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सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल प्रतिशत दिखाने वाली याचिका को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल के प्रतिशत को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने वाली याचिका को अस्वीकार किया और याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकरण के पास जाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और पी. बी. वराले की पीठ ने सवाल किया कि याचिकाकर्ता ने क्यों सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका का उद्देश्य E20 नीति को चुनौती नहीं बल्कि पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल की स्पष्ट जानकारी सुनिश्चित करना था।

31 अगस्त 2026 को 08:33 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल प्रतिशत दिखाने वाली याचिका को खारिज किया

सौजन्य से:- ChiniMandi

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में मिलाए गए एथेनॉल की मात्रा को डिस्पेंसिंग नोजल पर अनिवार्य और समान रूप से प्रदर्शित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत लेकर संबंधित सक्षम प्राधिकरण के पास जाने की स्वतंत्रता दी है।न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने अपने आदेश में कहा, याचिका खारिज की जाती है। याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकरण के समक्ष जा सकता है। यह याचिका अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की थी। इसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि देश के प्रत्येक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरने वाले हर नोजल पर पेट्रोल में मिलाए गए इथेनॉल का सटीक प्रतिशत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की स्थिति पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र (लोकस) पर सवाल उठाया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि, उन्होंने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया, जबकि पहले हाई कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती थी। गोस्वामी ने दलील दी कि उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जा रहे ईंधन में मौजूद एथेनॉल की मात्रा जानने का अधिकार है। उन्होंने कहा, अगर मैं पेट्रोल खरीदता हूं तो उस पर E20 का उल्लेख नहीं होता। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने E20 नीति को चुनौती देने वाली पूर्व याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया। गोस्वामी ने स्पष्ट किया कि, उनकी याचिका एथेनॉल मिश्रण नीति को चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल की मात्रा की अनिवार्य जानकारी देने की मांग को लेकर है।इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

क्या है E20 पेट्रोल?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार की रणनीति में E20 को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, उत्सर्जन घटाने और देश में उत्पादित जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर वाहनों की अनुकूलता, ईंधन दक्षता और पुराने वाहनों के प्रदर्शन पर सवाल भी उठते रहे हैं। वाहन निर्माता कंपनियां लगातार E20-अनुकूल मॉडल पेश कर रही हैं, लेकिन अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की ओर बदलाव से पहले निर्मित पुराने वाहनों को लेकर अभी भी कई चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दायर यह याचिका E20 पेट्रोल की बिक्री रोकने के लिए नहीं, बल्कि पेट्रोल खरीदने से पहले उपभोक्ताओं को उसमें मौजूद एथेनॉल की मात्रा की स्पष्ट जानकारी देने की मांग पर केंद्रित थी।

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