सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छात्रों को रिहा करने और डेटा सुरक्षित रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलन में गिरफ्तार किए गए छात्रों को रिहा करने और उनके डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कई अंतरिम निर्देश भी जारी किए। अदालत ने विशेष रूप से आदेश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड (क्रिमिनल एंटीसिडेंट) नहीं है और जिन्हें केवल प्रदर्शन में भाग लेने के कारण गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।
डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने के निर्देश
कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड तथा पीसीआर लॉग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। इसके अलावा, अदालत ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रदर्शनकारियों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए तथा फिलहाल उसे सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी या पहचान संबंधी विवरण किसी भी रूप में प्रकाशित नहीं किए जाएं।अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने के कारण कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई (कोर्सिव स्टेप्स) न की जाए।
बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों की रिहाई के निर्देश
शुरुआत में कोर्ट ने आदेश दिया था कि 18 वर्ष से कम आयु के जिन बच्चों को हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, उन्हें रिहा किया जाए। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि हिरासत में लिए गए कुछ छात्र 19 और 20 वर्ष की आयु के भी हैं। इस पर अदालत ने अपना निर्देश स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन भी छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें उनकी आयु की परवाह किए बिना रिहा किया जाए।किस मामले पर सुनवाई कर रही थी पीठ
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ देशभर में 20 जुलाई से परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और अन्य कथित व्यवस्थागत अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित बर्बरता से संबंधित याचिकाओं के समूह पर सुनवाई कर रही थी।पीठ ने उन याचिकाओं पर भी सुनवाई की, जो आंदोलन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और मीडिया कर्मियों की ओर से दायर की गई हैं।
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