इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी: 'तारीख पर तारीख' नहीं हो सकता न्यायपालिका का आधार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक 25 साल पुराने अपहरण के मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्याय को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता, और यह मामला अदालती औपचारिकता का हिस्सा बन गया था. अदालत ने दो आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी.

सौजन्य से:- ndtv.in
एक शख्स पर 25 साल पहले युवती के अपहरण का आरोप लगा था. आज दोनों पति पत्नी हैं और उनके तीन बच्चे हैं. लेकिन किडनैपिंग का वह ढाई दशक पुराना केस अब भी चल रहा है. यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को पहुंचा तो अदालत ने हैरानी जताई और कहा कि 'तारीख पर तारीख' वाला जुमला अदालत के कामकाज की पहचान नहीं बन सकता. मामला यह था कि आरोपी और पीड़िता ने शादी कर ली थी और अब उनके तीन बच्चे हैं. सभी लोग खुशी से जीवनयापन कर रहे हैं. 'तारीख पर तारीख' दामिनी मूवी का मशहूर डायलॉग है, जो वकील के रोल में एक्टिंग कर रहे सनी देओल ने बोला था.
इस फिल्म में मीनाक्षी शेषाद्री पीड़िता के रूप में दिखाई जाती हैं और उनका ही पक्ष रखते हुए सनी देओल ने यह डायलॉग बोला था. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बहराइच की ट्रायल कोर्ट में लगातार टलती सुनवाई को लेकर तंज कसा. अदालत ने कहा कि किसी मामले को दो दशक से ज्यादा तक लंबित रखना संविधान के उस मूल अधिकार का उल्लंघन है, जिसमें नागरिकों को कानून के सामने समान अवसर की गारंटी दी गई है. बेंच ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है. इसके साथ ही अदालत ने दो आरोपियों को अग्रिम जमानत भी दे दी.
इस मामले में 2001 में बहराइच के पयागपुर पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था. जस्टिस राजीव भारती ने इस मामले में आरोपियों अजय कुमार और रामचंद्र की बेल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. अदालत में सुनवाई के दौरान जस्टिस भारती को बताया गया कि केस में जिसे पीड़िता बताया गया है, वह खुद ही अजय कुमार के साथ गई थी. फिर दोनों ने शादी कर ली थी और अब दोनों पति और पत्नी के तौर पर खुश हैं. दोनों के तीन बच्चे भी हैं.
हाई कोर्ट बोला- अदालत में चल रही थी तारीख की औपचारिकता
इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि सालों तक इस मामले में सही से कार्रवाई नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि यह मामला तो ऐसा लग रहा है कि जैसे अदालत में तारीख देने की औपचारिकता ही चल रही थी. उन्होंने कहा कि न्याय के अनंतकाल तक के लिए टाला नहीं जा सकता. न्याय जनता का अधिकार है और वह समय रहते ही मिलना चाहिए. इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को आदेश दिया कि वे ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करें और फिर वहां से उन्हें अग्रिम जमानत पर ही रिहा किया जाएगा.
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