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हाईकोर्ट ने चेतावनी: दादा‑दादी के नाम केस, पोते‑पोती तक सुनवाई—मानसिकता बदलना आवश्यक

राजस्थान हाईकोर्ट ने लंबे समय से लटके राजस्व मामलों के शीघ्र निपटारे की जरूरत पर ज़ोर देते हुए दादा‑दादी के नाम दायर किए गये केसों को पोते‑पोती तक सुनवाई तक ले जाने वाली सोच को बदलने का आह्वान किया। अदालत ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अध्यक्षता में एक बकाया समीक्षा समिति का गठन आदेशित किया, जो हर तीन माह में पुराने मामलों की प्रगति पर नजर रखेगी, तथा दस साल से अधिक पुराने मुकदमों को लाल कवर में रखकर त्वरित निर्णय देने का निर्देश दिया।

18 सितंबर 2026 को 04:04 pm बजे
हाईकोर्ट ने चेतावनी: दादा‑दादी के नाम केस, पोते‑पोती तक सुनवाई—मानसिकता बदलना आवश्यक

सौजन्य से:- ETV Bharat

दादा करे केस दायर और पोता देखे सुनवाई, यह मानसिकता बदलने की जरूरत - हाईकोर्ट

मुख्य सचिव मंडल मुख्यालयों पर आईएएस अधिकारियों की अध्यक्षता में बकाया समीक्षा समिति बनाएं, कमेटी हर तीन माह में पुराने राजस्व मुकदमों की समीक्षा करेगी

Published : September 18, 2026 at 9:04 PM IST

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सालों से लंबित राजस्व मुकदमों के शीघ्र निस्तारण नहीं होने पर चिंता जाहिर की है. अदालत ने कहा- अब समय आ गया है कि पक्षकारों की उस पुरानी मानसिकता को बदला जाए कि केस दादा-दादी दायर करते हैं और उसका निस्तारण उनके पोता-पोती के समय में होता है. ऐसी स्थिति में एक पक्षकार विवाद का निर्णय हुए बिना ही हार का अनुभव करता है. साथ ही अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि मंडल मुख्यालयों पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अध्यक्षता में एक बकाया समीक्षा समिति का गठन किया जाए. यह कमेटी हर तीन माह में बैठक आयोजित कर राजस्व अदालतों के पुराने लंबित मुकदमों की निगरानी करेगी. इसके साथ ही मुख्य सचिव छह माह में अदालत में पालना रिपोर्ट पेश कर पुराने लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे. जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश लक्ष्मीनारायण की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.

पुराने केसों पर हाईकोर्ट के सख्त निर्देश: अदालत ने समस्त राजस्व अदालतों को निर्देश दिए हैं कि वे दस साल से ज्यादा पुराने मुकदमों को सबसे पुराने मुकदमों की श्रेणी में लेकर उन्हें तुरंत तय करें. इन मुकदमों की फाइलों की पहचान के लिए उन्हें लाल कवर में रखा जाए. वहीं, पीठासीन अधिकारी इनकी ऑर्डर शीट स्वयं लिखें. अदालत ने कहा कि पीठासीन अधिकारी हर माह लंबित मुकदमों के आंकड़े कलेक्टर को भेजें और वे उसे बकाया समिति को फॉरवर्ड करें. अदालत ने याचिकाकर्ता से जुड़े दो दशक पुराने मुकदमे के छह माह में निस्तारण के लिए अलवर के रैणी एसडीओ को निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि यह अत्यंत चौंकाने वाला है कि मामलों को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, लेकिन उसे सालों तक तय नहीं किया गया. अदालत ने राजस्व मंडल को निर्देश दिए हैं कि वह उपखंड अधिकारियों व आरएए के समक्ष वर्षवार लंबित अपीलों की जानकारी अदालत में पेश करे.

राजस्व मंडल में 72 हजार से अधिक केस पेंडिंग: सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में राजस्व मंडल के रजिस्ट्रार महावीर प्रसाद अदालत में पेश हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि मंडल में कुल 72 हजार से अधिक मामले लंबित हैं. इनमें दो मुकदमे बीते चार दशक से लंबित चल रहे हैं. इसी तरह तीस से चालीस साल की अवधि के तीन और बीस से तीस साल पुराने 2882 मामले लंबित हैं. रजिस्ट्रार ने अदालत को बताया कि मुकदमों के निस्तारण के लिए 13 पीठ काम कर रही हैं.

CAT में अध्यक्ष नियुक्ति के लिए सरकार को 3 सप्ताह का समय, नहीं तो कार्मिक सचिव होंगे तलब: राजस्थान हाईकोर्ट ने सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (CAT) में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति करने के लिए राज्य सरकार को तीन सप्ताह का समय दिया है. अदालत ने कहा- यदि इस अवधि में नियुक्ति नहीं होती है तो कार्मिक सचिव अदालत में पेश होकर इस संबंध में अपना जवाब पेश करें. जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता दिलीप कुरका व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.

सरकार ने मांगा तीन सप्ताह का समय: सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष पद पर तीन सप्ताह में नियुक्ति कर दी जाएगी. ऐसे में मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद रखी जाए. इस पर अदालत ने राज्य सरकार को समय देते हुए नियुक्ति नहीं होने पर कार्मिक सचिव को तलब किया है.

पहले भी जता चुकी है नाराजगी: अदालत ने गत 4 अगस्त को सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण के खाली चल रहे पदों पर नियुक्ति नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताई थी. इसके साथ ही अदालत ने एक सप्ताह में खाली पदों पर नियुक्ति नहीं करने पर कार्मिक सचिव को हाजिर होने के निर्देश दिए थे. इसके बाद राज्य सरकार ने अधिकरण में 2 सदस्यों की नियुक्ति कर दी थी, लेकिन अध्यक्ष पद पर नियुक्ति होना बाकी है.

पढ़ें: एसटी वर्ग के 12 फीसदी आरक्षण में से क्यों ना 9 फीसदी दें भील समुदाय को- हाईकोर्ट

1300 से अधिक अपीलें अटकी: जनहित याचिका में अधिवक्ता सुनील समदडिया ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों की सुनवाई के लिए अधिकरण का गठन किया गया है. बीते करीब चार माह से अध्यक्ष का पद खाली है. वहीं एक न्यायिक अधिकारी ही प्रभावी रूप से कार्यरत हैं. उनके अनुपलब्ध होने पर अधिकरण काम नहीं करता. जिसके चलते अधिकरण में करीब 1300 से अधिक अपीलों पर प्रभावी सुनवाई नहीं हो पा रही है. इससे कर्मचारियों के तबादले, पदोन्नति, वरिष्ठता और पेंशन सहित अन्य विवादों पर सुनवाई में काफी देरी हो रही है. अधिवक्ताओं ने इस संबंध में राज्य सरकार को भी कई बार अभ्यावेदन दिया, लेकिन अभी तक अधिकरण में नियुक्ति नहीं हुई है.

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