8 करोड़ खर्च और काम जीरो, सुप्रम कोर्ट ने कसा फंदा सुपरनोवा प्रोजेक्ट पर
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद भी सुपरटेक सुपरनोवा प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य शून्य है। कोर्ट ने प्रशासनिक खर्चों और कंसल्टेंट्स की फीस के नाम पर हुए खर्चों की जांच के लिए ऑडिट का आदेश दिया है।

सौजन्य से:- AajTak
Sign In
Advertisement
X
नोएडा के बहुचर्चित सुपरटेक सुपरनोवा प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान होमबायर्स के वकील यू.के. उनियाल ने गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि एम्पावर्ड कमेटी के गठन के पिछले 8 महीनों में प्रोजेक्ट की स्थिति जस की तस बनी हुई है.
कमेटी के सदस्यों के वेतन, प्रशासनिक खर्चों और कंसल्टेंट्स की फीस के नाम पर लगभग ₹8 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक ईंट भी नहीं लगाई गई है. इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल खड़े किए हैं कि जब धरातल पर निर्माण शुरू ही नहीं हुआ, तो यह राशि किस आधार पर खर्च की गई और अपने आशियाने का इंतजार कर रहे घर खरीदारों को उनका पजेशन कब मिलेगा.
सुपरटेक सुपरनोवा प्रोजेक्ट: कब और कैसे शुरू हुआ था?
नोएडा के सेक्टर 94 में स्थित 'सुपरनोवा' को उत्तर भारत के सबसे महत्वाकांक्षी और लग्जरी मिक्स-यूज प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में पेश किया गया था. इस प्रोजेक्ट की नींव मार्च 2011 में रखी गई थी, जब नोएडा प्राधिकरण ने सुपरटेक रियल्टर्स (Supertech Realtors) को करीब 70,002 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की. प्रोजेक्ट को औपचारिक रूप से वर्ष 2012 में लॉन्च किया गया.
Advertisement
इस विशाल प्रोजेक्ट की मुख्य संरचनाओं में उत्तर भारत की सबसे ऊंची 300 मीटर (80 मंजिला) इमारतों में से एक 'स्पायरा' (Spira) टॉवर शामिल है, जिसके साथ नोवा ईस्ट, नोवा वेस्ट और हाइपरनोवा मॉल का निर्माण प्रस्तावित था. बिल्डर ने शुरुआत में खरीदारों से साल 2015-16 तक इन फ्लैट्स और व्यावसायिक स्पेस का पजेशन देने का वादा किया था, लेकिन यह समय-सीमा बीत जाने के वर्षों बाद भी निर्माण अधूरा पड़ा है.
कैसे अटका सपनों का आशियाना?
साल 2012 में शुरू हुए इस निर्माण में 2017-18 तक करीब 60-70% ढांचा खड़ा कर लिया गया, लेकिन इसके बाद वित्तीय कुप्रबंधन और बैंक डिफॉल्ट्स के कारण काम ठप हो गया. दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रोजेक्ट के प्रबंधन को पुनर्जीवित करने के लिए जस्टिस एम.एम. कुमार (रिटायर्ड) की अध्यक्षता में एक 3-सदस्यीय 'एम्पावर्ड कमेटी' का गठन किया था.
होमबायर्स का दर्द और मौजूदा स्थिति
14 साल बीत जाने के बाद भी हजारों खरीदार अपने पजेशन का इंतजार कर रहे हैं. वे एक तरफ बैंक लोन की ईएमआई भर रहे हैं और दूसरी तरफ किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं. कमेटी के गठन के बाद उम्मीद जगी थी कि कोई नया डेवलपर नियुक्त होकर रुके हुए निर्माण को पूरा करेगा, लेकिन हालिया सुनवाई में सामने आए ₹8 करोड़ के प्रशासनिक खर्च और शून्य निर्माण कार्य ने सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ होमबायर्स की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है. कोर्ट ने अब खर्चों के ऑडिट और प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति पर जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं.
Advertisement
यह भी पढ़ें: सुपरटेक सुपरनोवा के खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 497 फ्लैट्स की रजिस्ट्री का रास्ता साफ
---- समाप्त ----
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जान्हवी कपूर की पहचान का उपयोग करने वाले अश्लील सामग्री को हटाने का आदेश दिया

उत्तरा संघ के प्रतिनिधि भी स्वतंत्र रूप से नहीं दे सकते मध्यस्थ पुरस्कार को चुनौती

पूर्व राष्ट्रपति कोविन्द ने आत्मकथा में खोले अपने जीवन के अनुभव और संघर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त साक्ष्य के लिए आवेदन पर निर्णय लेने के लिए मापदंडों की व्याख्या की

पंजाब आपसी सहमति से बीबीएमबी विवाद सुलझाने के करीब

बीबीएमबी शेयर विवाद: पंजाब सरकार सौहार्दपूर्ण समाधान के करीब

सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों को निपटाने के लिए समर्पित दोपहर सुनवाई की संभावना तलाशी

कंपोजिट अपील पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय, एक ही क्यूर दायर करने की अनुमति
ताज़ा ख़बरें
- UP शिक्षक भर्ती विवाद: 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला जल्द ही!
- सीजेपी से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों पर SC ने जवाब मांगा
- सुप्रीम कोर्ट जल्द ही सबरीमाला का फैसला सुना सकता है, अक्टूबर के पहले हफ्ते में हो सकता है निर्णय
- बोधगया मंदिर एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट - सबरीमाला मामले के फ़ैसले की उम्मीद
- स्वतंत्रता दिवस से पहले फिरोजपुर जिला अदालत को बम से उड़ाने की धमकी और खाली करवाया
- ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट: लाइव लॉ द्वारा महत्वपूर्ण न्यायिक अपडेट्स के लिए एक नई सुविधा
- नेताजी की बेटी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने किया नोटिस
- ट्विशा शर्मा केस: सीबीआई ने अदालत में फाइनल रिपोर्ट नहीं पेश की, 17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

