बेतिया में मुफ्त वाद निपटान, लोक अदालत ने समाज में भाईचारा बढ़ाया
बेतिया में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क और त्वरित न्याय प्रदान किया। न्यायाधीशों ने विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए इसे एक आसान मंच बताया, जिससे सामाजिक सौहार्द में वृद्धि हुई। वादों के निपटारे के बाद अपील की कोई सुविधा नहीं है, जिससे प्रक्रिया और भी प्रभावी बनी।

सौजन्य से:- Hindustan
लोक अदालत वादों के निष्पादन के लिए सुलभ मंच
बेतिया में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने समाज के कमजोर तबकों को मुफ्त और त्वरित न्याय प्रदान किया। न्यायाधीशों ने इसे विवादों के त्वरित निपटारे और भाईचारे की स्थापना का आसान मंच बताया। यहां वादों का निपटारा बिना किसी शुल्क के किया गया, जिससे सामाजिक सौहार्द बढ़ा।
बेतिया, विधि संवाददाता। आज जब अदालतों में लंबित वादों की संख्या हजारों में है ऐसे में समाज के कमजोर तबकों को मुफ्त और जल्द न्याय दिलाने के लिए लोक अदालत का आयोजन उपयोगी सिद्ध हो रही है। समाज की बदलती परिस्थितियों का परिणाम है कि पहले आप न्याय पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाते थे। आज खुद न्यायपालिका आपके साथ बैठ आपके वादों का निपटारा करने को तत्पर है। उक्त बातें प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश असिताब कुमार ने शनिवार को न्यायालय परिसर में आयोजित नेशनल लोक अदालत के उद्घाटन के अवसर पर कही।
राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों के बीच वैमनस्य समाप्त कर भाईचारा स्थापित कराना है। अंहकार पतन का कारण बनता है। इसलिए अहंकार पालना ठीक नहीं है। अनावश्यक विवाद में फंसे रहना समझदारी नहीं। बेहतर यही है कि आपस में मिल बैठकर विवादों को समाप्त कर लें। राष्ट्रीय लोक अदालत इसके लिए सबसे आसान और सुलभ मंच है।
न्याय का महत्व
उन्होंने कहा कि समाजिक रिश्ता कायम करने का यह एक उचित माध्यम है। यहां स्वाभिमान और सम्मान के साथ निर्णय होता है। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मिलन कुमार ने कहा कि कि छोटे-छोटे विवादों को प्रतिष्ठा मान लेना समझदारी नहीं है। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से वादों का निपटारा ऑन द स्पॉट निशुल्क किया जाता है। यहां किसी की हार नहीं होती। यहां दोनों पक्षों की जीत होती है। न्यायाधीश नलिन कुमार पाण्डेय ने कहा कि यह पारंपरिक न्याय व्यवस्था का बेहतर विकल्प है।
सामाजिक सौहार्द
प्राधिकार के सचिव धीरेन्द्र कुमार पांडेय ने कहां कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों का निपटारा कराने से सामाजिक सौहार्द एवं सामंजस्य के साथ साथ भाईचारा कायम होता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में वादों के निपटारे कराने से फायदे ही फायदे हैं। बिना न्याय शुल्क के वादों का निपटारा हो जाता है। यहां निपटाए गए वादों का अपील नहीं होता है। इस अवसर पर समस्त न्यायिक पदाधिकारी, बैंक कर्मी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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