जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने बार काउंसिल पर गंभीर सवाल उठाया
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर आलोचना की, यह कहते हुए कि यदि इसके सदस्यों को स्वयं सम्मान नहीं मिलता, तो यह कानूनी पेशे के लिए चिंताजनक है। उन्होंने वकीलों से पेशेवर नैतिकता और दक्षता पर पुनर्विचार करने, तथा न्याय व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। इसके अलावा, बीसीआई अध्यक्ष मनन मिश्रा के सातवें कार्यकाल और वकीलों द्वारा इस्तीफा माँगने के बीच चल रही बहस पर भी प्रकाश डाला।

सौजन्य से:- Hindustan
जब अपने ही सम्मान नहीं करते…सुप्रीम कोर्ट की जज ने BCI पर उठाए गंभीर सवाल
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी. वी, नागरत्ना ने कहा कि बीसीआई को लेकर गंभीर सवाल है कि अगर उनके अपने ही सदस्य सम्मान नहीं करते तो यह संकेत बहुत अच्छा नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की जज बी. वी. नागरत्ना ने शनिवार को कहा कि कानूनी व्यवस्था लंबित मामलों, देरी और बढ़ती लागत की समस्या से जूझ रही है। उन्होंने वकीलों से अपनी सोच बदलने, अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने और न्याय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। जस्टिस नागरत्ना ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जब किसी बार काउंसिल को उसके सदस्य ही सम्मान नहीं देते, तो यह कानूनी पेशे के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
बार काउंसिल पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि बार काउंसिल को पेशेवर नैतिकता, सदाचार और पेशेवर दक्षता को बनाए रखने में अपनी भूमिका और महत्व पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि वकील भी परेशान वादियों को न्याय दिलाने और देश में लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के प्रति अपने कर्तव्यों पर विचार करें।
कहीं वकीलों के बुरे दिन ना आ जाएं
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ''इस देश के वकील हमारे संविधान के मूल्यों के ध्वजवाहक हैं। बार की किसी भी चूक या गलती का हमारे राजनीतिक और नागरिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। यही वजह है कि हमारे समाज में उनका इतना महत्व है।'' उन्होंने कहा, ''मैं बार के प्रत्येक सदस्य से विनम्रतापूर्वक आग्रह करती हूं कि वे अपनी सोच बदलें और अपने मुवक्किलों के लिए जनसेवा की भावना से काम करने का प्रयास करें, अन्यथा भविष्य में वे अपनी प्रासंगिकता खो सकते हैं। ऐसा होना हमारी न्याय व्यवस्था और देश में कानून के शासन को बनाए रखने के लिए विनाशकारी होगा।''
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की। दीक्षांत समारोह में उनके अलावा उच्च न्यायालय के कई अन्य न्यायाधीश और एनएलयू, दिल्ली के कुलाधिपति प्रोफेसर जी. एस. वाजपाई भी मौजूद थे।
सीजेआई ने भी लगाई थी बार काउंसिल ऑफ इंडिया को फटकार
बीते दिनों सीजेआई सूर्यकांत ने भी बार काऊंसिल ऑफ इंडिया को फटकार लगाते हुए कहा था कि उनसे उनके और छात्रों के बीच आने की कोई जरूरत नहीं है। दरअसल छात्रों पर लाठी चार्ज के एक वीडियो पर टिप्पणी करने के मामले को लेकर हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सीजेआई का विरोध किया था। इसके बाद BCI के चेयरमैन मनन मिश्रा ने छात्रों को बीसीआई में रजिस्टर ना करने का फैसला कर लिया। हालांकि उन्हें यह फैसला वापस लेना पड़ा।
मनन मिश्रा से इस्तीफा मांग रहे वकील
वकील बीसीआई अध्यक्ष के लंबे कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए उनका इस्तीफा मांग रहे हैं। उनके कार्यकाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका फाइल की गई। इसपर मनन मिश्रा ने कहा, मुझे चुना गया है और मैं इस्तीफा नहीं देने वाला हूं। बता दें कि देशभर के लगभग 25 लाख वकील पहले अपने-अपने राज्य की स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इसके बाद ये प्रतिनिधि मिलकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को चुनते हैं। मनन मिश्रा का यह सातवां कार्यकाल हैं। वह 6 बार निर्विरोध चुने गए हैं।
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