सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से 25 सितंबर तक न्यायाधिकरण रिक्तियों की रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट के विशेष पिट के आदेश पर केंद्र को 25 सितंबर तक देशभर के न्यायाधिकरणों, विशेषकर ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों की रिक्त पदों का विवरण देना है। रिपोर्ट में बताई गईं लगभग 90 रिक्तियाँ हैं, जिनमें से 81 पर चयन समिति सक्रिय रूप से काम कर रही है। न्यायिक प्रणाली को सुचारु रखने हेतु तीन एनजीटी सदस्यों का कार्यकाल भी बढ़ा दिया गया है।

सौजन्य से:- Jagran
न्यायाधिकरणों में कब भरे जाएंगे रिक्त पड़े पद? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 25 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 25 सितंबर तक देशभर के न्यायाधिकरणों, विशेषकर ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों का ब्यौरा देने का निर्देश दिया है।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से न्यायाधिकरणों की रिक्तियों का ब्यौरा मांगा
- 25 सितंबर तक रिपोर्ट पेश करने का कड़ा निर्देश दिया गया
- आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु कोर्ट चिंतित
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय न्याय व्यवस्था में आम जनता के अधिकारों और त्वरित न्याय की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 25 सितंबर तक देश भर के न्यायाधिकरणों, विशेष तौर पर ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों में रिक्त पड़े पदों का पूरा ब्यौरा देने का कड़ा निर्देश दिया है।
यह भावुक और गंभीर मसला सीधे तौर पर देश के आम नागरिकों की 'न्याय तक पहुंच' से जुड़ा हुआ है, जिस पर कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की विशेष पीठ उन तमाम याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें इस बात की आशंका जताई गई है कि पीठासीन अधिकारियों और सदस्यों की सेवानिवृत्ति के कारण कई महत्वपूर्ण न्यायाधिकरण पूरी तरह से ठप या निष्क्रिय हो सकते हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात को बेहद संवेदनशीलता के साथ महसूस किया कि यदि समय रहते नियुक्तियां नहीं की गईं, तो आर्थिक और पर्यावरणीय मामलों से जूझ रहे आम पीड़ितों को भारी मानसिक और कानूनी संकट का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि मूल मुद्दा केवल पदों का नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए 'न्याय तक पहुंच' का है।
कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि कुछ ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों को अपने दैनिक कामकाज में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं अडिशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया कि वे 25 सितंबर तक सभी ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों की रिक्तियों का विस्तृत ब्यौरा कोर्ट के सामने रखें।
हालांकि, सरकारी पक्ष की ओर से बताया गया कि कुल रिक्तियों की संख्या लगभग 90 है और खोज-सह-चयन समिति 81 रिक्तियों की प्रक्रिया पर गंभीरता से काम कर रही है। प्रधान न्यायाधीश ने यह भी आश्वासन दिया कि वे प्रशासनिक स्तर पर इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
इसके साथ ही, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के तीन सदस्यों (दो न्यायिक और एक तकनीकी) के सेवानिवृत्त होने पर पर्यावरण से जुड़े मामलों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का भी संज्ञान लिया गया। न्याय के हित में एक महत्वपूर्ण और मानवीय कदम उठाते हुए पीठ ने अंतरिम उपाय के तौर पर इन तीनों सदस्यों का कार्यकाल तब तक के लिए बढ़ा दिया जब तक कि नए पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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