चरखी दादरी में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 16,971 मामलों का समाधान, 8.93 करोड़ रुपये की सेटलमेंट तय
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया, जिसमें 22,278 में से 16,971 मामलों को आपसी सहमति से निपटाया गया। इन निपटारे की कुल राशि 8 करोड़ 93 लाख 73 हजार 573 रुपये निर्धारित हुई। पाँच बेंचों ने सिविल, फौजदारी, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना और वैवाहिक विवाद जैसे विविध मामलों की सुनवाई की, जबकि अतिरिक्त न्यायाधीशों ने पर्यवेक्षण किया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Charkhi Dadri News: राष्ट्रीय लोक अदालत में 16,971 मामलों का निपटारा, 8.93 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि तय
Sat, 12 Sep 2026 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:27 PM IST
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चरखी दादरी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दादरी ने शनिवार को न्यायिक न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। इस दौरान 22,278 मामलों में से 16,971 का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 8 करोड़ 93 लाख 73 हजार 573 रुपये की सेटलमेंट राशि तय हुई।
लोक अदालत का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दादरी, देश राज चालिया के मार्गदर्शन में हुआ। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहम्मद जकरिया खान ने इसका पर्यवेक्षण किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के सुचारु संचालन के लिए पांच बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों के समक्ष विभिन्न प्रकार के लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों की सुनवाई की गई। लोक अदालत में सिविल, क्रिमिनल कंपाउंडेबल, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के मामले शामिल थे।
वैवाहिक विवाद, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के मामले भी निपटाए गए। प्री-लिटिगेशन सहित अन्य समझौता योग्य मामलों को भी इसमें शामिल किया गया। बेंचों ने पक्षकारों की आपसी सहमति से मामलों का निपटारा कराने पर विशेष जोर दिया।
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पक्षकारों को मिली राहत
लोक अदालत के माध्यम से विवादों का समाधान होने से पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली। इससे उनके समय और धन की भी बचत हुई। सुनवाई के दौरान पक्षकारों को आपसी समझौते के लाभों के बारे में बताया गया। उन्हें लोक अदालत के माध्यम से विवादों के त्वरित समाधान की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।
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सुविधा के लिए हेल्प डेस्क
आमजन की सुविधा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्यायालय परिसर में हेल्प डेस्क स्थापित किया। यहां तैनात पैनल रिटेनर ने पक्षकारों को आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने लोक अदालत में रखे गए मामलों, आवश्यक दस्तावेज और निस्तारण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की कि वे अपने समझौता योग्य मामलों का निपटारा राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से करवाएं। इस सरल, त्वरित एवं सुलभ न्यायिक व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
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लोक अदालत का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दादरी, देश राज चालिया के मार्गदर्शन में हुआ। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहम्मद जकरिया खान ने इसका पर्यवेक्षण किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के सुचारु संचालन के लिए पांच बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों के समक्ष विभिन्न प्रकार के लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों की सुनवाई की गई। लोक अदालत में सिविल, क्रिमिनल कंपाउंडेबल, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के मामले शामिल थे।
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वैवाहिक विवाद, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के मामले भी निपटाए गए। प्री-लिटिगेशन सहित अन्य समझौता योग्य मामलों को भी इसमें शामिल किया गया। बेंचों ने पक्षकारों की आपसी सहमति से मामलों का निपटारा कराने पर विशेष जोर दिया।
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पक्षकारों को मिली राहत
लोक अदालत के माध्यम से विवादों का समाधान होने से पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली। इससे उनके समय और धन की भी बचत हुई। सुनवाई के दौरान पक्षकारों को आपसी समझौते के लाभों के बारे में बताया गया। उन्हें लोक अदालत के माध्यम से विवादों के त्वरित समाधान की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।
सुविधा के लिए हेल्प डेस्क
आमजन की सुविधा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्यायालय परिसर में हेल्प डेस्क स्थापित किया। यहां तैनात पैनल रिटेनर ने पक्षकारों को आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने लोक अदालत में रखे गए मामलों, आवश्यक दस्तावेज और निस्तारण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की कि वे अपने समझौता योग्य मामलों का निपटारा राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से करवाएं। इस सरल, त्वरित एवं सुलभ न्यायिक व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
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