सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक भर्ती परीक्षा में सुधार का आग्रह किया
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के जिला जज भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक भर्ती परीक्षा में सुधार आवश्यक है। कोर्ट ने vacancies की भरपाई में देरी, सीमित सीधी भर्ती कोटा और साक्षात्कार प्रक्रिया में गड़बड़ियों को उजागर कर, ऐसी सुधारात्मक पहल की आवश्यकता पर बल दिया।

सौजन्य से:- Hindustan
न्यायिक भर्ती प्रक्रिया में सुधार की जरूरत : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की ज़रूरत है। गुजरात हाईकोर्ट में जिला जज की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की। याचिका में 2024-25 के लिए जिला जज के पदों की भर्ती प्रक्रिया की शिकायत की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह न्यायिक भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है और यह अदालत इसके लिए पहल करना चाहती है। शीर्ष अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट में जिला जज की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली दो वकीलों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह मौखिक टिप्पणी की। याचिका में 2024-25 के लिए 25 फीसदी सीधी भर्ती कोटे के तहत जिला जज के लिए गुजरात हाईकोर्ट की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी, जिसमें 113 रिक्तियों में से कोई भी पद नहीं भरा गया था, जबकि दो उम्मीदवारों ने साक्षात्कार के लिए योग्यता प्राप्त की थी।
मामले की सुनवाई
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि भर्ती के रिकॉर्ड अब उसके सामने रखे गए हैं, जिसमें दिए गए अंक भी सीलबंद लिफाफे में हैं। उन्होंने पीठ से कहा कि भर्ती नियमों के अनुसार, उम्मीदवार के चरित्र का आकलन करने के लिए हाईकोर्ट से एक रिपोर्ट प्राप्त करनी होती है जिससे वह संबंधित है। उन्होंने आग्रह किया कि अदालत को यह देखना चाहिए कि क्या इन मामलों में रिपोर्ट प्राप्त की गई थी। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि हम पूरी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए कुछ पहल करने में अधिक रुचि रखते हैं। इसके साथ ही, पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए तब सूचीबद्ध करने को कहा है, जब मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भी वर्तमान पीठ संयोजन में बैठ रहे हों।
भर्ती प्रक्रिया का विवरण
यह था मामला
गुजरात हाईकोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को 25 फीसदी सीधी भर्ती कोटे के तहत 113 जिला जज के पदों को भरने के लिए विज्ञापन दिया था। दो याचिकाकर्ता ही ऐसे उम्मीदवार थे जो सीधी भर्ती कोटे के तहत मौखिक परीक्षा के लिए योग्य पाए गए। याचिका के अनुसार मानसी जैन ने लिखित परीक्षा में 200 में से 100.5 अंक हासिल किए, जबकि विशाल बलजीत सिंह ने लिखित परीक्षा में 200 में से 110.5 और वाइवा वॉइस में 50 में से 10 नंबर हासिल किए। उम्मीदवारों को क्वालिफाई करने के लिए इंटरव्यू में 50 में से 20 नंबर लाने थे। याचिका में बताया गया कि पिछले सात सालों में 25 फीसदी सीधी भर्ती कोटे के तहत सिर्फ एक नियुक्ति हुई है, जबकि पांच नियुक्ति प्रक्रिया और 264 अधिसूचित रिक्तियां हैं, जिनमें 2019 में 26 रिक्तियां, 2020 में 34, 2022 में 34, 2023 में 57 और 2024-25 में 113 रिक्तियां शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि साक्षात्कार की प्रक्रिया में गड़बड़ी हैं।
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