होममुकदमेबेतिया में मुफ्त वाद निपटान, लोक अदालत ने समाज में भाईचारा बढ़ाया
मुकदमे

बेतिया में मुफ्त वाद निपटान, लोक अदालत ने समाज में भाईचारा बढ़ाया

बेतिया में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क और त्वरित न्याय प्रदान किया। न्यायाधीशों ने विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए इसे एक आसान मंच बताया, जिससे सामाजिक सौहार्द में वृद्धि हुई। वादों के निपटारे के बाद अपील की कोई सुविधा नहीं है, जिससे प्रक्रिया और भी प्रभावी बनी।

12 सितंबर 2026 को 07:04 pm बजे
बेतिया में मुफ्त वाद निपटान, लोक अदालत ने समाज में भाईचारा बढ़ाया

सौजन्य से:- Hindustan

लोक अदालत वादों के निष्पादन के लिए सुलभ मंच

बेतिया में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने समाज के कमजोर तबकों को मुफ्त और त्वरित न्याय प्रदान किया। न्यायाधीशों ने इसे विवादों के त्वरित निपटारे और भाईचारे की स्थापना का आसान मंच बताया। यहां वादों का निपटारा बिना किसी शुल्क के किया गया, जिससे सामाजिक सौहार्द बढ़ा।

बेतिया, विधि संवाददाता। आज जब अदालतों में लंबित वादों की संख्या हजारों में है ऐसे में समाज के कमजोर तबकों को मुफ्त और जल्द न्याय दिलाने के लिए लोक अदालत का आयोजन उपयोगी सिद्ध हो रही है। समाज की बदलती परिस्थितियों का परिणाम है कि पहले आप न्याय पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाते थे। आज खुद न्यायपालिका आपके साथ बैठ आपके वादों का निपटारा करने को तत्पर है। उक्त बातें प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश असिताब कुमार ने शनिवार को न्यायालय परिसर में आयोजित नेशनल लोक अदालत के उद्घाटन के अवसर पर कही।

राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों के बीच वैमनस्य समाप्त कर भाईचारा स्थापित कराना है। अंहकार पतन का कारण बनता है। इसलिए अहंकार पालना ठीक नहीं है। अनावश्यक विवाद में फंसे रहना समझदारी नहीं। बेहतर यही है कि आपस में मिल बैठकर विवादों को समाप्त कर लें। राष्ट्रीय लोक अदालत इसके लिए सबसे आसान और सुलभ मंच है।

न्याय का महत्व

उन्होंने कहा कि समाजिक रिश्ता कायम करने का यह एक उचित माध्यम है। यहां स्वाभिमान और सम्मान के साथ निर्णय होता है। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मिलन कुमार ने कहा कि कि छोटे-छोटे विवादों को प्रतिष्ठा मान लेना समझदारी नहीं है। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से वादों का निपटारा ऑन द स्पॉट निशुल्क किया जाता है। यहां किसी की हार नहीं होती। यहां दोनों पक्षों की जीत होती है। न्यायाधीश नलिन कुमार पाण्डेय ने कहा कि यह पारंपरिक न्याय व्यवस्था का बेहतर विकल्प है।

सामाजिक सौहार्द

प्राधिकार के सचिव धीरेन्द्र कुमार पांडेय ने कहां कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों का निपटारा कराने से सामाजिक सौहार्द एवं सामंजस्य के साथ साथ भाईचारा कायम होता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में वादों के निपटारे कराने से फायदे ही फायदे हैं। बिना न्याय शुल्क के वादों का निपटारा हो जाता है। यहां निपटाए गए वादों का अपील नहीं होता है। इस अवसर पर समस्त न्यायिक पदाधिकारी, बैंक कर्मी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश: दो साल से अधिक पुराने बिजली बिल की वसूली नहीं होगी
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश: दो साल से अधिक पुराने बिजली बिल की वसूली नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने डीपफेक‑AI कंटेंट पर गुजरात हाई कोर्ट के PIL को रोका, केंद्र की ट्रांसफर याचिका पर नोटिस जारी
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने डीपफेक‑AI कंटेंट पर गुजरात हाई कोर्ट के PIL को रोका, केंद्र की ट्रांसफर याचिका पर नोटिस जारी

जौनपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 59,218 मामलों का निपटारा, 22.57 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय
मुकदमे

जौनपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 59,218 मामलों का निपटारा, 22.57 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय

चरखी दादरी में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 16,971 मामलों का समाधान, 8.93 करोड़ रुपये की सेटलमेंट तय
मुकदमे

चरखी दादरी में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 16,971 मामलों का समाधान, 8.93 करोड़ रुपये की सेटलमेंट तय

सर्वर त्रुटि 500 – कृपया बाद में पुनः प्रयास करें
मुकदमे

सर्वर त्रुटि 500 – कृपया बाद में पुनः प्रयास करें

सर्वर त्रुटि 500: पुनः प्रयास करें
मुकदमे

सर्वर त्रुटि 500: पुनः प्रयास करें

ग्रेटर नोएडा की राष्ट्रीय लोक अदालत ने तीन दंपतियों को पुनर्विवाह की राह दिखाते हुए तलाक की अर्जी वापस ली
मुकदमे

ग्रेटर नोएडा की राष्ट्रीय लोक अदालत ने तीन दंपतियों को पुनर्विवाह की राह दिखाते हुए तलाक की अर्जी वापस ली

सर्वर त्रुटि 500: पृष्ठ लोड नहीं हो पाया
मुकदमे

सर्वर त्रुटि 500: पृष्ठ लोड नहीं हो पाया

ताज़ा ख़बरें