सुप्रीम कोर्ट ने जंक‑फ़ूड पैकेज पर चेतावनी लेबल अनिवार्य कर दो‑हफ़्ते का अल्टीमेटम दिया
बच्चों और वयस्कों में मोटापे की दर पिछले दो दशकों में पाँच गुना तक बढ़ी है। इस कारण जंक‑फ़ूड के पैकेज पर स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दो हफ्ते की समयसीमा दी है, और इसे न अपनाने पर आगे के निर्देश जारी करेगा। कोर्ट ने इस उपाय को जीवन के अधिकार (धारा 21) के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ा है।

सौजन्य से:- Aaj Tak News
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बच्चों और बड़ों में मोटापे की समस्या पिछले 20 साल में पांच गुना तक बढ़ गई है, सन 2000 से 2022 के बीच स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर 2% से बढ़कर 10% हो गई है. इस बाबत दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता है. केंद्र को जंक फूड के पैकेट पर सामने की ओर ही चेतावनी लेबल लगाने के अपने आदेश को लागू करना होगा. इस बाबत कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है.
कोर्ट ने कहा है कि अगर केंद्र इसे स्वयं करता है, तो अच्छी बात है, नहीं तो हम आगे के लिए निर्देश जारी करेंगे. हमें केंद्र की वो दलीलें मंजूर नहीं हैं जिनमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से विकसित देशों के मानकों के बराबर होना संभव नहीं है. इस दलील के मुताबिक तो क्या भारत को एक अविकसित देश बने रहना चाहिए?
जस्टिस जे बी पारदीवाला ने कहा कि यही वह प्रश्न है जिसे हम केंद्र के विचारार्थ रख रहे हैं. जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने अपने आदेश में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन के अधिकार से जोड़ा है.
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जंक फूड खाने से बिगड़ रही लोगों की सेहत
यह आदेश गैर सरकारी संगठन '3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में आया है. याचिकाकर्ता के वकील राजीव शंकर द्विवेदी ने अपनी दलीलों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को कई साल बीत गए हैं. इतने समय में सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया जबकि जंक फूड खाने से लोगों की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है.
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब सरकार जंक फूड उत्पादों पर पैकेट के सामने चेतावनी लेबल लगाने में इच्छुक नहीं दिख रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिक नमक, चीनी, संतृप्त वसा और कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद करने के लिए स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करना आवश्यक है.
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जंक फूड से बढ़ रही मोटापे की समस्या
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत के अति-प्रसंस्कृत खाद्य बाजार में 2009 और 2023 के बीच 150% से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि मोटापे में कथित तौर पर पांच गुना तक वृद्धि देखी गई है.
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