9 साल बाद 1.30 करोड़: पटना हाईकोर्ट ने लोक अदालत में ऐतिहासिक फैसला
2017 में मोटर दुर्घटना में हुए शोकांतिका के बाद, बीमा कंपनी और परिवार के बीच 9 वर्ष का विवाद सुलझा और 1.30 करोड़ रुपये का चेक पत्नी व दो नाबालिग बच्चों को सौंपा गया। उसी दिन पटना की राष्ट्रीय लोक अदालत ने 43 मामलों का निपटारा कर कुल 5 करोड़ 46 लाख से अधिक का मुआवजा पीड़ित परिवारों को दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
9 साल बाद सड़क हादसे के पीड़ित को मिला 1.30 करोड़, लोक अदालत में ऐतिहासिक फैसला
बिहार राष्ट्रीय लोक अदालत में पटना हाईकोर्ट ने 1.30 करोड़ का ऐतिहासिक मुआवजा दिया. ब्यूरो रिपोर्ट
Published : September 13, 2026 at 8:11 AM IST
पटना: बिहार में राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 43 मामलों का निष्पादन हाईकोर्ट स्तर पर किया गया. इसके साथ ही कुल 5 करोड़ से अधिक की राशि पीड़ित परिवारों को दिलायी गयी. मोटर दुर्घटना का मामला एक ऐतिहासिक समझौते के साथ सुलझाया गया. यह केस 1.30 करोड़ रुपये में समझौते के आधार पर निष्पादित हो गया. मोटर वाहन दुर्घटना में हुई मौत पर बीमा कंपनी ने मृतक के परिजनों को समझौते के आधार पर 1 करोड़ 30 लाख रुपये का चेक सौंपा.
2017 का मामला सुलझा
मृतक अभिमन्यु सिंह एक कंपनी में एमडी के पद पर कार्यरत थे. 4 जनवरी, 2017 को मोटर वाहन दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी. इसके बाद बीमा कंपनी द्वारा इंश्योरेंस के पैसे देने का विवाद सामने आया था. लंबे समय तक यह मामला पेंडिंग रहा था. बीमा कंपनी के अधिवक्ता दुर्गेश कुमार सिंह और यश रूहान की पहल पर पक्षकारों के बीच यह समझौता हुआ. मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी अनिरुद्ध देवराज और अधिवक्ता संगीतेश शिवम की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी हुई. अंतिम समझौते के रूप में 1 करोड़ 30 लाख रुपये का चेक पत्नी और दो नाबालिग बच्चों को दिया गया.
43 केस को निष्पादन
हाईकोर्ट में लोक अदालत के दौरान करीब 364 केसों को 7 बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था. इनमें से 43 केस को सफलतापूर्वक निष्पादित किया गया. लोक अदालत में मोटर वाहन दुर्घटना के शिकार मृतक के परिजनों को कुल 5 करोड़ 46 लाख 66 हजार 4 सौ 25 रुपये का मुआवजा दिया गया.
मसौढ़ी में सैकड़ों मुकदमों का निपटारा
मसौढ़ी सिविल कोर्ट परिसर में लोक अदालत को लेकर सुबह से ही वकीलों और पक्षकारों की भारी भीड़ उमड़ी रही. इस लोक अदालत के सफल संचालन के लिए पांच न्यायिक बेंचों का गठन किया गया था. हर बेंच पर अलग-अलग प्रकृति के मामलों की गंभीरता से सुनवाई हुई. अदालत में मुख्य रूप से आपसी सुलह समझौते वाले कंपाउंडेबल केस और दीवानी मामलों का निष्पादन किया गया. इसके साथ ही बिजली बिल विवाद, बैंक ऋण, नापतौल और मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई हुई. पारिवारिक विवाद और अन्य सुलहनीय मामलों को भी आपसी सहमति से बंद कराया गया. मारपीट के एक पुराने केस में दोनों पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया जो पिछले 9 साल से चल रहा था.
इस मौके पर एसडीजेएम शुभम त्रिपाठी ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय लोक अदालत आपसी सुलह और कंपाउंडेबल मामलों के निपटारे के लिए बहुत ही बढ़िया प्लेटफॉर्म है. इससे अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है. इसके साथ ही आम लोगों को बहुत त्वरित न्याय मिलता है." उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने छोटे-छोटे विवादों को लोक अदालत के माध्यम से ही सुलझाएं.
लखीसराय में 1000 आवेदनों पर सुनवाई
लखीसराय में प्रभारी प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश श्रीमती सीमा कुमारी ने इसका शुभारंभ किया. लोक अदालत कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई हुई. इसमें वैवाहिक वाद, मोटर दुर्घटना केसेज, चेक बाउंस, आपराधिक सुलहनीय वाद, उपभोक्ता विवाद और ऋण वसूली के मामलों का निपटारा किया गया. सरफेसी मामले, एक्सक्यूसन प्रोसिडिंग्स और आर्बिटेशन मैटर्स की भी सुनवाई हुई. विभिन्न वादों के कुल 1000 आवेदन प्राप्त हुए जिन पर त्वरित सुनवाई कर निपटारे की प्रक्रिया शुरू की गई. समाचार लिखे जाने तक कुल 11 लाख रुपये से अधिक की राशि की वसूली की जा चुकी थी.
आपसी समन्वय ही है असली न्याय
इस मौके पर पहुंचे न्यायाधीशों ने लोक अदालत के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय लोक अदालत में किसी की हार या जीत नहीं होती है. इसमें आपसी समन्वय से दोनों पक्षों को सुनते हुए कार्रवाई की जाती है. इसके बाद सर्वसम्मति से मामलों का निपटारा किया जाता है." कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया था.
अररिया में 1819 मामलों का निष्पादन
व्यवहार न्यायालय परिसर अररिया में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया. इसमें विभिन्न प्रकृति के कुल 1819 मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया. इन मामलों में कुल 2 करोड़ 48 लाख 22 हजार 123 रुपये की समझौता राशि तय हुई. लोक अदालत में आपराधिक प्रकृति के 775 मामलों का निपटारा किया गया. बैंक ऋण से जुड़े कुल 604 मामलों का निपटारा हुआ जिसमें कुल 2 करोड़ 47 लाख 5 हजार 425 रुपये की बड़ी समझौता राशि तय हुई. इसके अलावा लंबे समय से लंबित मामलों के निष्पादन पर विशेष जोर दिया गया. न्यायालय के आंकड़ों के अनुसार 10 वर्ष पुराने 230 मामलों, 20 वर्ष पुराने 53 मामलों और 30 वर्ष से लंबित 8 मामलों का भी सुखद निष्पादन किया गया.
एकमुश्त यातायात चालान से मिली राहत
अदालत में लंबित ट्रैफिक चालानों के निष्पादन को लेकर वाहन स्वामियों की अच्छी भीड़ रही. समाचार लिखे जाने तक 298 ट्रैफिक चालानों का निष्पादन किया जा चुका था. इन चालानों से करीब 6 लाख 10 हजार रुपये की शमन राशि जमा हुई. यह कार्रवाई बिहार सरकार की एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना-2026 के तहत की गई. वाहन स्वामियों की सुविधा के लिए चालान सत्यापन और भुगतान के अलग काउंटर बने थे.
हर तिमाही में चार बार लोक अदालत
वर्ष में लगभग राष्ट्रीय स्तर पर हर तिमाही में चार बार राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होता है. सबसे पहले मार्च, फिर मई, उसके बाद सितंबर और अंत में दिसंबर माह में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है. अब अगला राष्ट्रीय लोक अदालत दिसंबर, 2026 में आयोजित किया जाएगा. यह इस वर्ष का अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत होगा.
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