सुप्रीम कोर्ट के ‘मध्यस्थता फॉर द नेशन 3.0’ से कोर्ट में लंबित केसों का निपटारा
सुप्रीम कोर्ट के इस अभियान के तहत 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक हाईकोर्ट और जिलों में लंबित मामलों के पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद निपटाने हेतु मध्यस्थता के रास्ते अपनाने के लिए बुलाया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ और 1700 जिलों में नियुक्त मध्यस्थ 15 प्रकार के मामलों पर कार्य करेंगे। पहले के अभियानों में 2.11 लाख से अधिक केस सुलझे हैं, जिससे अदालतों का बोझ कम हो सके।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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कोर्ट में लंबित केस आपसी सहमति से निपटाएं:सुप्रीम कोर्ट की पहल पर चल रहा ‘मध्यस्थता फॉर द नेशन 3.0’ अभियान
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हाईकोर्ट और निचली अदालतों में लंबित मामलों के पक्षकारों से अपील की गई है कि वे आपसी सहमति से विवाद निपटाने के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाएं। यह पहल सुप्रीम कोर्ट के 'मध्यस्थता फॉर द नेशन 3.0' अभियान के तहत 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक चलेगी।
रजिस्ट्रार भगीरथ वर्मा के अनुसार, वादकारी खुद मध्यस्थता के लिए अनुरोध कर सकते हैं। निचली अदालतों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और हाईकोर्ट के लिए प्रयागराज या लखनऊ स्थित विधिक सेवा समिति से संपर्क करें।
हाईकोर्ट में 323 और जिलों में 1700 मध्यस्थ
मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर आपसी सहमति से समाधान खोजने में मदद करता है, वह कोई फैसला नहीं थोपता। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 255 और लखनऊ खंडपीठ में 68 मध्यस्थ हैं। प्रदेश के जिलों में 1700 मध्यस्थ नियुक्त हैं। अभियान में वैवाहिक, पारिवारिक, मोटर दुर्घटना, चेक बाउंस और उपभोक्ता विवाद सहित 15 तरह के मामले शामिल हैं।
लखनऊ खंडपीठ की मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजन रॉय ने कहा कि मध्यस्थता में पक्षकार स्वयं निष्पक्ष मध्यस्थ की सहायता से समझौते की शर्तों पर बातचीत करते हैं। इससे समय और मुकदमे का खर्च बचने के साथ मानसिक तनाव भी कम होता है। साथ ही, न्यायालयों पर लंबित मुकदमों का बोझ घटाने में भी मदद मिलती है।
1.0 और 2.0 अभियान में 2.11 लाख से ज्यादा मामले सुलझे
मेम्बर सेक्रेटरी डॉ. मनु कालिया ने बताया कि ‘मध्यस्थता फॉर द नेशन 1.0’ में करीब 63,690 और 2.0 अभियान में लगभग 1,48,301 मामलों का निपटारा हुआ था। दोनों अभियानों में 2.11 लाख से अधिक मामलों का समाधान हुआ। उन्होंने कहा कि देश की अदालतों में 5.2 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित होने के बीच मध्यस्थता के जरिए विवादों का शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान बेहद महत्वपूर्ण है।
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