सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को 6 महीने की सजा पर रोक, तुरंत रिहा किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देती याचिका पर उत्तर मांगा और गुलशन पाहुजा के खिलाफ न्यायिक अवमानना की सजा पर रोक लगा दी। इस आदेश के बाद वह तुरंत हिरासत से रिहा हो गया, जबकि हाईकोर्ट ने उनके अपमानजनक बयानों को लेकर 6 महीने की कैद और जुर्माना सुनाया था।

सौजन्य से:- Navbharat Times
पाहुजा की ओर से अधिवक्ता मनीष ने पीठ के समक्ष दलीलें रखीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा और सजा के अमल पर रोक लगा दी। दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की थी। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने मई में पाहुजा को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा था कि उन्होंने अपने कृत्य पर “कोई पछतावा” नहीं दिखाया और अपने रवैये में सुधार का भी कोई संकेत नहीं दिया।
सजा पर सुनवाई में न्यायपालिका पर की टिप्पणी
- हाईकोर्ट ने कहा था कि सजा पर सुनवाई के दौरान भी पाहुजा ने न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
- उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें भारतीय अदालतों से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने न्यायालयों की कथित मनमानी की तुलना “तानाशाही” से भी की थी।
- पाहुजा ने कहा था कि भारतीय न्यायिक व्यवस्था से उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है और अदालतों की मनमर्जी बढ़ती जा रही है।
- उन्होंने यह भी कहा था कि मनमर्जी का दूसरा अर्थ तानाशाही होता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पाहुजा की तत्काल रिहाई
- हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अवमाननाकर्ता ने अपने कृत्य पर कोई खेद नहीं जताया।
- इसके बजाय उन्होंने अदालत के समक्ष आगे भी आपत्तिजनक दलीलें देकर अपनी अवमानना को और गंभीर किया।
- अदालत ने यह भी कहा था कि पर्याप्त सजा नहीं दिए जाने से भविष्य में इस तरह के कृत्यों को दोहराने का उनका हौसला बढ़ सकता है।
- इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रत्येक अवमानना मामले में छह महीने की अधिकतम साधारण कैद और 2,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
- हालांकि, सभी सजाएं साथ-साथ चलने का निर्देश दिया गया था। पाहुजा ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देने की इच्छा जताई थी।
- इसके मद्देनजर हाईकोर्ट ने न्यायालय की अवमानना अधिनियम की धारा 19(3) के तहत सजा पर 60 दिनों के लिए रोक लगा दी थी।
- अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पाहुजा को तत्काल हिरासत से रिहा किया जाएगा।
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