सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना, मल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की
न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को 10 लाख रुपये का दंड दिया और मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट के तहत की गई प्रिवेंटिव डिटेंशन को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जमानत मिलने के बाद उन्हें हिरासत में रखना गैर‑कानूनी है और केवल पुलिस के कबूलनामे को आधार बनाकर NSA हिरासत नहीं लगाई जा सकती। यह आदेश राज्य को प्रिवेंटिव डिटेंशन के नियमों का पालन करने की याद दिलाता है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई अवैध हिरासत को रद्द करते हुए यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार को फटकार भी लगाई।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार 2024 के संभल हिंसा मामले के एक आरोपी को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट ( NSA ) के तहत एक साल तक प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) में रखने का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। कोर्ट ने राज्य पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जो हिरासत में रखे गए व्यक्ति को दिया जाएगा। कोर्ट ने राज्य को याद दिलाया कि उसे प्रिवेंटिव डिटेंशन से जुड़े कानूनी सिद्धांतों का पालन करना चाहिए और इसे सजा देने के तरीके के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
जमानत मिलने के बाद हिरासत में रखना गैर-कानूनी
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मुल्ला अफरोज को जमानत मिलने के बाद भी उसे हिरासत में रखने के लिए राज्य द्वारा अपनाए गए प्रिवेंटिव डिटेंशन के तरीके को गैर-कानूनी करार दिया। बेंच ने कहा कि इस फैसले में कई कमियां थीं क्योंकि इसे सही ठहराने के लिए सबूत नाकाफी थे।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में, पुलिस के सामने मुल्ला के कबूलनामे को ही प्रिवेंटिव डिटेंशन लागू करने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता था। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए, हमें लगता है कि राज्य ने सजा देने और एहतियाती अधिकार-क्षेत्र के बीच जो अंतर बनाए रखने की कोशिश की थी, वह असल में धुंधला हो गया है।
क्या है संभाल हिंसा का मामला
बता दें कि नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश के संभल स्थित शाही जामा मस्जिद (हरिहर मंदिर दावे से जुड़ा विवाद) के अदालती सर्वे के दौरान 24 नवंबर को भारी हिंसा भड़क गई थी।
इस हिंसक झड़प में 4 लोगों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मी तथा अन्य लोग घायल हुए थे। मुल्ला अफरोज संभल के एक स्थानीय कारोबारी और प्रॉपर्टी डीलर हैं।
पुलिस ने उन्हें इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड बताया था, जिन पर भीड़ जुटाने व उकसाने का आरोप था। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अक्टूबर 2025 में प्रशासन ने उन पर एनएसए (NSA) के तहत निवारक हिरासत लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को अकेले एनएसए के तहत निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी खारिज कर दिया जिसमें हिरासत को सही ठहराया गया था और उत्तर प्रदेश सरकार पर शक्तियों के गलत इस्तेमाल के चलते 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
लेखक के बारे मेंSanjeev Kumarसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)
संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।
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मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें
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