मेड़ता में तीसरी लोक अदालत कल: 9 बेंचों के साथ प्रकरणों का निस्तारण
राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, मेड़ता न्यायालय परिसर में कल तीसरी लोक अदालत का आयोजन होगा, जिसमें 3 बेंचों के साथ जिले में कुल 9 बेंचों का गठन किया गया है। प्रकरणों का निस्तारण राजीनामे के माध्यम से आपसी सहमति से किया जाएगा, जिससे पक्षकारों को त्वरित, सरल और कम लागत पर न्याय मिलेगा।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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मेड़ता में तीसरी लोक अदालत कल, 3 बेंच गठित:राजीनामे के जरिए प्रकरणों का होगा निस्तारण, तैयारियां पूरी
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वर्ष 2026 की तीसरी लोक अदालत कल यानी शनिवार को होगी। राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार सुबह 10 बजे से मेड़ता न्यायालय परिसर सहित जिले के संबंधित ताल्लुकाओं में राजीनामे के जरिए अलग-अलग श्रेणी के प्रकरणों के निस्तारण के प्रयास किए जाएंगे।
जिले में 9 और मेड़ता में 3 बेंच गठित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष और जिला एवं सेशन न्यायाधीश अतुल कुमार सक्सेना ने बताया- लोक अदालत में अधिकाधिक प्रकरणों के निस्तारण के लिए जिले में 9 बेंचों का गठन किया गया है। इनमें मेड़ता मुख्यालय पर 3, नागौर में 2, जायल में 2, डेगाना और खींवसर में 1-1 बेंच गठित की गई है।
आपसी सहमति और समझौते से होगा निस्तारण मेड़ता मुख्यालय पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीप्ति श्रीवास्तव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव संजय कुमार मालवीय और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनीता के नेतृत्व में राजीनामा योग्य प्रकरणों का आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर निस्तारण किया जाएगा।
प्राधिकरण सचिव मालवीय ने बताया कि जिन पक्षकारों के प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं या फिर ऐसे विवाद हैं जो लोक अदालत में राजीनामा योग्य हैं, वे आपसी सहमति एवं समझौते के माध्यम से अपने प्रकरण का शीघ्र निस्तारण करवाने के लिए लोक अदालत का लाभ उठाएं।
इन प्रकरणों का होगा निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा योग्य लंबित प्रकरणों तथा प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का आपसी सहमति से निस्तारण किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से बैंक ऋण एवं वित्तीय विवाद, चेक अनादरण के प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, विद्युत एवं जल आपूर्ति संबंधी प्रकरण, भूमि एवं संपत्ति से संबंधित राजीनामा योग्य विवाद, दीवानी प्रकरण तथा अन्य राजीनामा योग्य प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा।
प्राधिकरण सचिव मालवीय ने बताया कि लोक अदालत में प्रकरणों के निस्तारण से पक्षकारों को त्वरित, सरल, सुलभ एवं कम खर्च में न्याय प्राप्त हो सकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में कोई अतिरिक्त न्यायालय शुल्क नहीं लगता। लंबित प्रकरण के लोक अदालत के माध्यम से निस्तारण पर नियमानुसार पूर्व में जमा न्यायालय शुल्क की वापसी का भी प्रावधान है।
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