हाईकोर्ट के फैसलेः 22 गोदाम से बी टू बाईपास के 310 अतिक्रमणों को तीन माह में हटाए जेडीए, पुराने कानून के तहत कार्रवाई पर रोक
हाईकोर्ट के फैसलेः 22 गोदाम से बी टू बाईपास के 310 अतिक्रमणों को तीन माह में हटाए जेडीए, पुराने कानून के तहत कार्रवाई पर रोक राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमण व खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई की. Published : August…

सौजन्य से:- ETV Bharat
हाईकोर्ट के फैसलेः 22 गोदाम से बी टू बाईपास के 310 अतिक्रमणों को तीन माह में हटाए जेडीए, पुराने कानून के तहत कार्रवाई पर रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमण व खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई की.
Published : August 24, 2026 at 8:20 PM IST
जयपुरः राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए को कहा है कि वह 22 गोदाम से महेश नगर फाटक और गोपालपुरा बाईपास होते हुए बी टू बाईपास तक रोड की जद में आने वाले 310 अतिक्रमणों को तीन माह में हटाए. इसके साथ ही अदालत ने जेडीए सचिव को 25 नवंबर को पालना रिपोर्ट के साथ अदालत में हाजिर होने को कहा है.
जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश सीताराम देवंदा व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए. अदालत ने जेडीए को कहा है कि विचाराधीन सड़क पर मौजूद सभी अतिक्रमण चाहे वे निजी व्यक्तियों ने किए हों या किसी वैधानिक प्राधिकरण ने, उन्हें पन्द्रह दिन का नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका दें और उसके बाद सख्ती से कार्रवाई करें.
सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुडी ने अदालत में शपथ पत्र पेश किया. जिसमें कहा गया कि रोड की निर्धारित चौडाई 22 गोदाम से महेश नगर फाटक तक 40 फीट, महेश नगर फाटक से गोपालपुरा बाईपास तक 60 फीट और गोपालपुरा बाईपास से बी टू बाईपास तक 80 फीट है. शपथ पत्र में कहा गया कि सड़क के इन हिस्सों में करीब 310 अतिक्रमण मौजूद हैं. मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए जेडीए ने अदालत से चार माह का समय मांगा. वहीं, अदालत के सामने आया कि इस रोड के कुछ हिस्से पर रेलवे ने भी अतिक्रमण कर रखा है. इस पर अदालत ने जेडीए को तीन माह का समय देते हुए यहां से अतिक्रमण हटाने को कहा है.
नहीं हो सकती कार्रवाईः राजस्थान हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामले में कहा है कि जब खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के स्थान पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 अस्तित्व में आ चुका है तो पुराने कानून के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती. साथ ही अदालत ने मामले में की गई कार्रवाई और निचली अदालत की ओर से लिए गए प्रसंज्ञान आदेश को रद्द दिया है. अदालत ने कहा है कि संबंधित प्राधिकारी नए कानून के तहत उचित कानूनी कार्रवाई दोबारा शुरू करने के लिए स्वतंत्र हैं. अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश बनवारी लाल गुप्ता और शशि गुप्ता की आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.
याचिका में अधिवक्ता मयंक गुप्ता ने अदालत को बताया कि खाद्य निरीक्षक ने जून, 2011 को याचिकाकर्ता की फर्म से खाद्य सामग्री के नमूने लिए थे. वहीं, पब्लिक एनालिस्ट की रिपोर्ट के बाद अगस्त और अक्टूबर, 2011 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जयपुर ने विभाग की ओर से खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 के तहत पेश परिवाद पर प्रसंज्ञान ले लिया. इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 97 को जुलाई, 2010 में अधिसूचित कर दिया था.
इसके बाद साल 1954 का पुराना कानून अस्तित्वहीन हो गया था. ऐसे में जब याचिकाकर्ता की फर्म से सेंपल लिए गए, तब पुराना कानून प्रभावी ही नहीं था. ऐसे में पुराने कानून के तहत प्रसंज्ञान लेना भी पूरी तरह से गलत है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम-9 के समक्ष लंबित शिकायत को रद्द किया जाए. इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि नया कानून आने के तीन साल के भीतर निचली अदालत प्रसंज्ञान ले सकती हैं. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने निचली अदालत के समक्ष चल रही कार्रवाई को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को छूट दी है कि वह नए कानून के तहत उचित कानूनी कार्रवाई दोबारा शुरू कर सकते हैं.
जेल परिसर में निजी कैंटीन संचालन पर मांगा जवाबः राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय कारागार परिसर में निजी कैंटीन संचालन को लेकर राज्य सरकार, जेल प्रशासन और जिला कलेक्टर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश बबली शर्मा की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.
याचिका में अधिवक्ता सुप्रिया सक्सेना ने अदालत को बताया कि केंद्रीय कारागार परिसर में बिना तय प्रक्रिया अपनाए कैंटीन खोली गई है. इसके लिए तय टेंडर प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई. इसके अलावा यहां कैदियों के परिजनों के लिए तंबाकू उत्पादों की खुलेआम बिक्री हो रही है. जेल नियम, 2022 के तहत जेल के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है. याचिका में कहा गया कि सरकार ने जेलों के कैदियों की ओर से निर्मित सामानों की बिक्री के लिए आशाएं कैंटीन आरंभ की थी, लेकिन इस कैंटीन में कैदियों की ओर से निर्मित किसी भी सामान की बिक्री नहीं हो रही है.
याचिका में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए सरकारी और उच्च सुरक्षा वाले इस परिसर में निजी व्यावसायिक गतिविधि संचालित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. याचिका में कहा गया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कैंटीन संचालन को लेकर विरोधाभासी जवाब मिले हैं. एक जवाब में इसके लिए अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही गई, लेकिन अन्य जवाबों में इसे ट्रायल के तौर पर नियमानुसार संचालित करना बताया गया है. याचिका में गुहार की गई है कि कैंटीन संचालन को लेकर समस्त रिकॉर्ड मंगाया जाए और प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने के साथ ही भविष्य में जेल परिसरों में व्यावसायिक सुविधाओं के संचालन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की गुहार की गई है. इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात उच्च न्यायालय के मध्यस्थता सप्ताह ने मांगी: पारदर्शिता, जवाबदेही और अंतिमता की नई कानूनी रूपरेखा

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया

सुप्रीम कोर्ट से वंतारा तक: न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की नई भूमिका में सुरक्षा के सवाल

केन्द्र ने अनिल अंबानी की काले धन याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए स्थानांतरित करने का आग्रह किया

SC जज संदीप मेहता ने CJI को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान HC के जज पर शक्ति दुरुपयोग का आरोप

खुले नाले ने आगरा में मौतें, पर्यावरणविद अदालत की राह पकड़ने को तैयार

CJI सूर्यकांत को जस्टिस मेहता की चौथी चिट्ठी, राजस्थान HC जज पर फिर गंभीर आरोप

भैरूंदा से नेशनल लोक अदालत के प्रचार हेतु जागरूकता वाहन रवाना
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी: निकिता गौड़ ने मध्यस्थों से अधिकतम मामलों के निस्तारण का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट के जज ने सीजीआई को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर दुरुपयोग का आरोप
- मधेपुरा में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, 9500 मामलों के लिए 14 बेंचों के साथ
- सुप्रीम कोर्ट ने TMC के साइनबोर्ड हटाने के मामले में दखल से इनकार, हाई कोर्ट में सुनवाई जारी
- डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनेताओं की तुरन्त हिरासत की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा बयान
- राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए अधिवक्ताओं से सहयोग का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट की नई मासिक व्याख्यान श्रृंखला: कानून, न्याय और शिक्षा का सतत मंच
- शेरघाटी में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता मोहीम शुरू

