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बिहार सरकार को हाईकोर्ट ने 2.15 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया, शराबबंदी कानून की खामोशी

बिहार सरकार को हाईकोर्ट ने 2.15 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद बिहार सरकार को एक याचिका कर्ता को दो लाख रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए देने होंगे।

27 जून 2026 को 01:23 am बजे
बिहार सरकार को हाईकोर्ट ने 2.15 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया, शराबबंदी कानून की खामोशी

सौजन्य से:- Live Hindustan

शराबबंदी कानून के पेच में खुद फंस गई बिहार सरकार, हाईकोर्ट ने लगाया 2.15 लाख का हर्जाना

गोपालगंज में शराब की बरामदगी के बिना केवल संदेह के आधार पर एक ट्रक जब्त किए जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार पर दो लाख 15 हजार का हर्जाना लगाया है।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को 2.15 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। मामला शराबबंदी कानून के दुरुपयोग का है। गोपालगंज में शराब की बरामदगी के बिना केवल संदेह के आधार पर एक ट्रक जब्त कर गाड़ी के मालिक और ड्राइवर को परेशान किया गया था। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने राजेश कुमार यादव की रिट याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट से ट्रक में हुई खराबी ठीक कराने का भी निर्देश दिया है।

मामले के अनुसार गोपालगंज थाने के तत्कालीन दरोगा सतेंद्र कुमार राय ने शराबबंदी कानून के तहत ट्रक जब्त कर प्राथमिकी दर्ज की थी। हालांकि ट्रक से कोई शराब बरामद नहीं हुई थी। दरोगा का कहना था कि ट्रक के केबिन से शराब जैसी गंध आ रही थी। हाईकोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को याचिकाकर्ता राजेश यादव को दो लाख रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के लिए 15 हजार रुपये देने का आदेश दिया।

इसके अलावे कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि ट्रक में कोई टूट-फूट या यांत्रिक खराबी पाई जाती है तो उसकी मरम्मत का पूरा खर्च भी याचिकाकर्ता को दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी राशि की वसूली मामले के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों से की जाए।

शराबबंदी कानून की जानकारी बिना ही की कार्रवाई

सुनवाई के दौरान जब खंडपीठ ने दरोगा सतेंद्र कुमार राय से शराबबंदी कानून के प्रावधानों के बारे में पूछा तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने संबंधित कानून के प्रावधानों का अध्ययन ही नहीं किया है। इस पर खंडपीठ ने आश्चर्य जताते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक से कहा कि जिस दरोगा ने अपने जवाबी हलफनामे में 40 शराबबंदी मामलों की जांच करने का दावा किया है, उसने कानून के प्रावधानों को पढ़ा तक नहीं है। इस पर गोपालगंज के एसपी ने अदालत को आश्वस्त किया कि मामले में शामिल गैर-जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्ण शराबबंदी कानून लागू किया है जिसके तहत राज्य की सीमा में शराब का निर्माण, भंडारण, परिवहन, सेवन, बेचना सब प्रतिबंधित हैं। अब तक लाखों लोग इस कानून का उल्लंघन करने पर जेल जा चुके हैं। लाखों लोगों पर केस दर्ज है और लाखों की संख्या में गाड़ियां जब्त की जा चुकी हैं। हालांकि, राज्य में अभी भी चोरी छिपे शराब बेचने का कारोबार जारी है।

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लेखक के बारे में

Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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