सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकीलों को दी सलाह: वरिष्ठों के साथ प्रशिक्षण ही है सफलता की कुंजी
सुप्रीम कोर्ट ने बार के युवा सदस्यों से कहा कि वरिष्ठ वकीलों के साथ ट्रेनिंग न करने से पेशे की बारीकियों को समझ पाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि डिग्री और हार्ड स्किल्स के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और कोर्टरूम का अनुभव भी आवश्यक है, जिसे मेंटरशिप से ही विकसित किया जा सकता है।

सौजन्य से:- Jagran
'जब तक वरिष्ठों से ट्रेनिंग नहीं लेंगे, बारीकियां नहीं सीख सकेंगे', युवा वकीलों से बोला सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकीलों को सलाह दी है कि वे वरिष्ठों के साथ प्रशिक्षण लें ताकि पेशे की बारीकियां सीख सकें।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बार के युवा सदस्यों से कहा कि जब तक वे वरिष्ठों के साथ प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) नहीं लेंगे, उन्हें पेशे की बारीकियां नहीं पता चलेंगी। बार के युवा सदस्यों को पता होना चाहिए कि कोर्ट में क्या बोलना है और क्या नहीं।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस अगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने यह टिप्पणी बांबे हाई कोर्ट के एक आदेश से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, आज मुझे बताया गया है कि कुछ युवा बिना किसी ट्रेनिंग के सीधे अपना आफिस शुरू कर रहे हैं।
यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। जब तक आप वरिष्ठों के साथ ट्रेनिंग नहीं लेंगे, आपको वकालत का असली हुनर, इस काम की असली तरकीबें नहीं पता चलेंगी। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि आजकल के युवा महत्वाकांक्षी हैं। लेकिन जब तक आप वरिष्ठों के साथ ट्रेनिंग नहीं लेते, आपको इस पेशे की बारीकियां नहीं पता चलेंगी। पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसा ही चलता आ रहा है।
पीठ ने कहा, युवा डिग्री ले रहे हैं और जल्द ही अपने आफिस खोल रहे हैं। लेकिन साफ्ट स्किल्स कहां हैं? आपके पास हार्डवेयर हो सकता है, साफ्ट स्किल्स हर दिन विकसित करनी होती हैं। एक वरिष्ठ से, आपको सीखना होगा या कोर्ट में बैठकर देखना होगा। हमें बार के भविष्य की चिंता है।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, अदालत को देखकर बार के युवा सदस्यों को पता चलेगा कि कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए। एक वकील के तौर पर अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, हम कुछ अदालती कक्षों में जाते थे, खासकर सख्त जजों की अदालतों में, ताकि हम खुद को उस सख्ती से बचा सकें, क्योंकि अगली बार जब आपका वहां कोई केस होगा, तो आप जज को देखकर, कैसे जवाब देना है, क्या कहना है, पहले से ही उससे बच जाएंगे।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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