Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- फटकारने से आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- फटकारने से आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता
Tue, 18 Aug 2026 08:31 AM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 18 Aug 2026 08:31 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी की फटकार, अनुशासनात्मक कार्रवाई, प्रतिकूल टिप्पणी या सख्त व्यवहार मात्र से अधीनस्थ की आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी की ऐसी मंशा थी कि वह अधीनस्थ को आत्महत्या के लिए प्रेरित या मजबूर करे और आत्महत्या से पहले कोई उकसावे वाला कम किया हो। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा व जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने एक वन अधिकारी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ व ट्रायल कोर्ट के आदेश रद्द कर दिए। मामला एक महिला वन रेंज अधिकारी की आत्महत्या से जुड़ा था। उन्होंने तीन सुसाइड नोट छोड़े थे, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 306 के तहत अभियोजन के लिए धारा 107 में परिभाषित उकसावे के तत्व साबित होना जरूरी है।
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