सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानेश कुमार व दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को चुनौती, प्रक्रिया पर सवाल उठे
सूरी पसाला ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की नियुक्तियों को लेकर याचिका दायर की, जिसमें 2023 के कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है। याचिका में कहा गया है कि चयन समिति ने पाँच‑पाँच नामों के पैनल की बजाय केवल छह नाम सुझाए और नियुक्तियों से पहले आवश्यक अनुभव की पुष्टि नहीं हुई। अदालत से क्वो वारंटो की रिट की मांग की गई है।

सौजन्य से:- Aaj Tak
Sign In
Advertisement
X
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता सूरी पसाला ने इन नियुक्तियों के खिलाफ याचिका दाखिल की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति की प्रक्रिया 2023 में बनाए गए कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक नहीं हुई.
दरअसल, इस याचिका में CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सर्विस टर्म और कार्यकाल से जुड़े कानून के प्रावधानों का पालन नहीं होने का दावा किया गया है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से क्वो वारंटो की रिट जारी करने की मांग की है. मालूम हो, क्वो वारंटो की रिट एक कानूनी रिट है, जिसके जरिए कोर्ट किसी व्यक्ति से पूछ सकती है कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत किसी सार्वजनिक पद पर बैठा है.
2024 में हुई नियुक्तियों पर उठाए सवाल
याचिका में 14 मार्च 2024 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कानून की धारा 5, 6 और 8(1) का पालन नहीं किया गया.
यह भी पढ़ें: CEC की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन, स्प्लिट वर्डिक्ट पर फिर से विचार की मांग
Advertisement
याचिका में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की खोज समिति के पैनल पर भी सवाल उठाए गए हैं. दावा किया गया है कि मार्च 2024 में दो पद खाली थे. कानून के मुताबिक हर पद के लिए पांच नामों का पैनल होना चाहिए था. यानी कुल 10 नाम होने चाहिए थे. लेकिन खोज समिति ने सिर्फ छह नामों की सिफारिश की.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 22 मार्च 2024 के आदेश का भी हवाला दिया गया है. इसमें कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया में जल्दबाजी को लेकर चिंता जताई थी. कोर्ट ने कहा था कि चयन समिति के सदस्यों को सभी उम्मीदवारों की पूरी जानकारी पहले से मिलनी चाहिए.
याचिका में दावा किया गया है कि 13 मार्च को खोज समिति की सूची अंतिम होने से पहले ही विपक्ष के नेता को 200 से ज्यादा लोगों की सूची भेज दी गई थी. इसके अगले दिन खोज समिति ने छह नामों की सिफारिश की. उसी दिन चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के नाम पर मुहर लगा दी.
यह भी पढ़ें: तेजस्वी यादव-मुकेश सहनी और मीसा भारती हिरासत में, पटना में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजभवन मार्च
चुनाव से जुड़ी कोई पोस्टिंग दर्ज नहीं होने का दावा
याचिका में कानून की धारा 5 का हवाला दिया गया है. इसके मुताबिक नियुक्ति के लिए ऐसे व्यक्ति पात्र हैं, जो भारत सरकार में सचिव स्तर के पद पर रहे हों. साथ ही उन्हें चुनावों के प्रबंधन और संचालन का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव होना चाहिए.
Advertisement
याचिकाकर्ता ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया है कि चुनाव आयोग में नियुक्ति से पहले उनके रिकॉर्ड में चुनाव प्रबंधन से जुड़ा कोई विशेष कार्यभार नहीं दिखता.
यह भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द, इस्तीफे और महाभियोग की सुगबुगाहट के बीच फैसला
ज्ञानेश कुमार के रिकॉर्ड में 26 पोस्टिंग का जिक्र है. इनमें चुनाव से जुड़ी कोई पोस्टिंग दर्ज नहीं होने का दावा किया गया है. उन्होंने एर्नाकुलम के जिला कलेक्टर के तौर पर भी काम किया था. हालांकि, याचिका के मुताबिक उनके रिकॉर्ड में यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन और भू-राजस्व प्रबंधन के तहत दर्ज है. सुखबीर सिंह संधू को लेकर भी याचिका में इसी तरह के सवाल उठाए गए हैं. अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा.
---- समाप्त ----
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
कोलकाता हाई कोर्ट ने 60‑दिन बेकायदेशीर हिरासत के बाद 5.36 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण में पेड़ कटाई के बदले पौधारोपण हेतु पर्याप्त भूमि प्रदान करने का निर्देश दिया

विजयपुर उपचुनाव विवाद: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कांग्रेस विधायक की स्थिति तय होगी

सुप्रीम कोर्ट के ‘मध्यस्थता फॉर द नेशन 3.0’ से कोर्ट में लंबित केसों का निपटारा

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से CEC ज्ञानेश कुमार व दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने फ़ार्मा मार्केटिंग पर कानूनी निगरानी हेतु पैनल बनाने का निर्देश दिया

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में सीजेपी का लाइव प्रदर्शन, प्रकाश राज और ध्रुव राठी ने किया हिस्सा

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में जनता की अदालत: ध्रुव राठी‑प्रकाश राज SIR विरोधी मोर्चे का नेतृत्व करेंगे, बाद में चप्पल प्रदर्शन
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने फ़ार्मा मार्केटिंग पर नियामक समिति गठित करने का आदेश दिया
- जयपुर में व्यापारी अपनी विरासत वाली दुकानें तोड़ रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने पर चिंता बढ़ी
- केंद्र सरकार ने झारखंड DGP नियुक्ति को अवैध करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को मंजूरी
- झारखंड डीजीपी नियुक्ति को लेकर केंद्र की अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तय किया सुनवाई का दिन
- कोटद्वार में रास्ते के विवाद पर उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक को रद्द किया
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को पेंशन मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश
- सरकारी मुकदमों की बढ़ती लहर: 7 लाख से अधिक केस, 600 करोड़ से ज्यादा खर्च
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में नई चुनावी प्रक्रिया का आदेश, नामांकन में व्यापक अड़चन की पुष्टि

