कचहरी रोड पर बुलडोजर से 72 अवैध वकील चैंबरों का ध्वंस
हाई कोर्ट के आदेश पर लखनऊ में कचहरी रोड पर बुलडोजर चलाकर 72 अवैध वकील चैंबरों को तोड़ा गया। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से राहत की आशा की, पर सुनवाई नहीं हुई और नगर निगम तथा पुलिस बल ने कार्रवाई जारी रखी।

सौजन्य से:- Jagran
हाई कोर्ट के निर्देश पर लखनऊ में कचहरी रोड पर चला बुलडोजर, तोड़े जा रहे वकीलों के 72 अवैध चैंबर
Illegal Chambers of Lawywer: 17 मई को 72 अस्थायी कब्जों को हटाया दिया था लेकिन कार्रवाई के दौरान वकीलों का ...और पढ़ें
HighLights
- वकीलों को सुप्रीम कोर्ट के राहत न मिलने पर रविवार को प्रशासन का एक्शन
- पुलिस फोर्स के साथ नगर निगम प्रशासन टीम ने अवैध कब्जों पर कार्रवाई की
जागरण संवाददाता, लखनऊ। हाई कोर्ट के निर्देश पर लखनऊ में रविवार शाम को बुलडोजर एक्शन हुआ। हाई कोर्ट के निर्देश पर 72 अवैध चैंबर व दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया। वकीलों ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण ली, लेकिन वहां इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। शाम को पुलिस फोर्स के साथ नगर निगम प्रशासन टीम ने अवैध कब्जों पर कार्रवाई की।
हाईकोर्ट ने भी इन अवैध निर्माणों को तोड़ने का आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम ने चिंहित 72 अवैध निर्माणों के साथ ही नाले के ऊपर बन गए चैंबरों को नोटिस जारी की थी और उसे वहां पर चस्पा भी कर दिया था। नगर निगम ने पुलिस और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर पर्याप्त मात्रा में पुलिस और पीएसी बल मांगा है।
वीआईपी कार्यक्रम के चलते शाम पांच बजे पुलिस बल की उपलब्धता होने के बाद नगर निगम ने वकीलों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाया। विरोध के बीच यह कार्रवाई जारी रही। वकीलों को सुप्रीम कोर्ट के राहत न मिलने पर रविवार को चैंबर और अन्य अवैध दुकानों पर नगर निगम का बुलडोजर चला है।
कुछ वकीलों की अराजकता से परेशान
अधिवक्ता अनुराधा सिंह, अधिवक्ता देवांशी श्रीवास्तव और देवांशी की माता अरुणिमा श्रीवास्तव ने ही अवैध निर्माणों को हटाने की मांग की थी और उनकी याचिका पर 11 मार्च को हाईकोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने कचहरी रोड से अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया था लेकिन पुलिस बल न मिलने से कार्रवाई नहीं हो सकी थी और नगर निगम ने कोर्ट को बताया था कि पुलिस बल की उपलब्धता न होने की अवैध कब्जों को हटाया नहीं जा सका।
इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई पर जिला प्रशासन को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने के साथ ही 25 मई को कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट भी तलब की थी। याचिकाकताओं ने आरोप लगाया था कि वकीलों के चैंबर अवैध तरह से बनाए गए हैं और उसमें अराजकता होती है।
कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने भारी सुरक्षा बल के बीच 17 मई को 72 अस्थायी कब्जों को हटाया दिया था लेकिन कार्रवाई के दौरान वकीलों का भारी विरोध झेलना पड़ा था और दोपहर में ही कार्रवाई को बंद करना पड़ा था। कार्रवाई के दौरान वकीलों के उग्र रूप को देखते हुए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा था।
कोर्ट में नगर निगम ने की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दी तो चार अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने के मामले में अपना रुख और सख्त अपनाया और शेष 72 चैंबर व दुकानों के कब्जेदारों को अंतिम अवसर देते हुए कहा कि वे स्वेच्छा से अवैध कब्जा खाली करने को कहा था।
यह भी कहा था कि कब्जेदार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपने कब्जे के वैध होने का साक्ष्य प्रस्तुत करें। ऐसा नहीं करने पर संबंधित चैंबरों व दुकानों को ध्वस्त कर दिया जाए। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि कब्जेदारों को भली-भांति पता है कि उनके कब्जे अवैध व अनधिकृत हैं और उन्हें हटाया जाना है, फिर भी न्यायहित में उन्हें एक और अवसर दिया जा रहा है।
इसके बाद नगर निगम ने अवैध कब्जा करने वाले सौ लोगों को 19 अगस्त को नोटिस जारी की थी और उसे वकीलों के अधिकांश चैंबरों पर चस्पा कर दिया गया और तीस अगस्त से पहले अवैध कब्जों को हटाने को कहा गया है। इसमें कोर्ट में जिन 72 अवैध कब्जेदारों की सूची दी गई थी, उनके नाम भी शामिल थे।
इसके अलावा निबंधन कार्यालय के सामने नाले पर हुए अवैध निर्माण भी शामिल थे। दरअसल कोर्ट ने नगर निगम के अधिकारियों से कहा था कि एक सप्ताह के भीतर सभी 72 अतिक्रमणकारियों को दोबारा नोटिस तामील कराया जाए। यदि कोई नोटिस लेने से इनकार करते हैं तो संबंधित अतिक्रमित स्थल पर उसे चस्पा किया जाए। साथ ही नोटिस का प्रकाशन एक हिंदी और एक अंग्रेजी समाचार पत्र में कराया जाए। इसके बाद कब्जेदारों को 10 दिन का समय दिया जाए।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात उच्च न्यायालय के मध्यस्थता सप्ताह ने मांगी: पारदर्शिता, जवाबदेही और अंतिमता की नई कानूनी रूपरेखा

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया

सुप्रीम कोर्ट से वंतारा तक: न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की नई भूमिका में सुरक्षा के सवाल

केन्द्र ने अनिल अंबानी की काले धन याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए स्थानांतरित करने का आग्रह किया

SC जज संदीप मेहता ने CJI को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान HC के जज पर शक्ति दुरुपयोग का आरोप

खुले नाले ने आगरा में मौतें, पर्यावरणविद अदालत की राह पकड़ने को तैयार

CJI सूर्यकांत को जस्टिस मेहता की चौथी चिट्ठी, राजस्थान HC जज पर फिर गंभीर आरोप

भैरूंदा से नेशनल लोक अदालत के प्रचार हेतु जागरूकता वाहन रवाना
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी: निकिता गौड़ ने मध्यस्थों से अधिकतम मामलों के निस्तारण का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट के जज ने सीजीआई को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर दुरुपयोग का आरोप
- मधेपुरा में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, 9500 मामलों के लिए 14 बेंचों के साथ
- सुप्रीम कोर्ट ने TMC के साइनबोर्ड हटाने के मामले में दखल से इनकार, हाई कोर्ट में सुनवाई जारी
- डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनेताओं की तुरन्त हिरासत की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा बयान
- राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए अधिवक्ताओं से सहयोग का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट की नई मासिक व्याख्यान श्रृंखला: कानून, न्याय और शिक्षा का सतत मंच
- शेरघाटी में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता मोहीम शुरू

