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वक्फ संशोधन कानून पर कांग्रेस के रुख से नाराज आई. यू. एम. एल., मुस्लिम संगठन भी सतीशन सरकार का विरोध कर रहे हैं

केरल में वीडी सतीशन की कांग्रेस सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने का फैसला किया है, जिसके खिलाफ आई. यू. एम. एल. ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के एजेंडे को लागू करने में मदद करने का आरोप लगाया गया है।

21 जुलाई 2026 को 04:13 pm बजे
वक्फ संशोधन कानून पर कांग्रेस के रुख से नाराज आई. यू. एम. एल., मुस्लिम संगठन भी सतीशन सरकार का विरोध कर रहे हैं

सौजन्य से:- जनसत्ता

वक्फ लॉ केरल: केंद्र सरकार के के वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के तहत केरल की वीडी सतीशन की कांग्रेस सरकार ने केरल राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने के फैसलों ने उसके गठबंधन के साथी आई. यू. एम. एल. को दुविधा में डाल दिया है। आईयूएमएल ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

वक्फ कानून के खिलाफ अब कांग्रेस को भी सामुदायिक संगठनों और विपक्षी सीपीआई (एम) आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। दोनों ने ही पार्टी पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के एजेंडे को लागू करने में मदद करने का आरोप लगाया है।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

पिछले हफ्ते केरल हाई कोर्ट ने राज्य वक्फ बोर्ड को बिना उसकी अनुमति के कोई भी बड़ा निर्णय न लेने का निर्देश दिया। कोर्ट में वीडी सतीशन सरकार का पक्ष रख रहे एडवोकेट जनरल जाजू बाबू ने अदालत को सूचित किया कि संशोधित कानून की धारा 14 के आदेश का कड़ाई से पालन करते हुए बोर्ड का पुनर्गठन करने की आवश्यकता है।

एक हलफनामे में राज्य वक्फ बोर्ड ने कहा, “सरकार एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास (यूएमईईडी) अधिनियम, 1995 की धारा 14 के जनादेश का सख्ती से अनुपालन करते हुए बोर्ड का पुनर्गठन करने के लिए तैयार है।” मंगलवार को केरल उच्च न्यायालय के निर्देश के खिलाफ राज्य वक्फ बोर्ड की अपील पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट उच्च न्यायालय के आदेश के उस हिस्से को रद्द कर दिया, जिसमें बोर्ड के दैनिक संचालन का जिम्मा एक संयुक्त सचिव को सौंपा गया था।

बीजेपी भी कर रही है फैसले का समर्थन

जब बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने संशोधित वक्फ कानून लागू किया जिसमें राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुसलमानों को शामिल करने के प्रावधानों सहित कई सुधार किए गए, तो बीजेपी के अलावा सभी सरकारों ने इन बदलावों का विरोध किया था। केरल में विधानसभा ने भी संशोधनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। आईयूएमएल और यूडीएफ के लिए और भी असहजता वाली बात यह भी है कि राज्य सरकार ने बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज द्वारा दायर याचिका सहित कई याचिकाओं में बोर्ड के पुनर्गठन का समर्थन किया।

ईसाई संगठन एसोसिएशन ऑफ क्रिश्चियन ट्रस्ट सर्विसेज (एसीटीएस) भी याचिकाकर्ताओं में से एक था। जॉर्ज ने तर्क दिया कि पूर्व सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने संशोधित अधिनियम के लागू होने के बाद इस वर्ष के प्रारंभ में बोर्ड का पुनर्गठन करते समय कानून के तहत अनिवार्य दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने में विफल रही। एलडीएफ सरकार ने गैर-मुस्लिम सदस्यों या शिया मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि को मनोनीत न करके एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया था।

सतीशन सरकार से नाराज आई. यू. एम. एल.

आई. यू. एम. एल. हालिया राजनीतिक विवादों पर सतीशन की लीडरशिप वाली सरकार के साथ मजबूती से खड़ी रही है। उसका कहना है कि सरकार ने बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति पर सहमति नहीं दी है। आई. यू. एम. एल. के राज्य महासचिव पीएमए सलाम ने कहा, “सरकार ने अदालत को बताया है कि वह इस बात की जांच करेगी कि बोर्ड का गठन कानून के अनुरूप है या नहीं। उसने दो गैर-मुस्लिमों को मनोनीत करने से इनकार कर दिया है। संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश होने के समय से ही आईयूएमएल लगातार बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का विरोध करती रही है। हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।”

हालांकि, सीपीआई (एम) नेता और पूर्व कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि सरकार के हलफनामे ने संशोधित कानून की धारा 14 का प्रभावी रूप से समर्थन किया है। पूर्व मंत्री राजीव ने कहा, “सरकार के हलफनामे में धारा 14 का पूर्ण समर्थन किया गया है, जिससे अंततः बोर्ड में मुसलमानों की संख्या अल्पसंख्यक हो सकती है। आईयूएमएल समुदाय के हितों या धार्मिक मान्यताओं की रक्षा नहीं कर रही है। उसका एकमात्र उद्देश्य बोर्ड को अपने वफादारों से भरना है। हलफनामे और उसके बाद उच्च न्यायालय के आदेश ने संशोधनों को चुनौती देने के राज्य के प्रयास को लगभग निष्प्रभावी कर दिया है। केरल ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया था कि धारा 14 असंवैधानिक है और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।”

संशोधनों को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में पिछली एलडीएफ सरकार ने तर्क दिया था कि राज्य वक्फ बोर्डों में केवल मुसलमानों को ही सेवा करनी चाहिए क्योंकि इन निकायों को मुस्लिम समुदाय से संबंधित धार्मिक बंदोबस्ती और संपत्तियों के प्रशासन का जिम्मा सौंपा गया है।

यह भी पढ़ें: पीएम आवास के सामने प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने किया डिटेन

दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को विरोध प्रदर्शन के दौरान डिटेन कर लिया। इससे पहले राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे। उनके साथ प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद भी मौजूद रहे। पढ़िए पूरी खबर…

न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

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