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भभुआ और मोहनिया में 12 सितम्बर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत, ट्रैफ़िक चालान पर 50% रियायत

भभुआ के व्यवहार न्यायालय और मोहनिया के अनुमंडल न्यायालय में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का सत्र होगा, जिसमें ट्रैफ़िक चालान से जुड़े मामलों पर आधी कीमत की छूट दी जाएगी। सभी प्रकार के सुलहनीय वादों को एक ही दिन में शीघ्रता से निपटाया जाएगा, जिससे लंबित मामलों का त्वरित समाधान और वकील‑फीस से राहत मिलेगी।

1 सितंबर 2026 को 05:32 pm बजे
भभुआ और मोहनिया में 12 सितम्बर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत, ट्रैफ़िक चालान पर 50% रियायत

सौजन्य से:- Hindustan

Bhabua News: राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं पक्षकार: डीजे

Bhabua News: भभुआ में व्यवहार न्यायालय और अनुमंडल न्यायालय मोहनियां में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होगा। ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों में 50% छूट मिलेगी। सभी प्रकार के सुलहनीय वादों का त्वरित समाधान किया जाएगा। यह प्रक्रिया वर्षों से लंबित मामलों को एक ही दिन में सुलझाने में मदद करेगी।

Bhabua News: ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों में 50% की विशेष छूट मिलेगी इस अदालत में वर्षों से लंबित मामलों का समाधान तुरंत किया जाएगा (पेज तीन) भभुआ, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। व्यवहार न्यायालय भभुआ और अनुमंडल न्यायालय मोहनियां में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी।

राष्ट्रीय लोक अदालत में छूट

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह जिला प्रधान जज अनुराग ने त्वरित निष्पादन एवं छूट का लाभ उठाने की अपील पक्षकारों से की है। उन्होंने बताया कि आम नागरिकों की सुविधा एवं सहूलियत के लिए ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों में 50% की विशेष छूट मिलेगी। सभी प्रकार के सुलहनीय वादों का निष्पादन अतिशीघ्र व त्वरित रूप से किया जाएगा। राष्ट,ीय लोक अदालत में मुकदमे से पूर्व के वाद, सुलहनीय आपराधिक वाद, एनआई एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस) वाद, बैंक ऋण वसूली वाद, मोटर दुर्घटना दावा, न्यायाधिकरण वाद का निपटारा किया जाएगा।

सुलह प्रक्रिया में लाभ

इसके अलावा वैवाहिक-पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व, टेलीफोन बिल, विद्युत, पानी बिल, सेवा संबंधी व दीवानी वाद का निष्पादन किया जाएगा। आपसी बातचीत और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हल वाद किया जाता है। वर्षों से लंबित मामलों का समाधान तुरंत और एक ही दिन में हो जाता है। सुलह के आधार पर मामला समाप्त होने से किसी भी पक्ष को सजा नहीं होती। वकील का अनावश्यक खर्च बचता है तथा कोई कोर्ट-फीस नहीं लगती।

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