सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज भर्ती में सुधार का संकेत दिया
गुजरात हाईकोर्ट की 25% सीधी भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक परीक्षा प्रणाली को सुधरने की इच्छा व्यक्त की। अदालत ने रिकॉर्ड और सीलबंद रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया, जबकि विज्ञापित 113 पदों में से कोई भी नियुक्त नहीं हुआ और केवल दो उम्मीदवार मौखिक परीक्षा पास कर सके।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
ज़िला जजों की भर्ती प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक भर्ती की पूरी प्रक्रिया में सुधार की इच्छा जताई
Shahadat
1 Oct 2026 8:33 PM IST
गुजरात हाईकोर्ट की ज़िला जजों की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि वह न्यायिक परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए पहल करना चाहता है।
कोर्ट दो वकीलों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें 2024-25 भर्ती वर्ष के लिए 25% सीधी भर्ती कोटे के तहत ज़िला जजों की गुजरात हाईकोर्ट की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई। इस प्रक्रिया में विज्ञापित 113 रिक्तियों में से कोई भी नहीं भरी गई, जबकि दो उम्मीदवार वाइवा-वोस (मौखिक परीक्षा) चरण के लिए योग्य पाए गए। पिछले महीने नोटिस जारी किया गया।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने जब इस मामले पर सुनवाई की तो वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड अब कोर्ट के सामने पेश किए गए, जिसमें सीलबंद लिफ़ाफ़े में दिए गए अंक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती नियमों के अनुसार, उम्मीदवार के चरित्र का आकलन करने के लिए उस हाई कोर्ट से रिपोर्ट लेनी होती है, जिससे उम्मीदवार संबंधित है। उन्होंने आग्रह किया कि कोर्ट को यह देखना चाहिए कि क्या इन मामलों में रिपोर्ट प्राप्त की गई।
इस पर जस्टिस बागची ने कहा:
"हम पूरी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए कोई पहल करने में अधिक रुचि रखते हैं।"
कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई तब के लिए टाल दी, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) भी मौजूदा बेंच संयोजन में शामिल हों।
कोर्ट ने आदेश दिया:
"रजिस्ट्रार सीलबंद लिफ़ाफ़े में रिपोर्ट के साथ उपस्थित हैं। सीलबंद लिफ़ाफ़े में रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया गया। मामले को अमुक तारीख के लिए सूचीबद्ध करें। रजिस्ट्रार की उपस्थिति की आवश्यकता नहीं है।"
याचिका में 9 जुलाई, 2026 के अंतिम परिणाम को चुनौती दी गई और परिणाम को रद्द करने (जहां तक इसमें उन्हें असफल घोषित किया गया) तथा एक नई, निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया आयोजित करने के निर्देश देने की मांग की गई।
गुजरात हाईकोर्ट ने 25 जुलाई, 2025 को 25% सीधी भर्ती कोटे के तहत ज़िला जज की 113 रिक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया। चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा, गुजराती भाषा परीक्षा, मुख्य लिखित परीक्षा और वाइवा-वोस शामिल थे। प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए 729 उम्मीदवारों में से केवल 31 ही मुख्य परीक्षा के लिए योग्य पाए गए। आखिरकार, डायरेक्ट रिक्रूटमेंट कोटे के तहत वाइवा-वोस (मौखिक परीक्षा) के लिए क्वालिफाई करने वाले सिर्फ़ ये दो याचिकाकर्ता ही उम्मीदवार थे।
याचिका में कहा गया कि 30 अप्रैल, 2026 को हुए वाइवा-वोस के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने 9 जुलाई, 2026 को फाइनल रिजल्ट घोषित किया, लेकिन नियुक्ति के लिए किसी भी उम्मीदवार की सिफारिश नहीं की, जिससे विज्ञापित सभी 113 पद खाली रह गए। मानसी जैन ने लिखित परीक्षा में 200 में से 100.5 अंक हासिल किए, लेकिन वाइवा-वोस में 50 में से सिर्फ़ 9.6 अंक मिले। विशाल बलजीत सिंह ने लिखित परीक्षा में 200 में से 110.5 और वाइवा-वोस में 50 में से 10 अंक हासिल किए। क्वालिफाई करने के लिए उम्मीदवारों को इंटरव्यू में 50 में से 20 अंक प्राप्त करने की आवश्यकता है।
याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि पिछले सात वर्षों में, पांच भर्ती प्रक्रियाओं और 264 अधिसूचित रिक्तियों (जिनमें 2019 में 26, 2020 में 34, 2022 में 34, 2023 में 57 और 2024-25 में 113 रिक्तियां शामिल हैं) के बावजूद, 25% डायरेक्ट रिक्रूटमेंट कोटे के तहत केवल एक नियुक्ति की गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इंटरव्यू प्रक्रिया में विसंगतियां थीं।
याचिका में तर्क दिया गया कि संक्षिप्त इंटरव्यू ने मूल्यांकन को अपर्याप्त बना दिया और मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर चिंताएं पैदा कीं। याचिका में आगे तर्क दिया गया कि चयन प्रक्रिया ने वाइवा-वोस को अत्यधिक महत्व दिया, जिससे लिखित परीक्षा में याचिकाकर्ताओं का प्रदर्शन प्रभावी रूप से बेकार हो गया।
यह अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब सेहरावर्दी मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए तर्क देती है कि मौखिक इंटरव्यू स्वाभाविक रूप से व्यक्तिपरक (subjective) होते हैं और सार्वजनिक भर्ती में उन्हें जरूरत से ज़्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
रिट याचिका के साथ याचिकाकर्ताओं ने 9 जुलाई के परिणाम के संचालन पर रोक लगाने और मामले के लंबित रहने के दौरान गुजरात हाई कोर्ट को नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने या 113 अधिसूचित रिक्तियों को भरने से रोकने के लिए अंतरिम राहत की मांग की।
Case Title : Mansi Jain & Anr. v. Registrar General, High Court of Gujarat
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने जपक और न्यायाधीशों की बैठक पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक भर्ती परीक्षा में सुधार का आग्रह किया

सुप्रीम कोर्ट के जजों से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ समिति की मुलाकात रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अनिवार्य पक्ष के बिना मिला समायोजन निर्णय शून्य

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल गुट के 804 करोड़ के खातों पर रोक हटाने की याचिका खारिज

इलेक्शन कमिश्नर नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में करेक्टिव याचिका दायर की

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया: न्याय का अधिकार सभी के लिए समान

दिल्ली हाईकोर्ट ने CCI अधिकारी के खिलाफ सबूत छेड़छाड़ के मामले में जांच को जारी रखने का आदेश दिया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने 16% दवा मार्जिन सीमा सुझाई, स्रोत एवं प्रभाव पर सवाल
- सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से पूर्व-विधायी बैठक पर उठे सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने यूपी की 69,000 शिक्षक भर्ती की पूरी सूची माँगी, डेटा प्रस्तुति का आदेश
- हाईकोर्ट ने कहा: लंबित मुकदमों से पासपोर्ट नहीं रोका जा सकता, दो हफ़्ते में फ़ैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने 2008 अहमदाबाद बमकाण्ड के बरेलवी की फांसी को स्थगित किया
- कोलकाता हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को हेट स्पीच केस में दी मध्यस्थ सुरक्षा, 2027 तक जारी रहेगी
- सुप्रीम कोर्ट ने त्रिनमूल कांग्रेस के चार बैंक खातों की जमानती पर कोई आदेश नहीं दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जिला जज की शीघ्र सुनवाई की मांग को खारिज, पद के आधार पर कोई प्राथमिकता नहीं

