कोलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को SIT भंग के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की सलाह
CBI ने कलकत्ता हाई कोर्ट में बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले की विशेष जांच टीम को भंग करने की याचिका दायर की, पर न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने बताया कि इस पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश है और CBI को भंग के लिए सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन करना होगा। याचिकाकर्ताओं ने इस मांग का विरोध किया, यह कहकर कि पूरी जांच पूरी हुए बिना टीम को समाप्त करना जोखिमपूर्ण है। अदालत ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया, बल्कि CBI को सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- Jagran
बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: CBI ने की SIT भंग करने की मांग, हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा
सीबीआई ने कलकत्ता हाई कोर्ट से बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को भंग करने की मांग की थी।
HighLights
- सीबीआई ने कलकत्ता हाई कोर्ट से एसआईटी भंग करने की मांग की।
- हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के स्थगनादेश का हवाला दिया।
- सीबीआई को एसआईटी भंग करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। शिक्षक, शिक्षाकर्मी और नगरपालिकाओं में नियुक्ति भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित सीबीआई की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को भंग करने की अर्जी पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को कोई निर्णय नहीं दिया।
न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने कहा कि संबंधित मामले की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगनादेश है। ऐसे में सीबीआई एसआईटी भंग करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन कर सकती है। मामले को फिलहाल सुनवाई की सूची से हटा दिया गया।
नियुक्ति भ्रष्टाचार की जांच के लिए तत्कालीन न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय के आदेश पर 2022 में एसआईटी गठित की गई थी। पिछले महीने सीबीआई ने इसे भंग करने के लिए हाई कोर्ट में आवेदन किया था।
उसका कहना था कि एसआईटी के अधीन अधिकांश मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और बाकी जांच सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा कर सकती है।
अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति का दिया हवाला
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने कहा कि एसआईटी पांच वर्षों से काम कर रही है। इस दौरान कई अधिकारी सेवानिवृत्त या पदोन्नत हो चुके हैं, लेकिन एसआईटी से नहीं हटने के कारण उनकी अन्य जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।
इस पर न्यायमूर्ति सिन्हा ने जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक सामने आए तथ्यों को लेकर सवाल किया। मूल याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विकासरंजन भट्टाचार्य और फिरदौस शमीम ने एसआईटी भंग करने का विरोध करते हुए कहा कि प्राथमिक नियुक्ति मामले की जांच पूरी हुए बिना ऐसा करना चिंताजनक होगा।
इसके बाद अदालत ने आवेदन पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ाई और सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प दिया।
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