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मद्रास हाई कोर्ट ने धोनी के बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग और न्यायिक निरीक्षण की मांग को मंजूर किया

मद्रास हाई कोर्ट ने जी संपत कुमार की तीन माँगें स्वीकार कर लीं, जिसमें एमएस धोनी का बयान न्यायिक अधिकारी की देखरेख में, बिना संपादन के वीडियो रिकॉर्डिंग और कोर्ट या सरकारी इमारत में करवाना शामिल है। इस फैसले के साथ धोनी को अपना प्रतिवादी‑एफिडेविट दाखिल करने का अवसर भी दिया गया। यह 100 करोड़ रुपये के मानहानि दावे से संबंधित है, जो 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी स्कैंडल को लेकर दायर किया गया था।

2 सितंबर 2026 को 05:33 am बजे
मद्रास हाई कोर्ट ने धोनी के बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग और न्यायिक निरीक्षण की मांग को मंजूर किया

सौजन्य से:- ABP News

एमएस धोनी मानहानि केस में सामने आई 3 नई मांग, मद्रास हाई कोर्ट ने क्या कहा

एमएस धोनी से जुड़े मानहानि केस में मद्रास हाई कोर्ट ने धोनी का बयान रिकॉर्ड करवाने और जी संपत कुमार की बाकी आवेदनों को स्वीकार कर लिया है.

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से जुड़े 100 करोड़ रुपये के मानहानि केस में ताजा अपडेट सामने आया. दरअसल धोनी ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी संपत कुमार समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ उन्हें 2013 IPL सट्टेबाजी स्कैंडल से जोड़ने के लिए मानहानि का केस दर्ज करवाया था. जी संपत कुमार ने इस मामले में धोनी के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की थी, उनकी इस अर्जी को अदालत ने नंबर दिया.

जी संपत कुमार के वकीलों ने तर्क सामने रखा कि सुप्रीम कोर्ट में कुछ इसी तरह का एक मामला था, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को देखते हुए उनका आवेदन स्वीकार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की जांच के बाद जस्टिस के गोविंदराजन थिलकवादी ने सहमति दिखाई और संपत कुमार की अर्जियों को मंजूरी प्रदान की.

जज ने यह भी कहा कि इन आवेदनों को नंबर दिए जाने के बाद एमएस धोनी को भी इसके काउंटर में एफिडेविट फाइल करने का मौका दिया जाएगा.

जी संपत कुमार की मांगें

2013 IPL सट्टेबाजी स्कैंडल की जांच के मुख्य अधिकारियों में से एक जी संपत कुमार की मांगें:

पहली मांग- एमएस धोनी का बयान दर्ज करवाने की प्रक्रिया की निगरानी हेतु एक ज्यूडिशियल ऑफिसर (न्यायिक अधिकारी) नियुक्त किया जाए.

दूसरी मांग- पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए. बिना एडिट की हुई वीडियो रिकॉर्डिंग की कॉपी उन्हें और कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी कॉ भी दी जाए.

तीसरी मांग- धोनी का बयान कोर्ट परिसर या फिर किसी सरकारी बिल्डिंग में ही करवाया जाए. चूंकि वह (धोनी) एक क्रिकेटर हैं, उनका बयान किसी फाइव-स्टार होटल या किसी बंग्ले में रिकॉर्ड नहीं करवाया जाना चाहिए.

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फिलहाल मद्रास हाई कोर्ट ने इन तीनों अर्जियों को मंजूरी प्रदान की है. हालांकि धोनी को भी अपनी तरफ से काउंटर एफिडेविट फाइल करने का अवसर दिया जाएगा.

पिछले साल 11 अगस्त को जस्टिस सीवी कार्तिकेयन ने ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था. उस समय अदालत ने वकील जी जयश्री को एमएस धोनी का बयान दर्ज करने के लिए कमिश्नर के तौर पर नियुक्त किया था, लेकिन जी संपत कुमार ने इस फैसले का विरोध किया था. विरोध के लिए संपत कुमार ने याचिका दायर की थी, लेकिन जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और मोहम्मद शफीक की डिवीजन बेंच ने पिछले साल 4 नवंबर को उनकी अपील को खारिज कर दिया था.

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