चम्बा: अदालत ने खारिज की अधिक मुआवजा की मांग
चमेरा जलविद्युत परियोजना से प्रभावित मोखरी गांव के भूमि स्वामी की याचिका पर अदालत ने सुनवाई करते हुए आरएंडआर योजना के तहत दी गई 5.50 लाख रुपये की राशि को पर्याप्त मानते हुए अधिक मुआवजा देने की मांग खारिज कर दी है।

सौजन्य से:- अमर उजाला
चंबा समाचार: अदालत ने खारिज की अधिक मुआवजा देने की मांग
तू।, 09 जुलाई 2026 10:55 अपराह्न भारतीय समय
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
अद्यतन थू, 09 जुलाई 2026 10:55 अपराह्न भारतीय समय
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मोखरी भूमि अधिग्रहण मामला.... आरएंडआर योजना में मिली राशि को कोर्ट ने पर्याप्त माना
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण के न्यायाधीश रमणीक शर्मा ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चमेरा जलविद्युत परियोजना चरण-तीन से प्रभावित मोखरी गांव के एक भूमि स्वामी को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) योजना के तहत अधिक मुआवजा देने की मांग अदालत ने खारिज कर दी है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश) चंबा के न्यायाधीश रमणीक शर्मा ने पवन कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में सुनाए गए फैसले में याचिका को निरस्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को आरएंडआर योजना के तहत पहले ही 5.50 लाख रुपये की राशि मिल चुकी है। यह पर्याप्त है। इसमें वृद्धि का कोई आधार नहीं बनता।
याचिकाकर्ता पवन कुमार ने अदालत में दायर याचिका में दावा किया था कि चमेरा जलविद्युत परियोजना चरण-तीन की सुरंग से पानी के रिसाव के कारण मोखरी क्षेत्र में उनकी भूमि और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उनका आरोप था कि परियोजना प्रबंधन ने प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास, पुनर्स्थापन और रोजगार उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। भूमि, भवन और अन्य परिसंपत्तियों के लिए निर्धारित मुआवजा भी पर्याप्त नहीं था।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, एनएचपीसी और भूमि अधिग्रहण अधिकारी की ओर से अभिलेख और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, साक्ष्य और रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना के तहत निर्धारित लाभ पहले ही दिए जा चुके हैं। मुआवजे में अतिरिक्त बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष अपना अपना खर्च स्वयं वहन करेंगे। लंबित सभी आवेदनों का भी निपटारा करते हुए मामले की फाइल अभिलेखागार में भेजने के निर्देश दिए। यह फैसला एक जुलाई को सुनाया गया।
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भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण के न्यायाधीश रमणीक शर्मा ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चमेरा जलविद्युत परियोजना चरण-तीन से प्रभावित मोखरी गांव के एक भूमि स्वामी को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) योजना के तहत अधिक मुआवजा देने की मांग अदालत ने खारिज कर दी है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश) चंबा के न्यायाधीश रमणीक शर्मा ने पवन कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में सुनाए गए फैसले में याचिका को निरस्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को आरएंडआर योजना के तहत पहले ही 5.50 लाख रुपये की राशि मिल चुकी है। यह पर्याप्त है। इसमें वृद्धि का कोई आधार नहीं बनता।
याचिकाकर्ता पवन कुमार ने अदालत में दायर याचिका में दावा किया था कि चमेरा जलविद्युत परियोजना चरण-तीन की सुरंग से पानी के रिसाव के कारण मोखरी क्षेत्र में उनकी भूमि और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उनका आरोप था कि परियोजना प्रबंधन ने प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास, पुनर्स्थापन और रोजगार उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। भूमि, भवन और अन्य परिसंपत्तियों के लिए निर्धारित मुआवजा भी पर्याप्त नहीं था।
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मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, एनएचपीसी और भूमि अधिग्रहण अधिकारी की ओर से अभिलेख और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, साक्ष्य और रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना के तहत निर्धारित लाभ पहले ही दिए जा चुके हैं। मुआवजे में अतिरिक्त बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष अपना अपना खर्च स्वयं वहन करेंगे। लंबित सभी आवेदनों का भी निपटारा करते हुए मामले की फाइल अभिलेखागार में भेजने के निर्देश दिए। यह फैसला एक जुलाई को सुनाया गया।
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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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