छत्तीसगढ़ का मतांतरण विरोधी कानून राज्यपाल की मंजूरी के बावजूद लागू नहीं हो सका
छत्तीसगढ़ में नए धर्म-स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को राज्यपाल ने अपनी मुहर लगाने के बाद भी यह कानून लागू नहीं हो सका है। अभी इसके लागू तक एक प्रशासनिक नियमों से उलझना मामला है।

सौजन्य से:- Jagran
नियमों में उलझा छत्तीसगढ़ का मतांतरण विरोधी कानून, आठ अप्रैल को राज्यपाल ने किए थे विधेयक पर हस्ताक्षर
छत्तीसगढ़ में नए धर्म-स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर राज्यपाल रमेन डेका की मुहर लगने के बाद भी यह कानून लागू नहीं हो सका है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय ...और पढ़ें
HighLights
- कांग्रेस बोली दो माह बाद भी कानून लागू न हो पाना सरकार की विफलता
- राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब प्रशासनिक नियमों के फेर में फंसा कानून
जेएनएन, रायपुर। छत्तीसगढ़ में नए धर्म-स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर राज्यपाल रमेन डेका की मुहर लगने के बाद भी यह कानून लागू नहीं हो सका है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक विनिमय की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यथाशीघ्र इसे लागू कर दिया जाएगा।
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि दो माह बाद भी कानून लागू न हो पाना सरकार की विफलता है। बता दें कि यह विधेयक 19 मार्च 2026 को विधानसभा में पारित हुआ था और इसके बाद आठ अप्रैल को राज्यपाल ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 के अनुसार, दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा अवैध सामूहिक मतांतरण कराने पर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकेगी।
विधेयक में नाबालिग, महिलाएं, मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के मामलों में 20 साल तक की कैद का प्रविधान है। सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।
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