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जंतर-मंतर प्रदर्शन में लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, बनाई हाई लेवल कमेटी - supreme court action on lathi charge during jantar mantar protest form five member high powered enquiry committee hpec

जंतर-मंतर प्रदर्शन में लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, बनाई हाई लेवल कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय ज…

20 अगस्त 2026 को 12:55 pm बजे
जंतर-मंतर प्रदर्शन में लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, बनाई हाई लेवल कमेटी - supreme court action on lathi charge during jantar mantar protest form five member high powered enquiry committee hpec

सौजन्य से:- Jagran

जंतर-मंतर प्रदर्शन में लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, बनाई हाई लेवल कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की जांच हेतु समिति बनाई।

- पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे समिति की अध्यक्षता।

- पुलिस और सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और दूसरे सुरक्षा कर्मियों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यों वाली एक हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) बनाई है।

इस कमेटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी हैं। कमेटी के अन्य सदस्यों में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई लेवल कमेटी

सुप्रीम कोर्ट की बनाई यह कमेटी कई आरोपों की जांच करेगी, जिनमें पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा, पुलिस की निगरानी, भीड़ को काबू करने के तरीकों की उचितता और पीड़ितों को मेडिकल मदद व मुआवजा देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

साथ ही, यह कमेटी पुलिस कर्मियों के साथ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के बारे में अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच करेगी।

इससे पहले मंगलवार को, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, उन्होंने कहा था कि प्रस्तावित कमेटी में हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) भी शामिल होंगे।

चीफ जस्टिस ने कहा था कि CBI के एक पूर्व डायरेक्टर और एक पूर्व DGP की सहमति ले ली गई है, और इनमें से कोई भी उस मामले से जुड़े राज्यों में से नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कमेटी के गठन और कामकाज से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद औपचारिक आदेश जारी करेगा।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के निर्देश के मुताबिक इस कमेटी में पंजाब, दिल्ली और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस को शामिल किया गया है।

किन-किन मुद्दों की होगी जांच?

यह कमेटी देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों को लेकर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कई मुद्दों की जांच करेगी। इनमें पुलिस की ज्यादतियां, सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं।

बेंच ने कहा कि फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (चेहरा पहचानने की तकनीक) के इस्तेमाल, निगरानी, निजता और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से जुड़े मुद्दों पर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट को ही फैसला करना होगा।

क्या छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR होंगी रद?

सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा के पेपर लीक होने को लेकर हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद करने की संभावना पर विचार करने की इच्छा भी जताई।

बेंच ने संकेत दिया कि वह ऐसे मामलों को रद करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने पर विचार कर सकती है। साथ ही यह भी साफ किया कि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों से जुड़े मामलों पर अलग से विचार किया जा सकता है।

20 जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली में हजारों छात्रों ने CJP के आयोजित संसद मार्च में हिस्सा लिया। उन्होंने परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की भी मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने जब मध्य दिल्ली में संसद की ओर बढ़ने और पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

(समाचार एजेंसी एएनआइ के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- भ्रूण लिंग निर्धारण से जुड़े मामलों में सीधे केस दर्ज नहीं कर सकती पुलिस, PCPNDT Act पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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