Twisha Sharma Case: सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट, 636 पन्नों में बंद त्विषा शर्मा की हत्या या आत्महत्या का राज
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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Twisha Sharma Case: सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट, 636 पन्नों में बंद त्विषा शर्मा की हत्या या आत्महत्या का राज
Mon, 17 Aug 2026 02:01 PM IST
भोपाल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: भोपाल ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2026 02:01 PM IST
सार
बहुचर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद भोपाल जिला अदालत में चालान पेश कर दिया है। मामले में रिटायर्ड जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ बीएनएस और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
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विस्तार
भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद न्यायिक प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भोपाल जिला अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शोभना भलावे की अदालत में में 636 पन्नों का चालान पेश कर दिया है। मामले में रिटायर्ड जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया गया है। चालान में दर्ज तथ्यों और जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों व साक्ष्यों का अदालत अध्ययन कर रही है। वहीं, दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने भी चालान की प्रतियां और उसमें शामिल साक्ष्यों का परीक्षण शुरू कर दिया है। अब इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।
12 मई को फंदे पर मिली थी त्विषा की लाश
मामले की शुरुआत 12 मई को हुई थी, जब त्विषा शर्मा की लाश फंदे पर मिली थी। घटना के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठे और पुलिस ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर मामला आगे बढ़ा। बाद में जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को मिली। सीबीआई ने मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज करने के साथ दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य जुटाए और उनकी कड़ियों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।
रिटायर्ड जज और बेटे को बनाया आरोपी
जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने अब अदालत में चालान पेश किया है। इसमें पूर्व जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 85 और 108 के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए गए हैं। इन धाराओं के तहत दहेज से जुड़े अपराध, महिला के साथ क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित आरोपों की न्यायिक जांच होगी।
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अब क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगे वकील
चालान पेश होने के बाद दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने सीबीआई की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों का अध्ययन शुरू कर दिया है। अधिवक्ता चालान में दर्ज तथ्यों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान करेंगे। उनका फोकस इस बात पर रहेगा कि जांच एजेंसी ने जिन तथ्यों के आधार पर दोनों को आरोपी बनाया है, उन्हें समर्थन देने वाले साक्ष्य कितने ठोस हैं। अधिवक्ताओं के अध्ययन के बाद दोनों पक्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। अदालत चालान में शामिल दस्तावेजों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी। फिलहाल मामले की अगली दिशा सीबीआई के चालान में प्रस्तुत साक्ष्यों और अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगी।
फैक्ट फाइल
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12 मई को फंदे पर मिली थी त्विषा की लाश
मामले की शुरुआत 12 मई को हुई थी, जब त्विषा शर्मा की लाश फंदे पर मिली थी। घटना के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठे और पुलिस ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर मामला आगे बढ़ा। बाद में जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को मिली। सीबीआई ने मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज करने के साथ दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य जुटाए और उनकी कड़ियों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।
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रिटायर्ड जज और बेटे को बनाया आरोपी
जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने अब अदालत में चालान पेश किया है। इसमें पूर्व जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 85 और 108 के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए गए हैं। इन धाराओं के तहत दहेज से जुड़े अपराध, महिला के साथ क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित आरोपों की न्यायिक जांच होगी।
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अब क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगे वकील
चालान पेश होने के बाद दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने सीबीआई की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों का अध्ययन शुरू कर दिया है। अधिवक्ता चालान में दर्ज तथ्यों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान करेंगे। उनका फोकस इस बात पर रहेगा कि जांच एजेंसी ने जिन तथ्यों के आधार पर दोनों को आरोपी बनाया है, उन्हें समर्थन देने वाले साक्ष्य कितने ठोस हैं। अधिवक्ताओं के अध्ययन के बाद दोनों पक्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। अदालत चालान में शामिल दस्तावेजों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी। फिलहाल मामले की अगली दिशा सीबीआई के चालान में प्रस्तुत साक्ष्यों और अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगी।
फैक्ट फाइल
- 12 मई को त्विषा शर्मा की लाश फंदे पर मिली। घटना के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच शुरू हुई।
- मामले से जुड़े तथ्यों, परिस्थितियों और आरोपों की जांच आगे बढ़ी तथा दस्तावेज और बयान जुटाए गए।
- मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो ने संभाली और संबंधित लोगों से पूछताछ के साथ उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया।
- जांच के बाद रिटायर्ड जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को मामले में आरोपी बनाया गया।
- सीबीआई ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शोभना भलावे की अदालत में चालान पेश कर दिया।
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