केंद्र सरकार ने झारखंड DGP नियुक्ति को अवैध करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को मंजूरी
केंद्रीय सरकार ने झारखंड के डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को असवैध घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और न्यायालय ने इसकी सुनवाई को स्वीकृति दी। सरकार का तर्क है कि नियुक्ति 2025 की राज्य नियमावली और सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले के दिशा‑निर्देशों के विरुद्ध है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने इस मामले के साथ ओडिशा से संबंधित समान याचिकाओं को भी सुनने का आश्वासन दिया है।

सौजन्य से:- Hindustan
झारखंड DGP की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार, अवैध घोषित करने की मांग
झारखंड सरकार के डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केंद्र सरकार की मांग है कि उनकी नियुक्ति को अवैध घोषित किया जाए। इसके लिए केंद्र ने तर्क भी दिया है।
झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को अवैध घोषित करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा उल्लेख किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की सहमति जताई है। शीर्ष अदालत गुरुवार को बाबूलाल मरांडी की याचिका के साथ केंद्र की अर्जी पर भी सुनवाई करेगी।
क्या है केंद्र सरकार का तर्क
डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र का तर्क है कि 2025 की राज्य नियमावली प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी दिशा-निर्देशों के विपरीत है। केंद्र ने 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले छह माह की अनिवार्य सेवा शर्त हटाने के संशोधन पर आपत्ति जताई है। पूर्व में अनुराग गुप्ता की नियुक्ति का विरोध करने का हवाला देते हुए केंद्र ने नई प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 मार्च 2019 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि यह शर्त यूपीएससी द्वारा सिफारिश किए जाने और पैनल तैयार किए जाने पर लागू होगी।
इससे पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह टिप्पणी ओडिशा सरकार द्वारा राज्य के डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रखते हुए की थी। पीठ ने 24 सितंबर को ओडिशा सरकार से पूछा था कि क्या उसने एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जिनका नाम डीजीपी पद के लिए विचार किए जा रहे अधिकारियों की सूची से हटा दिया गया था, को आरोपी की श्रेणी में रखा है। सीबीआई ने कहा था कि भर्ती परीक्षा घोटाला मामले में उनसे पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है।
फैसला सुरक्षित रखते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पीठ यह देखेगी कि ओडिशा और झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति शीर्ष अदालत के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए फैसले के तहत जारी निर्देशों के अनुसार की गई थी या नहीं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि राज्य नियुक्ति प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहते हैं और प्रकाश सिंह मामले में दिए गए फैसले का पालन नहीं करना चाहते... वे अपनी पसंद का डीजीपी चाहते हैं।
शीर्ष अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के रवैये पर भी कड़ी नाराजगी जताई।अदालत ने कहा कि राज्यों की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों के तीन नामों को डीजीपी नियुक्ति के लिए छांटने का जिम्मा यूपीएससी को दिया गया था, लेकिन उसने इस काम में लापरवाही भरा रवैया अपनाया।
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