होममुकदमेपटना हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर की कड़ी फटकार
मुकदमे

पटना हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर की कड़ी फटकार

पटना हाईकोर्ट ने सीतामढ़ी जिलाधिकारी द्वारा डॉ. देवनारायण झा के खिलाफ की गई व्यक्तिगत टिप्पणी को अनुचित करार दिया और उसे हटाने का आदेश दिया। न्यायाधीश आलोक कुमार ने कहा कि अर्ध‑न्यायिक प्राधिकारी को निर्णय तथ्यों और कानून के आधार पर लेना चाहिए, न कि पक्षपातपूर्ण व्यक्तिगत आकलन पर। अदालत ने नाले के जाम होने से जुड़े मूल प्रशासनिक आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया।

19 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
पटना हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर की कड़ी फटकार

सौजन्य से:- Jagran

DM साहब, फैसला तथ्यों और कानून पर होना चाहिए; सीतामढ़ी जिलाधिकारी के आदेश पर पटना हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

पटना हाईकोर्ट ने सीतामढ़ी के जिलाधिकारी द्वारा एक शिकायतकर्ता (डॉ. देवनारायण झा) के खिलाफ की गई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

विधि संवाददाता, पटना। पटना हाईकोर्ट ने सीतामढ़ी के जिलाधिकारी-सह-द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी द्वारा एक शिकायतकर्ता के खिलाफ की गई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी को मामले का फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर करना चाहिए। किसी वादी के चरित्र, नैतिकता या व्यक्तिगत पृष्ठभूमि पर असंबंधित टिप्पणी करना अधिकार का दुरुपयोग है।

जिलाधिकारी ने डॉ. देवनारायण झा के बारे में की थी टिप्पणी

न्यायाधीश आलोक कुमार ने संस्कृत के विद्वान और पूर्व विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. देव नारायण झा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी के 25 फरवरी 2023 के आदेश में की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों को आदेश से हटा दिया।

मामला गांव में सरकारी योजना के तहत बने नाले के जाम होने और उसके पानी से कृषि भूमि प्रभावित होने की शिकायत से जुड़ा था। शिकायत पर अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद नाले की मरम्मत का निर्देश दिया गया था।

बाद में अपील खारिज करते हुए जिलाधिकारी ने डॉ. झा के बारे में टिप्पणी की थी कि उनमें आसपास रहने वाले एससी-एसटी समुदाय के लोगों को परेशान करने की मानसिकता प्रतीत होती है।

टिप्पणी को बताया निष्पक्षता के मूल सिद्धांत के विपरीत

हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत चरित्र पर इस तरह की टिप्पणियां न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के मूल सिद्धांत के विपरीत हैं।

कोर्ट ने एएम माथुर बनाम प्रमोद कुमार गुप्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए संयमित भाषा के महत्व को रेखांकित किया।

हालांकि, नाले से जुड़े मूल प्रशासनिक आदेश में कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया। भौतिक जांच में याचिकाकर्ता की जमीन पर जलजमाव नहीं मिलने की रिपोर्ट को देखते हुए उस हिस्से में हस्तक्षेप से इनकार किया गया।

यह भी पढ़ें- जज साहब ही भूल गए कानून? पटना हाई कोर्ट की ADJ को फटकार, कहा- आपको दोबारा ट्रेनिंग पर भेज दें

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में जमा राशि और ब्याज के मानकीकरण हेतु कानून आयोग को जिम्मेदारी सौंपी
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में जमा राशि और ब्याज के मानकीकरण हेतु कानून आयोग को जिम्मेदारी सौंपी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इक्क्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया से पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए
मुकदमे

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इक्क्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया से पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय जमा प्रबंधन के लिए नया कानून मांग किया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय जमा प्रबंधन के लिए नया कानून मांग किया

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय जमा पर मानक कानून की मांग की, कानून आयोग से समीक्षा का आह्वान
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय जमा पर मानक कानून की मांग की, कानून आयोग से समीक्षा का आह्वान

ट्रंप की टैरिफ रणनीति में नया मोड़: 150‑दिन का 15% प्लान B, अदालत की रोक के बीच
मुकदमे

ट्रंप की टैरिफ रणनीति में नया मोड़: 150‑दिन का 15% प्लान B, अदालत की रोक के बीच

ममता बेगम ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी प्रतीक पर इलेक्शन कमिशन के जमे हुए आदेश के विरुद्ध अपील दायर की
मुकदमे

ममता बेगम ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी प्रतीक पर इलेक्शन कमिशन के जमे हुए आदेश के विरुद्ध अपील दायर की

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने टीएमसी के चुनाव चिन्ह फ्रीज को चुनौती दी
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने टीएमसी के चुनाव चिन्ह फ्रीज को चुनौती दी

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के सहायक आचार्य चयन को रद्द कर नई मेरिट लिस्ट का आदेश दिया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के सहायक आचार्य चयन को रद्द कर नई मेरिट लिस्ट का आदेश दिया

ताज़ा ख़बरें