CAPF में IPS डेपुटेशन को धीरे‑धीरे घटाने का आदेश, रोक नहीं – गृह सचिव का कोर्ट में बचाव
गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हालिया आदेश केवल दो साल के भीतर IPS अधिकारियों की संख्या घटाने का है, पूर्ण रोक नहीं। उन्होंने कहा कि ये डेपुटेशन पहले से तय नियमों व CAPF प्रमुखों की माँग के तहत की गई हैं, और वे लागू वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत हैं।

सौजन्य से:- ThePrint Hindi
नई दिल्ली: मई 2025 से पांच अर्धसैनिक बलों में 40 से ज्यादा भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की डेपुटेशन को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसे अधिकारियों की संख्या धीरे-धीरे कम करने का कोर्ट का आदेश इस तरह की नियुक्तियों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाता. उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियां पहले से तय व्यवस्था के तहत की गई हैं.
सोमवार को गृह सचिव ने यह भी कहा कि ये डेपुटेशन केवल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के प्रमुखों की मांग के आधार पर की गई थीं. इनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) शामिल हैं.
मोहन ने सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच के निर्देश पर हलफनामा दाखिल किया. यह सुनवाई सरकार के उस कदम के खिलाफ दायर अवमानना याचिका में हुई, जिसमें CAPFs में IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को कानूनी रूप देने वाला कानून लाने की कोशिश की गई थी.
यह याचिका अर्धसैनिक बलों के कई मौजूदा और रिटायर्ड कैडर अधिकारियों ने दायर की थी.
पिछली सुनवाई में मोहन ने बताया था कि पिछले साल 23 मई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से 46 अधिकारियों को CAPFs में डेपुटेशन पर लाया गया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के आखिरी दिन उनसे स्पष्टीकरण मांगा था.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दो साल के भीतर डेपुटेशन पर काम कर रहे IPS अधिकारियों की संख्या धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था. केंद्र ने बाद में इस आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में खारिज कर दिया था. इस साल सरकार ने विरोध और आलोचना के बावजूद CAPF (General Administration) Act लागू किया.
अपने हलफनामे में मोहन ने फिर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दो साल के भीतर डेपुटेशन पर तैनात IPS अधिकारियों की संख्या कम करने का निर्देश दिया था. लेकिन उन्होंने कहा कि आदेश में यह साफ तौर पर नहीं कहा गया था कि डेपुटेशन को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए.
मोहन ने कोर्ट से कहा, “यह सम्मानपूर्वक बताया जाता है कि इस माननीय कोर्ट ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया है कि अलग-अलग CAPFs में IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को पूरी तरह बंद कर दिया जाए. इस माननीय कोर्ट का निर्देश डेपुटेशन के लिए तय पदों की संख्या को धीरे-धीरे कम करने का है और यह CAPFs में डेपुटेशन पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति पर रोक नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा कि इसलिए ऐसी नियुक्तियां लागू वैधानिक नियमों और नीतियों के तहत की जाती हैं.
उन्होंने कोर्ट से कहा, “यह सम्मानपूर्वक बताया जाता है कि ऊपर बताई गई डेपुटेशन ऐसी नियुक्तियों से जुड़े लागू वैधानिक और नियामक नियमों के अनुसार की गई हैं.” उन्होंने आगे कहा, “यह भी बताया जाता है कि 23.05.2025 के फैसले के बाद नियुक्तियां संबंधित भर्ती नियमों के तहत तय कोटे में खाली पदों के लिए संबंधित महानिदेशक के माध्यम से अलग-अलग CAPFs से मिली मांग के आधार पर की गई हैं.”
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न CAPFs में अधिकारियों के करियर में रुकावट को दूर करने और उनकी करियर संबंधी उम्मीदों में संतुलन बनाने के लिए उसी आदेश में दिए गए निर्देश के अनुसारगैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन का लाभ दिया है. हालांकि, उन्होंने कोर्ट के फैसले में दिए गए सभी दिशानिर्देशों और निर्देशों का पालन करने के लिए और समय देने की अपनी पहले की मांग को दोहराया.
कैडर में बदलाव के मुद्दे पर मोहन ने कहा कि सभी CAPFs ने कैडर की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अपने प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेज दिए हैं. उन्होंने हलफनामे में कहा, “यह प्रक्रिया फिलहाल लागू वैधानिक और नियामक व्यवस्था के अनुसार और 23.05.2025 के फैसले में दिए गए निर्देशों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है.”
उन्होंने कहा, “यह बताया जाता है कि सभी संबंधित CAPFs ने अपने कैडर समीक्षा प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले फील्ड यूनिट के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को अपने विचार, सुझाव और राय देने का मौका दिया है. इस तरह यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि कैडर समीक्षा के प्रस्ताव हर पहलू को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जाएं और संबंधित CAPFs की कामकाज और ऑपरेशन से जुड़ी जरूरतों को शामिल करें. इसके लिए संबंधित पक्षों की व्यापक भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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