सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के मेल‑बैलट योजना को खारिज, मिड‑टर्म चुनाव में नहीं होगा लागू
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रम्प के देशव्यापी मेल बैलेट प्रक्रिया बदलने के प्रस्ताव को रोक दिया, जिससे इस साल के मिड‑टर्म चुनाव में नया मेल‑इन वोटिंग नियम लागू नहीं होगा। चुनाव अधिकारियों ने इस कदम के संभावित नकारात्मक प्रभावों की चेतावनी दी थी, जबकि दो कंज़र्वेटिव जजों ने फैसले की आलोचना की।

सौजन्य से:- Jagran
ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका, मिड-टर्म इलेक्शन में नहीं लागू होगा मेल-इन वोटिंग रूल
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनल्ड ट्रंप के देशभर के वोटरों को मेल बैलेट भेजने के तरीके को बदलने के प्लान को खारिज कर दिया है।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के मेल बैलेट नियम बदलने का प्रस्ताव खारिज किया।
- मिडटर्म इलेक्शन में मेल-इन वोटिंग के नए नियम लागू नहीं होंगे।
- चुनाव अधिकारियों ने इस प्रस्ताव के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को US सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। ट्रंप ने देशभर के वोटरों को मेल बैलेट (Mail Ballot) भेजने के तरीके को बदलने की बात कही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस प्लान को खारिज कर दिया है।
चुनाव अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर इस साल के मिडटर्म इलेक्शन में इसे लागू किया जाता, तो इसके बहुत बुरे नतीजे हो सकते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के फैसले पर लगाई रोक
कोर्ट के सामने आए सबसे अहम मामलों में से एक में ज्यादातर जजों ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी, जिससे US पोस्टल सर्विस को लाखों मेल बैलेट रोकने की अभूतपूर्व शक्ति मिल जाती।
यहां तक कि GOP के कुछ चुनाव अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि इस प्रस्ताव से अफरा-तफरी मच सकती है और बड़ी संख्या में लोग वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
अमेरिकी कोर्ट का यह फैसला राष्ट्रपति के लिए एक बड़ा झटका है, जो सालों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के झूठे आरोप लगाकर मेल वोटिंग का विरोध करते रहे हैं, जबकि खुद भी मेल से वोट करते रहे हैं।
कोर्ट ने कहा, 'प्रशासन के अपनी चुनौती के आधार पर सफल होने की संभावना कम है।' लेकिन उन्होंने अपने तीन वाक्यों वाले, बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया। कंजर्वेटिव जज सैमुअल एलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने इस फैसले से असहमति जताई।
प्रशासन ने अपने प्रस्ताव को पोस्टल नियमों में एक मामूली बदलाव के तौर पर पेश किया था, जिसका मकसद कथित धोखाधड़ी से बचाव करना था। हालांकि, ट्रंप के आलोचकों ने इस कदम को असंवैधानिक तरीके से शक्ति हथियाने की कोशिश बताया, जिसे लागू करने के लिए US पोस्टल सर्विस पूरी तरह तैयार भी नहीं थी।
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