BJP सांसद की बढ़ेंगी मुश्किलें! सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज करने वाला हाई कोर्ट का फैसला पलटा
BJP सांसद की बढ़ेंगी मुश्किलें! सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज करने वाला हाई कोर्ट का फैसला पलटा कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा तकनीकी कमियों के आधार पर याचिका खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया. By Sumit Saxena…

सौजन्य से:- ETV Bharat
BJP सांसद की बढ़ेंगी मुश्किलें! सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज करने वाला हाई कोर्ट का फैसला पलटा
कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा तकनीकी कमियों के आधार पर याचिका खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया.
By Sumit Saxena
Published : August 24, 2026 at 6:57 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सांसद कृपानाथ मल्लाह की जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अपील को स्वीकार कर लिया है. यह फैसला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया.
गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ यह अपील कांग्रेस नेता हाफिज राशिद अहमद चौधरी ने दायर की थी, जिनकी पैरवी वरिष्ठ वकील हारिन प्रवीनकांत रावल और वकील अदील अहमद ने की.
सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ ने चुनाव याचिका को दोबारा गुवाहाटी हाई कोर्ट के पास भेज दिया है, ताकि वह इस पर फिर से विचार कर सके. पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, "हमें हाई कोर्ट के पुराने आदेश को बनाए रखने की कोई वजह नजर नहीं आती, इसलिए हम इसे पलटते हैं. हम इस चुनाव याचिका को हाई कोर्ट के पास वापस भेज रहे हैं ताकि ऊपर बताए गए नियमों के तहत इस पर दोबारा विचार किया जा सके. इस अपील को स्वीकार किया जाता है."
पीठ ने यह भी ध्यान दिलाया कि इस मामले में जो 'फॉर्म-25' जमा किया गया था, उस पर कोर्ट के सामने मौजूद मूल प्रति के अनुसार 'कमिश्नर ऑफ एफिडेविट्स' के सामने हस्ताक्षर किए गए थे.
पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट से सिर्फ यह अनुरोध करना काफी होगा कि वह दस्तावेजों की जांच करे. यदि शपथ पत्र पर सही तरीके से सत्यापन मौजूद है, तो मामले की खूबियों के आधार पर आगे बढ़ें. अगर सत्यापन मौजूद नहीं है, तो चुनावी भ्रष्टाचार के आरोपों पर विचार न करें और याचिका में शामिल अन्य आधारों की खूबियों पर सुनवाई जारी रखें.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील रावल ने दलील दी कि हाई कोर्ट का यह निष्कर्ष कि 'सत्यापन सही नहीं था', सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों के बिल्कुल खिलाफ है.
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया, "हमने 'एफ.ए. सापा बनाम सिंगोरा (1991)' मामले के फैसले का हवाला दिया है, जो विशेष रूप से जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 81(3) के पालन से जुड़ा है. इस फैसले के अनुसार, यदि याचिकाकर्ता ने हर पन्ने के नीचे अपने हस्ताक्षर करके इस बात की जिम्मेदारी ली है कि यह कॉपी बिल्कुल असली है, तो वह काफी होना चाहिए. खासकर तब, जब कानून में सत्यापन का कोई एक विशेष रूप या तरीका तय नहीं किया गया है."
यह भी दलील दी गई कि जनप्रतिनिधित्व कानून की 'धारा 86' के तहत किसी चुनाव याचिका को तुरंत खारिज तभी किया जा सकता है, जब वह धारा 81, 82 या 117 के नियमों का पालन न करती हो.
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया, "यह जो खास मुद्दा उठाया गया है कि 'फॉर्म-25' की कॉपी पर सत्यापन नहीं दिख रहा है, वह असल में धारा 83 के तहत आने वाली एक छोटी सी कमी (डिफेक्ट) है. इस कमी के आधार पर पूरी याचिका को तुरंत खारिज नहीं किया जाना चाहिए."
दूसरी तरफ, प्रतिवादी (बीजेपी सांसद) के वकील वजीह शफीक ने दलील दी कि जहां तक 'फॉर्म-25' का सवाल है, हाई कोर्ट ने इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया था. उन्होंने कहा कि भले ही कोर्ट में जमा किए गए मूल हलफनामे को कमिश्नर ऑफ एफिडेविट्स द्वारा सत्यापित किया गया है, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि यह सत्यापन 'फॉर्म-25' की तय कानूनी जरूरतों के अनुसार ही किया गया था.
पीठ ने कहा, "हम सम्मानपूर्वक 'एफ.ए. सापा' मामले के निष्कर्षों से सहमति जताते हैं और इसके विपरीत दिए गए हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हैं, क्योंकि इस्तेमाल की गई अलग-अलग रबर स्टैम्प्स (मोहरें) एक ही अर्थ दर्शाती हैं." हालांकि, पीठ ने आगे जोड़ा कि जहां तक 'फॉर्म-25' में सत्यापन (अटैस्टेशन) का सवाल है, वहां थोड़ी सी समस्या जरूर पैदा होती है.
पीठ ने स्पष्ट किया कि 'कंडक्ट ऑफ इलेक्शंस रूल्स, 1961' के तहत 'फॉर्म-25' पर चुनाव याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर होने चाहिए और उस पर किसी फर्स्ट-क्लास मजिस्ट्रेट, नोटरी या कमिश्नर ऑफ ओथ्स (शपथ आयुक्त) द्वारा यह सत्यापित किया जाना चाहिए कि एक निश्चित तारीख को उनके सामने यह शपथ ली गई थी.
यह अपील गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा 'जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951' की धारा 86 के तहत जारी आदेश के खिलाफ की गई थी. हाई कोर्ट के सामने मुख्य आपत्तियां चुनाव याचिका की प्रतियों के सत्यापन के तरीके, भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ लगाए गए फॉर्म-25 के हलफनामे और चार पन्ने गायब होने के आरोप से जुड़ी थीं. हाई कोर्ट ने पन्ने गायब होने के आरोप को तो खारिज कर दिया था, लेकिन सत्यापन के मुद्दे पर पूरी चुनाव याचिका को ही खारिज कर दिया था.
इसे भी पढ़ेंः
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात उच्च न्यायालय के मध्यस्थता सप्ताह ने मांगी: पारदर्शिता, जवाबदेही और अंतिमता की नई कानूनी रूपरेखा

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया

सुप्रीम कोर्ट से वंतारा तक: न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की नई भूमिका में सुरक्षा के सवाल

केन्द्र ने अनिल अंबानी की काले धन याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए स्थानांतरित करने का आग्रह किया

SC जज संदीप मेहता ने CJI को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान HC के जज पर शक्ति दुरुपयोग का आरोप

खुले नाले ने आगरा में मौतें, पर्यावरणविद अदालत की राह पकड़ने को तैयार

CJI सूर्यकांत को जस्टिस मेहता की चौथी चिट्ठी, राजस्थान HC जज पर फिर गंभीर आरोप

भैरूंदा से नेशनल लोक अदालत के प्रचार हेतु जागरूकता वाहन रवाना
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी: निकिता गौड़ ने मध्यस्थों से अधिकतम मामलों के निस्तारण का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट के जज ने सीजीआई को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर दुरुपयोग का आरोप
- मधेपुरा में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, 9500 मामलों के लिए 14 बेंचों के साथ
- सुप्रीम कोर्ट ने TMC के साइनबोर्ड हटाने के मामले में दखल से इनकार, हाई कोर्ट में सुनवाई जारी
- डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनेताओं की तुरन्त हिरासत की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा बयान
- राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए अधिवक्ताओं से सहयोग का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट की नई मासिक व्याख्यान श्रृंखला: कानून, न्याय और शिक्षा का सतत मंच
- शेरघाटी में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता मोहीम शुरू

