गवाहों के बयान उलटने से चार साल बाद चरस मामले में आरोपी को मिली रिहाई
किन्नौर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सबूतों की कमी के कारण राजकुमार को बरी कर दिया। दोनों स्वतंत्र गवाहों ने अदालत में अपने पहले के बयान वापस ले लिए, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हो गया और पुलिस की गवाही पर भी संदेह उत्पन्न हुआ। परिणामस्वरूप, लगभग चार साल जेल में बंद रहे आरोपी को मुक़्त किया गया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
अदालत में मुकर गए गवाह, चरस तस्करी मामले में आरोपी को कोर्ट ने किया बरी, 4 साल से था जेल में बंद
6 किलो 24 ग्राम चरस बरामदगी मामले में जेल में बंद आरोपी को कोर्ट से मिली राहत.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 15, 2026 at 6:09 PM IST
रामपुर बुशहर: अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर स्थित रामपुर की अदालत ने NDPS एक्ट से जुड़े करीब चार वर्ष पुराने मामले में आरोपी राजकुमार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. अदालत के समक्ष मामले के दोनों स्वतंत्र गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, जिसके बाद अभियोजन पक्ष की कहानी पर सवाल खड़े हुए. अदालत ने पुलिस की गवाही पर भी संदेह व्यक्त किया.
मामला 2 मई 2022 का है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस ने कुटवा नामक स्थान पर आरोपी राजकुमार, निवासी गांव कुटवा, तहसील आनी, जिला कुल्लू को कथित तौर पर 6 किलो 24 ग्राम चरस के साथ पकड़ा था. पुलिस के मुताबिक बरामदगी की कार्रवाई स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में की गई थी.
अदालत में मुकर गए स्वतंत्र गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान जब दोनों स्वतंत्र गवाह अदालत में पेश हुए तो वे अभियोजन पक्ष के समर्थन में नहीं आए और अपने पूर्व बयानों से मुकर गए. स्वतंत्र गवाहों के बयान बदलने के बाद अभियोजन पक्ष के लिए बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को मजबूती से साबित करना मुश्किल हो गया.
अभियोजन की कहानी पर अदालत ने जताया संदेह
अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद पुलिस की गवाही पर भी संदेह व्यक्त किया. अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ऐसा ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित किया जा सके.
चरस बरामदगी मामले में आरोपी बरी
इसके आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी राजकुमार को सबूतों के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया. बताया गया कि आरोपी करीब चार वर्षों से जेल में था. अदालत के इस फैसले के बाद उसे बड़ी राहत मिली है. अदालत का फैसला अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को पर्याप्त एवं विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित न कर पाने पर आधारित रहा. इस मामले की जानकारी उप जिला न्यायवादी कमल चन्देल ने 15 सितंबर को जारी प्रेस नोट के माध्यम से दी.
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