सोनम रघुवंशी को फिर से जेल में क्यों हो सकती है? सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट ने 2 विकल्प दिए हैं, या तो वह ज़मानत रद्द करने की मांग पर केस के तथ्यों के आधार फैसला लेगा या सोनम सरेंडर करेगी और ट्रायल कोर्ट में गवाहों के परीक्षण के बाद ज़मानत की अर्जी देगी.

सौजन्य से:- ABP News
मेघालय का हनीमून मर्डर केस: दोबारा जेल जा सकती है सोनम रघुवंशी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए 2 ऑप्शन
मेघालय के हनीमून मर्डर केस की आरोपी सोनम पर दोबारा जेल जाने का खतरा मंडराने लगा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सोनम सरेंडर करती है तो वह निचली अदालत को गवाहों के तेज़ी से परीक्षण के लिए कहेगा.
मेघालय के हनीमून मर्डर केस की आरोपी सोनम पर दोबारा जेल जाने का खतरा मंडराने लगा है. अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की आरोपी सोनम को सुप्रीम कोर्ट ने 2 विकल्प दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि या तो वह ज़मानत रद्द करने की मांग पर केस के तथ्यों के आधार फैसला लेगा या सोनम सरेंडर करे. ट्रायल कोर्ट में गवाहों के परीक्षण के बाद ज़मानत की अर्जी दे.
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने सोनम के वकील को अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर जवाब देने को कहा है. गुरुवार, 23 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई होगी. कोर्ट ने मेघालय पुलिस की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सवाल किए जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने की मांग की गई है.
इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम से हुई थी. दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए. वहां चेरापूंजी में राजा लापता हो गए. बाद में उनकी लाश एक गहरी खाई से बरामद हुई. पुलिस ने जांच के बाद सोनम रघुवंशी उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और दूसरे सहयोगियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया. जून 2025 में उत्तर प्रदेश से सोनम को गिरफ्तार किया गया.
सोनम को कैसे मिली जमानत?
गिरफ्तारी के समय लापरवाही से तैयार किया गया अरेस्ट मेमो सोनम की ज़मानत का आधार बन गया. पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी में हत्या के लिए लगने वाली बीएनएस की धारा 103 की जगह धारा 403 लिख दिया गया, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा ही नहीं है. निचली अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को सोनम को सशर्त जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी का सही कारण न बताना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का सीधा उल्लंघन है. 29 जून को हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत का आदेश बरकरार रखा.
सॉलिसिटर जनरल की दलील
3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस की याचिका पर नोटिस जारी किया था. मंगलवार, 21 जुलाई को पुलिस की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विस्तृत बहस की. उन्होंने कहा कि सोनम लंबे समय तक फरार रही. उसने अपने सहयोगियों के कहने पर खुद सरेंडर किया. उसे पता था कि वह क्यों फरार है और क्यों सरेंडर कर रही है. उसकी गिरफ्तारी के समय पुलिस की तरफ से भी इसकी जानकारी दी गई. बाद में मजिस्ट्रेट ने भी गिरफ्तारी का आधार बताया. ऐसे में मानवीय भूल से अरेस्ट मेमो में एक धारा का गलत उल्लेख ज़मानत का आधार नहीं हो सकता.
कोर्ट ने क्या कहा?
जज इस बात से सहमत नज़र आए कि सोनम को गिरफ्तारी का कारण पता था. ऐसे में उसकी ज़मानत का आधार यह नहीं हो सकता कि उन्हें बिना कारण बताए गिरफ्तार किया गया. जब सोनम के वकील जिरह के लिए उठे तो जजों ने कहा कि वह मेरिट (केस के तथ्यों) के आधार पर जमानत पर फैसला लेंगे. अगर वह ऐसा नहीं चाहते तो फिलहाल सरेंडर करें और मामले में गवाही पूर्ण होने के बाद ज़मानत की मांग करें. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सोनम सरेंडर करती है तो वह निचली अदालत को गवाहों के तेज़ी से परीक्षण के लिए कहेगा.
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