हाईकोर्ट ने बुलंदशहर बार एसोसिएशन के चुनाव में 30% महिला आरक्षण का आदेश, बायलॉज में संशोधन अनिवार्य
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2025‑26 के बुलंदशहर बार एसोसिएशन चुनाव को रद्द नहीं किया, बल्कि बार एसोसिएशन को एक महीने के भीतर अपने नियमावली में बदलाव कर भविष्य के सभी चुनावों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें सुरक्षित करने का निर्देश दिया। अदालत ने वर्तमान कार्यकारिणी, जिसमें चार महिला वकीलों को बाद में नियुक्त किया गया था, को किसी प्रतिकूल आदेश तक जारी रहने की अनुमति दी।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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बार एसोसिएशन चुनाव : महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दें:हाईकोर्ट का आदेश, उप-नियमों में संशोधन के दिए निर्देश
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल बार एसोसिएशन बुलंदशहर के वर्ष 2025-26 के चुनाव को रद्द करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने बार एसोसिएशन को एक महीने के भीतर अपने बायलॉज में संशोधन कर भविष्य के सभी चुनावों में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व अनि
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने बुलंदशहर की महिला अधिवक्ता भावना पंडित की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। जानिये क्या है मामला
याचिका में गत 16 अप्रैल को संपन्न हुए बार एसोसिएशन के चुनाव को चुनौती दी गई थी। याची का तर्क था कि दीक्षा एन अमृतेश बनाम कर्नाटक राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में कम से कम 30 प्रतिशत महिला आरक्षण अनिवार्य किया गया है। बुलंदशहर बार में 79 महिला मतदाता होने के बावजूद चुनाव में एक भी महिला पदाधिकारी नहीं चुनी गई इसलिए चुनाव रद्द कर नए सिरे से 30 प्रतिशत आरक्षण के साथ चुनाव कराने की मांग की गई थी।
बार एसोसिएशन की ओर से दलील दी गई कि चुनाव प्रक्रिया गत चार अप्रैल को अधिसूचित हुई थी। चुनाव में किसी भी महिला अधिवक्ता ने नामांकन नहीं भरा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए 20 अप्रैल को नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने चार महिला वकीलों निशा सिंह, अंजलि, रचना सोलंकी व शबाना मलिक को सह-कोषाध्यक्ष व कार्यकारिणी सदस्यों के रूप में मनोनीत कर 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के मानक को पूरा कर दिया था।
हाईकोर्ट में क्या पेश की दलींले
हाईकोर्ट ने माना कि तकनीकी रूप से मनोनयन की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के संशोधित आदेश के अनुरूप प्रशासनिक न्यायाधीश की सहमति से नहीं हुई थी लेकिन किसी महिला वकील ने चुनाव नहीं लड़ा था और बाद में चार महिलाओं को शामिल कर लिया गया इसलिए पूरे चुनाव को रद्द करना न्यायहित में नहीं होगा। हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए बार एसोसिएशन को एक महीने के भीतर अपने बायलॉज/मेमोरेंडम में संशोधन करने का निर्देश दिया ताकि भविष्य के चुनावों में 30 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू हो सके। इस संशोधन में हालिया चुनाव और मनोनयन को विशेष भूतलक्षी प्रभाव भी दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन एक महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया और चारों महिला वकीलों के मनोनयन की पूरी जानकारी जिला जज, वरिष्ठतम महिला वकील व पदाधिकारियों के परामर्श के साथ बुलंदशहर के प्रशासनिक न्यायाधीश को भेजेगी और जब तक प्रशासनिक न्यायाधीश द्वारा कोई प्रतिकूल आदेश नहीं दिया जाता, तब तक गत 16 अप्रैल को निर्वाचित और 20 अप्रैल को मनोनीत सदस्यों वाली कार्यकारिणी यथावत कार्य करती रहेगी।
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