू हो गए हैं। पुणे जिले के दौंड तालुका के साथ-साथ कोल्हापुर जिले में भी बड़े पैमाने पर गुड़ का उत्पादन किया जाता है। इसके चलते इस उद्योग के लिए स्वतंत्र नियम और नियंत्रण व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
चार-पांच वर्षों से चल रही थी कानून की चर्चा
गुड़ उद्योग को स्वतंत्र कानून के दायरे में लाने की मांग पिछले चार-पांच वर्षों से की जा रही है। पारंपरिक गुड़ इकाइयों की तुलना में बड़े पैमाने पर निवेश कर गुड़ उत्पादन करने वाले प्रकल्पों की संख्या बढ़ने के कारण इस क्षेत्र के नियमन के लिए स्वतंत्र कानून की आवश्यकता सामने आई थी। अब संशोधित मसौदे पर एक महीने के भीतर निर्णय लेने और उसके बाद शीतकालीन सत्र में कानून लाने की योजना बनाई गई है। इससे इस पूरी प्रक्रिया को निश्चित दिशा मिलने की उम्मीद है।
कोल्हापुर में गुड़ उद्योग का 200 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार
‘गुड़ की पंढरी’ के रूप में पहचाने जाने वाले कोल्हापुर जिले में गुड़ उद्योग का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। जिले में करीब 200 से अधिक गुड़ इकाइयां है। करवीर, कागल और शाहूवाड़ी तहसीलों में गुड़ इकाइयों की संख्या अधिक है।जिले में हर साल गुड़ का करीब 200 से 300 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। वर्तमान में जिले में 20 से 30 गुड़ इकाइयां शुरू है।
संशोधित रिपोर्ट पर काम जारी
चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने दैनिक ‘सकाळ’ से बातचीत में कहा की, गुड़ उद्योग से संबंधित मसौदा रिपोर्ट पर फिलहाल काम चल रहा है। एक और रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है और उस पर काम जारी है।रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
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