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बच्चे के भविष्य को बचाने के लिए जजों ने वैवाहिक झगड़े में बिताए कई घंटे

चंडीगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जजों ने एक वैवाहिक विवाद को सुलझाने में कई घंटे लगाए, बच्चे की भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। लंबी बातचीत के बाद दंपति ने अतिरिक्त समय माँगा, जबकि न्यायाधीशों ने खुली बातचीत की महत्ता पर जोर दिया। इस लोक अदालत ने 30,145 से अधिक मामलों का निपटारा किया, जिसमें कुल ₹18.48 crore की राशि पर समझौता हुआ।

13 सितंबर 2026 को 07:04 am बजे
बच्चे के भविष्य को बचाने के लिए जजों ने वैवाहिक झगड़े में बिताए कई घंटे

सौजन्य से:- Jagran

बच्चे के भविष्य के लिए टूटता रिश्ता बचाने को घंटों चला जजों का प्रयास, चंडीगढ़ में लोक अदालत का माहौल हुआ भावुक

चंडीगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान एक वैवाहिक विवाद में जजों ने बच्चे के भविष्य के लिए घंटों तक ...और पढ़ें

HighLights

- दंपती ने मामले को सुलझाने के लिए अदालत से मांगा समय

- लोक अदालत में 30,145 से अधिक मामले निपटाए गए।

- वैवाहिक विवादों सहित विभिन्न मामलों में करोड़ों का समझौता।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक वैवाहिक विवाद के समाधान के लिए लंबी सुनवाई चली। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत मोहन शर्मा के साथ खुद कार्यवाहक जिला एवं सत्र न्यायाधीश जज हरिंदर सिद्धू व अन्य जजों ने दंपती को घंटों तक समझाया।

जजों ने दोनों पक्षों के बीच स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया। उन्होंने दंपती को समझाते हुए कहा कि वैवाहिक विवाद में सबसे अधिक पीड़ा नाबालिग बच्चे को झेलनी पड़ती है। ऐसे में बच्चे का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बच्चे के भविष्य को देखते हुए टूटते रिश्ते को जोड़ने की कोशिश की।

अदालत में दोनों पक्षों के साथ लंबे समय तक बातचीत की गई। लंबी बातचीत के बाद दंपती ने आपसी सहमति से समाधान के लिए कुछ और समय मांगा। इस पहल के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने लोगों से कहा कि उन्हें अपनी असल समस्याएं जजों के सामने खुलकर रखनी चाहिए, तभी उनका उचित समाधान निकाला जा सकता है।

शनिवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं चंडीगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में लोक अदालत का आयोजन हुआ।

इसके लिए 14 बेंच गठित की गई थीं। बड़ी संख्या में लोग अपने लंबित मामलों का निपटारा करवाने के लिए लोक अदालत में पहुंचे। लोक अदालत में आपराधिक समझौता योग्य मामलों, चेक बाउंस, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, मध्यस्थता, दीवानी मामलों और ट्रैफिक चालान सहित विभिन्न मामलों की सुनवाई हुई।

कुल 30,145 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया और 18,48,13,828 रुपये की राशि पर समझौता हुआ। अधिकारियों ने लोक अदालत को त्वरित एवं किफायती न्याय का प्रभावी माध्यम बताते हुए लोगों से विवादों का समाधान इसके जरिये करने की अपील की।

18 करोड़ के 30 हजार मामलों का हुआ निपटारा

राष्ट्रीय लोक अदालत में सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत की विभिन्न बेंचों ने 30,145 से अधिक मामलों का निपटारा किया। इनमें प्री-लिटिगेशन मामले, लंबित मुकदमे और ट्रैफिक चालान शामिल रहे। इन मामलों में कुल 18.48 लाख रुपये की राशि पर समझौता हुआ।

नियमित बेंचों और स्थायी लोक अदालत (पीयूएस) ने 20,230 प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटारा किया, जिनमें 16.38 लाख रुपये की राशि शामिल रही। राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ ने 62 और डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ ने 10 मामलों का निपटारा किया, जिनमें 7.79 करोड़ रुपये की राशि शामिल रही।

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