‘जब तक वकील चाहेंगे, मैं BCI चेयरमैन रहूंगा’, सुप्रीम कोर्ट में याचिका के बीच मनन मिश्रा का करारा पलटवार
सुप्रीम कोर्ट में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर उठे सवालों ने बार की सियासत गरमा दी है। याचिका के आरोपों के बीच मिश्रा का दो टूक जवाब- 'मेरी ताकत वकीलों का समर्थन है, जब तक वे चाहेंगे, मैं पद पर रहूंगा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर उठे सवालों ने बार की सियासत गरमा दी है। याचिका के आरोपों के बीच मिश्रा का दो टूक जवाब- 'मेरी ताकत वकीलों का समर्थन है, जब तक वे चाहेंगे, मैं पद पर रहूंगा।'
नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा के लगातार कार्यकाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने कानूनी जगत में हलचल बढ़ा दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों का उल्लंघन करते हुए मिश्रा का कार्यकाल एक दशक से भी अधिक समय से जारी है।
'मिश्रा बोले- मैं निर्वाचित प्रतिनिधि हूं'
मनन कुमार मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह एक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और उन्हें BCI में न तो मनोनीत किया गया था और न ही किसी अन्य तरीके से नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि BCI का गठन एडवोकेट्स एक्ट के तहत हुआ है और इसके चेयरमैन का चुनाव निर्धारित लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता है।
25 लाख से ज्यादा वकीलों से शुरू होती है चुनावी प्रक्रिया
मिश्रा के मुताबिक, देशभर के 25 लाख से अधिक वकील पहले अपने-अपने स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधि चुनते हैं। इसके बाद स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधि BCI के सदस्यों का चुनाव करते हैं और फिर सभी राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन का चुनाव करते हैं।
‘यह मेरा सातवां कार्यकाल, 6 बार निर्विरोध चुना गया’
मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि यह उनका सातवां कार्यकाल है और पिछले छह कार्यकाल में वह निर्विरोध चुने गए हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में भी BCI के दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके समर्थन में हैं।
‘वकील चाहेंगे, तब तक पद पर रहूंगा’
BCI चेयरमैन ने कहा कि वह तब तक चेयरमैन बने रहेंगे, जब तक देश के वकील और उनके निर्वाचित प्रतिनिधि उन्हें इस पद पर देखना चाहेंगे। उन्होंने अपने कार्यकाल को वकीलों के समर्थन से जुड़ा हुआ बताया।
ट्रस्ट को लेकर आरोपों पर भी सफाई
मिश्रा ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे ट्रस्ट और रिश्तेदार की नियुक्ति से जुड़े आरोपों को भी बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का पूरा कामकाज पारदर्शी तरीके से होता है और उसके मैनेजिंग ट्रस्टी में BCI के सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।
‘ट्रस्ट के खातों का हर साल होता है ऑडिट’
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति ट्रस्ट के खातों की जांच कर सकता है। उनके मुताबिक ट्रस्ट का हर साल ऑडिट कराया जाता है और ऑडिट रिपोर्ट को बजट में शामिल करने के साथ सार्वजनिक भी किया जाता है।
CJP से जुड़े लोगों पर मिश्रा का पलटवार
मिश्रा ने आरोप लगाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ ऐसे लोग भी उनके खिलाफ दावे कर रहे हैं, जिनका BCI से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने CJP से जुड़े लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वकीलों को ‘लीगल कॉकरोच’ कहना कानूनी बिरादरी के लिए शर्मनाक है।
‘बेबुनियाद और बचकानी बातें बर्दाश्त नहीं करेगा वकील समुदाय’
BCI चेयरमैन ने कहा कि वकीलों का समुदाय इस तरह की बेबुनियाद और बचकानी टिप्पणियों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को राजनीतिक या व्यक्तिगत आधार पर उठाए गए सवालों के तौर पर खारिज किया।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में BCI चेयरमैन के लंबे कार्यकाल और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में अब अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, मनन कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि उनका पद पर बने रहना वकीलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के समर्थन पर निर्भर है।
लेखक के बारे मेंअशोक उपाध्यायअशोक उपाध्याय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का 12 साल का अनुभव। साल 2014 में नवभारत टाइम्स हिंदी अखबार से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। पॉलिटिक्स और क्राइम बीट पर रिपोर्टिंग का काफी अनुभव है। अमर उजाला देहरादून में भी सेंट्रल डेस्क पर काम किया है। साथ ही कई चुनावों में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले 6 साल से NBT डिजिटल में न्यूज डेस्क पर काम कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स को पकड़ने की अच्छी समझ है।
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