सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी के पक्ष में एनसीडीआरसी के ₹2.4 करोड़ के भुगतान आदेश को निरस्त किया
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के 2009 की आग के बाद इन्श्योरेंस कंपनी को ₹2.4 करोड़ देन का आदेश रद्द कर दिया, क्योंकि कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन किया था। अदालत ने कहा कि यदि बीमित व्यक्ति झूठी सूचना देता है, तो बीमा कंपनी को दावे को तुरंत खारिज करने का अधिकार है।

सौजन्य से:- Hindustan
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीडीआरसी का आदेश रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीडीआरसी द्वारा 2009 की आग की घटना के बाद एक कंपनी को ₹2.4 करोड़ का भुगतान करने का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने बताया कि बीमाकर्ता ने पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया था। अगर किसी बीमित व्यक्ति ने झूठे बयान दिए, तो बीमा कंपनी उस दावे को खारिज कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) का एक आदेश रद्द कर दिया। आयोग ने एक इंश्योरेंस कंपनी को 2009 में आग लगने की घटना के बाद एक कंपनी को ₹2.4 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। मामले में इंश्योरेंस पॉलिसी की दो शर्तों का जिक्र करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनी ने इनका ‘साफ तौर पर उल्लंघन’ किया था। कोर्ट ने कहा कि जहां एक शर्त के तहत कंपनी को सभी जरूरी पहलुओं का ईमानदारी से और पूरा खुलासा करना था, वहीं दूसरी शर्त में कहा गया था कि वह कोई झूठी घोषणा न करे।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि अगर कोई बीमित व्यक्ति पॉलिसी की शर्तों के उलट अपने दावे को मजबूत करने के लिए झूठे बयान देता है, तो इंश्योरेंस कंपनी कानूनी रूप से ऐसे दावे को बिना किसी देरी के खारिज करने की हकदार होगी। सुप्रीम कोर्ट ने दो अपीलों पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें इंश्योरेंस कंपनी द्वारा एनसीडीआरसी के नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली अपील भी शामिल थी। एनसीडीआरसी ने इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया था कि वह कंपनी को ₹2.4 करोड़ का भुगतान करे, साथ ही सर्विस में कमी के लिए ₹3 लाख का मुआवजा और ₹1 लाख का कानूनी खर्च भी दे। कंपनी ने भी एनसीडीआरसी के आदेश और उसे दिए गए मुआवजे की राशि को चुनौती देते हुए एक अलग अपील के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
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